Bank Credit Growth 2026: भारत के Banking सेक्टर में कर्ज देने के रुझान में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब बैंक घर खरीदने वाले ग्राहकों की तुलना में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) को ज्यादा कर्ज दे रहे हैं। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के आंकड़े बताते हैं कि बैंकों के लिए NBFCs कर्ज विस्तार का सबसे प्रमुख माध्यम बनकर उभरी हैं। यह बदलाव देश की वित्तीय व्यवस्था और बाजार में बढ़ती ऋण मांग की ओर संकेत करता है।
द टाइम्स ऑफ इंडिया की 31 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच बैंकों ने NBFCs को दिए गए कर्ज में 1.8 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की। वहीं, इसी अवधि में होम लोन के रूप में 1.4 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज दिया गया। इस तरह NBFCs ने पहली बार इस अवधि में आवास क्षेत्र को पीछे छोड़ दिया।
बैंकिंग सेक्टर में 16.1 लाख करोड़ रुपये का नया कर्ज
रिपोर्ट के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 तक देश के अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का कुल बकाया गैर-खाद्य ऋण (Non-Food Credit) बढ़कर 229 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इसमें सालाना आधार पर 19.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। मार्च से सितंबर के बीच इसमें 16.1 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।
इस अतिरिक्त कर्ज में सबसे बड़ी हिस्सेदारी सेवा क्षेत्र की रही, जहां 4.9 लाख करोड़ रुपये का नया कर्ज दिया गया। इसके बाद व्यक्तिगत ऋण (Personal Loans) में 4.5 लाख करोड़ रुपये, उद्योग क्षेत्र में 3.7 लाख करोड़ रुपये और कृषि क्षेत्र में 1.8 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई।
NBFCs को कर्ज देने में 41.8% की तेजी
सेवा क्षेत्र के भीतर NBFCs सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में शामिल रहीं। बैंकों का NBFCs को दिया गया कुल बकाया कर्ज सालाना आधार पर 41.8 प्रतिशत बढ़कर 22.5 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, कमर्शियल रियल एस्टेट को दिया गया कर्ज 23.3 प्रतिशत बढ़कर 7.5 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।
इसके अलावा व्यापार क्षेत्र को दिए गए कर्ज में भी 23.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। कुल सेवा क्षेत्र का बकाया कर्ज 28.3 प्रतिशत बढ़कर 64.9 लाख करोड़ रुपये हो गया।
छोटे उद्योगों और गोल्ड लोन में भी बढ़ी मांग
औद्योगिक क्षेत्र में भी कर्ज की मांग मजबूत बनी हुई है। बड़े उद्योगों को दिए गए कर्ज में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि मध्यम उद्यमों के कर्ज में 33.2 प्रतिशत और सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों (MSMEs) के कर्ज में 24.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
रिटेल लोन में गोल्ड लोन भी तेजी से बढ़ा है। सोने के आभूषणों के बदले दिए गए कर्ज का कुल बकाया 82.6 प्रतिशत बढ़कर 5.8 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। केवल छह महीनों में बैंकों ने 1.2 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त गोल्ड लोन दिए।
क्या संकेत दे रहे हैं ये आंकड़े?
बैंकिंग सेक्टर के ये आंकड़े बताते हैं कि देश में कर्ज की मांग अब केवल घर खरीदने या व्यक्तिगत जरूरतों तक सीमित नहीं है। NBFCs, छोटे उद्योगों, व्यापार और सेवा क्षेत्र की बढ़ती वित्तीय जरूरतें बैंकिंग सिस्टम की प्राथमिकताओं को प्रभावित कर रही हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि NBFCs को मिलने वाला बढ़ता बैंक ऋण देश के कारोबार, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को किस तरह प्रभावित करता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, बैंकिंग सेक्टर में NBFCs की बढ़ती हिस्सेदारी भारतीय अर्थव्यवस्था में बदलते वित्तीय रुझानों को दर्शाती है। बैंकों का NBFCs को अधिक कर्ज देना इस बात का संकेत है कि कारोबार, छोटे उद्योगों और वित्तीय सेवाओं में ऋण की मांग तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, इस बढ़ते कर्ज के साथ जोखिम प्रबंधन और ऋण की गुणवत्ता बनाए रखना भी जरूरी होगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि NBFCs की यह बढ़ती भूमिका देश की आर्थिक गतिविधियों और बैंकिंग व्यवस्था को किस दिशा में ले जाती है।









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