Delhi-NCR Pollution: 53% अभिभावक चाहते हैं 10 से 15 नवंबर तक स्कूल बंद, जानें क्या है वजह

Delhi-NCR Pollution: 53% अभिभावक चाहते हैं 10 से 15 नवंबर तक स्कूल बंद, जानें क्या है वजह

Delhi-NCR Pollution: 53% अभिभावक चाहते हैं 10 से 15 नवंबर तक स्कूल बंद, बच्चों की सेहत को लेकर बढ़ी चिंता

दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्तर खतरनाक होने के बीच स्कूलों में स्मॉग ब्रेक की मांग तेज, 38 हजार से ज्यादा प्रतिक्रियाओं वाले सर्वे में सामने आई अभिभावकों की राय

द पब्लिक हब | एजुकेशन डेस्क

नई दिल्ली। दिल्ली-NCR में बढ़ता वायु प्रदूषण अब बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य के लिए बड़ी चिंता बनता जा रहा है। सर्दियों की शुरुआत के साथ राजधानी और आसपास के शहरों में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। ऐसे में अभिभावकों ने बच्चों को जहरीली हवा से बचाने के लिए स्कूलों में कुछ दिनों की छुट्टी घोषित करने की मांग उठाई है। India Today की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सर्वे में शामिल 53 प्रतिशत अभिभावक चाहते हैं कि दिल्ली-NCR के सभी स्कूलों में 10 से 15 नवंबर 2026 तक पहले से स्मॉग ब्रेक घोषित किया जाए।

यह सर्वे कम्युनिटी प्लेटफॉर्म LocalCircles की ओर से किया गया, जिसमें दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद के लोगों से 38 हजार से अधिक प्रतिक्रियाएं मिलीं। सर्वे के नतीजे बताते हैं कि ज्यादातर अभिभावक बच्चों को प्रदूषण के सबसे खराब दौर में स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं हैं।

AQI 555 तक पहुंचने से बढ़ी चिंता

सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, 4 नवंबर को दिल्ली-NCR का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 555 तक पहुंच गया था। इस दौरान PM2.5 का औसत स्तर 450 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और PM10 का स्तर 215 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया।

भारत में PM2.5 की 24 घंटे की निर्धारित सुरक्षित सीमा 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गाइडलाइन 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। ऐसे में प्रदूषण का बढ़ता स्तर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता पैदा करता है।

53% अभिभावक चाहते हैं पहले से स्कूलों की छुट्टी

LocalCircles के सर्वे में 19,294 अभिभावकों ने इस सवाल पर अपनी राय दी कि क्या दिल्ली और आसपास के NCR शहरों में 10 से 15 नवंबर तक एक साथ स्कूलों में स्मॉग ब्रेक घोषित किया जाना चाहिए।

इसके जवाब में 53 प्रतिशत अभिभावकों ने पहले से छुट्टी घोषित करने का समर्थन किया। वहीं, 47 प्रतिशत लोगों का मानना था कि स्कूल तभी बंद किए जाने चाहिए, जब प्रदूषण गंभीर श्रेणी में पहुंच जाए या निर्धारित AQI सीमा पार कर जाए।

इससे साफ है कि अभिभावकों के बीच मुख्य चिंता बच्चों को प्रदूषण से बचाने की है। हालांकि, इस बात पर अलग-अलग राय है कि छुट्टी पहले से घोषित होनी चाहिए या प्रदूषण के स्तर के आधार पर फैसला लिया जाना चाहिए।

ऑनलाइन क्लास या पूरी छुट्टी, क्या चाहते हैं अभिभावक?

सर्वे में अभिभावकों से यह भी पूछा गया कि प्रस्तावित स्मॉग ब्रेक के दौरान स्कूलों में पढ़ाई किस तरह जारी रहनी चाहिए। इस सवाल पर 19,566 प्रतिक्रियाएं मिलीं।

  • 49 प्रतिशत अभिभावक चाहते हैं कि फिजिकल क्लास बंद करके ऑनलाइन पढ़ाई कराई जाए।
  • 25 प्रतिशत लोगों ने बिना ऑनलाइन क्लास के पूरी छुट्टी का समर्थन किया।
  • 13 प्रतिशत अभिभावक ऑनलाइन क्लास को वैकल्पिक रखने के पक्ष में हैं।
  • 13 प्रतिशत लोगों का कहना है कि स्कूल खुले रहें और प्रदूषण गंभीर होने पर ही ऑनलाइन क्लास शुरू की जाए।

इस तरह 74 प्रतिशत अभिभावक किसी न किसी रूप में फिजिकल क्लास बंद करने के पक्ष में हैं। वहीं, 62 प्रतिशत लोग ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखने के समर्थन में हैं। इससे पता चलता है कि अभिभावक पढ़ाई बाधित किए बिना बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं।

10 से 15 नवंबर के बीच क्यों बढ़ सकती है परेशानी?

इस बार दिवाली 8 नवंबर को है। त्योहार के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं पहले से खराब हवा को और प्रदूषित कर सकता है। इसके अलावा पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं भी दिल्ली-NCR की हवा को प्रभावित करती हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में 2 नवंबर तक पराली जलाने की 1,612 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि 23 अक्टूबर तक यह संख्या 542 थी। इसके साथ वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों की धूल और औद्योगिक उत्सर्जन भी प्रदूषण बढ़ाने में योगदान देते हैं।

क्या 10 नवंबर से स्कूल बंद होंगे?

यहां अभिभावकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि सर्वे में छुट्टी की मांग सामने आई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार ने 10 से 15 नवंबर तक स्कूल बंद करने का आदेश जारी कर दिया है।

दिल्ली-NCR के अलग-अलग शहरों में स्कूलों के संचालन को लेकर संबंधित प्रशासन और शिक्षा विभाग फैसला लेते हैं। GRAP के तहत प्रदूषण की गंभीरता के अनुसार शैक्षणिक गतिविधियों को ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड में बदलने के प्रावधान हैं।

फिलहाल अभिभावकों की मांग है कि दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और गाजियाबाद के प्रशासन मिलकर एक समान फैसला लें, ताकि बच्चों को प्रदूषण के गंभीर प्रभावों से बचाया जा सके।

निष्कर्ष: दिल्ली-NCR में बढ़ता प्रदूषण अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य से भी सीधे जुड़ गया है। 53 प्रतिशत अभिभावकों की मांग प्रशासन के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि क्या बच्चों की सुरक्षा के लिए समय रहते स्कूलों में स्मॉग ब्रेक घोषित किया जाना चाहिए?

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