Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले ₹106 तक गिर सकता है रुपया! भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा अलर्ट, जानिए आम आदमी पर क्या होगा असर
भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक बड़ी चिंता सामने आई है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में आने वाले वर्षों में और गिरावट देखने को मिल सकती है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रुपया दिसंबर 2027 तक 102 रुपये प्रति डॉलर और दिसंबर 2028 तक 106 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। यह अनुमान Axis Bank Research की ओर से जारी किया गया है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो इसका असर सिर्फ विदेशी मुद्रा बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के आयात, महंगाई, व्यापार और आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि ₹106 का स्तर दिसंबर 2026 तक पहुंचने का अनुमान नहीं है। रिपोर्ट में इसके लिए दिसंबर 2028 का समय बताया गया है। यह एक अनुमान है, कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं।
अगले दो साल तक रुपये पर दबाव रहने का अनुमान
Axis Bank Research ने 3 नवंबर को जारी अपनी रिपोर्ट ‘The Middle (Kingdom) Path’ में रुपये को लेकर अपने पुराने अनुमानों को बरकरार रखा है। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2027 तक डॉलर के मुकाबले रुपया 97 से 99 के बीच और जून 2027 तक 98 से 100 के स्तर पर पहुंच सकता है। इसके बाद दिसंबर 2027 तक इसके 100 से 102 और दिसंबर 2028 तक 104 से 106 के बीच रहने का अनुमान जताया गया है। यानी रुपये की कीमत में आने वाले समय में और गिरावट की आशंका बनी हुई है।
आखिर क्यों कमजोर हो सकता है भारतीय रुपया?
रिपोर्ट में रुपये पर दबाव के पीछे कई आर्थिक कारण बताए गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख विदेशी पूंजी का बाहर जाना और भारत की विदेशी वित्तीय स्थिति पर बढ़ता दबाव है। जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालकर दूसरे देशों में निवेश करते हैं, तो डॉलर की मांग बढ़ती है। इससे रुपये पर दबाव बन सकता है।
इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी रुपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव रोकने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करता रहा है। इस प्रक्रिया में विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल होता है। Axis Bank Research का मानना है कि विदेशी मुद्रा भंडार को दोबारा मजबूत करना भी प्राथमिकता रहेगी। ऐसे में विदेशी निवेश बढ़ने के बावजूद रुपये को तेजी से मजबूत होने में मुश्किल आ सकती है।
रिपोर्ट में लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत हर महीने करीब 2 से 3 अरब डॉलर के आउटफ्लो और विदेशों में भारतीय कंपनियों के निवेश के जरिए लगभग 3 अरब डॉलर के बाहर जाने का भी जिक्र किया गया है। ये सभी कारक डॉलर की मांग बढ़ाकर रुपये की मजबूती को प्रभावित कर सकते हैं
हाल में मजबूत हुआ था रुपया, फिर क्यों बढ़ी चिंता?
दिलचस्प बात यह है कि रुपये को लेकर लंबी अवधि का अनुमान कमजोर रहने के बावजूद हाल के दिनों में भारतीय करेंसी में सुधार देखने को मिला है। पिछले सप्ताह डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 37 पैसे मजबूत हुआ। इसके पीछे विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) में सुधार, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कमी और डॉलर की अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति जैसे कारण रहे।
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले सप्ताह भारत में करीब 2 अरब डॉलर का नेट विदेशी पोर्टफोलियो निवेश आया। वहीं अमेरिकी 10 साल की ट्रेजरी यील्ड घटकर लगभग 4.9 प्रतिशत पर पहुंच गई। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भी भारत को कुछ राहत मिली। हालांकि, ब्रेंट क्रूड करीब 105 से 106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ था, जो भारत के आयात बिल के लिए चिंता का विषय है।
रुपया कमजोर हुआ तो आम आदमी की जेब पर क्या पड़ेगा असर?
डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत कम होने का असर सीधे आम लोगों के खर्च पर भी पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है और इनमें से कई आयात का भुगतान डॉलर में किया जाता है। ऐसे में डॉलर महंगा होने पर कंपनियों को उतना ही सामान खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
1. पेट्रोल-डीजल महंगा होने का खतरा: भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक देश है। रुपये में कमजोरी आने पर तेल खरीदने की लागत बढ़ सकती है। इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और परिवहन खर्च पर पड़ सकता है।
2. खाने-पीने की चीजों पर महंगाई: डीजल और परिवहन लागत बढ़ने से फल, सब्जियों और दूसरी जरूरी वस्तुओं को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना महंगा हो सकता है। इसका असर धीरे-धीरे बाजार में सामान की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
3. विदेश में पढ़ाई करना होगा महंगा: जो छात्र अमेरिका, ब्रिटेन या दूसरे देशों में पढ़ाई करने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए कमजोर रुपया परेशानी बढ़ा सकता है। उदाहरण के तौर पर, 50,000 डॉलर की पढ़ाई का खर्च 95 रुपये प्रति डॉलर के हिसाब से 47.50 लाख रुपये होता है। वहीं डॉलर का भाव 102 रुपये पहुंचने पर यही खर्च 51 लाख रुपये हो जाएगा। यानी छात्र के परिवार को 3.50 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं।
4. विदेश यात्रा और विदेशी सामान पर असर: विदेश घूमने जाने वाले भारतीयों को होटल, टिकट और अन्य खर्चों के लिए ज्यादा रुपये देने पड़ सकते हैं। इसके अलावा विदेश से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स, गैजेट्स और दूसरे आयातित सामान भी महंगे हो सकते हैं।
क्या रुपये में फिर से मजबूती आ सकती है?
रुपये का भविष्य केवल एक रिपोर्ट या अनुमान पर निर्भर नहीं करता। विदेशी निवेश में बढ़ोतरी, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और भारत के निर्यात में सुधार रुपये को मजबूती दे सकते हैं। इसके अलावा RBI की मौद्रिक नीतियां और विदेशी मुद्रा बाजार में उठाए जाने वाले कदम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
फिलहाल Axis Bank Research का अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद कुछ लंबी अवधि की चुनौतियों की ओर इशारा करता है। हालांकि, ₹106 प्रति डॉलर का स्तर दिसंबर 2028 के लिए अनुमानित है, न कि तत्काल होने वाली गिरावट। आने वाले महीनों में वैश्विक बाजार की स्थिति और विदेशी निवेश का रुख तय करेगा कि भारतीय रुपया किस दिशा में आगे बढ़ता है।









Leave a Reply