PNB Fraud Case: PNB में 10.24 करोड़ रुपये का घोटाला! बैंक कर्मचारी समेत दो गिरफ्तार, ग्राहकों के खातों से ऐसे निकाली गई रकम
बैंक में जमा अपनी मेहनत की कमाई को लोग सुरक्षित मानते हैं, लेकिन अगर बैंक के अंदर काम करने वाला कर्मचारी ही ग्राहकों के खातों से पैसे निकालने लगे तो भरोसा किस पर किया जाए? ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा से सामने आया है। यहां पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की सेक्टर पाई-1 शाखा में कथित तौर पर 10.24 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में बैंक की एक महिला कर्मचारी और पुणे के एक निजी व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।
जांच एजेंसी को शक है कि ग्राहकों के बैंक खातों से बिना अनुमति रकम निकालकर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की गई। यह कथित गड़बड़ी करीब तीन साल तक चलती रही। मामले में बैंक के लॉगिन आईडी और पासवर्ड के दुरुपयोग की बात भी सामने आई है। CBI अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे कथित घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
कौन हैं गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी?
CBI ने 3 नवंबर 2026 को इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें पहली आरोपी दीपांशी शर्मा है, जो ग्रेटर नोएडा स्थित PNB की सेक्टर पाई-1 शाखा में ऑफिस असिस्टेंट के पद पर तैनात थी। दूसरा आरोपी आशुतोष कुमार पाठक है, जो पुणे का रहने वाला निजी व्यक्ति बताया गया है।
बैंक की शिकायत के आधार पर CBI ने 29 अक्टूबर को इस मामले में FIR दर्ज की थी। आरोप है कि दीपांशी ने आशुतोष और कुछ अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर ग्राहकों के खातों से अनधिकृत तरीके से रकम निकालने और ट्रांसफर करने का काम किया।
गिरफ्तारी के बाद CBI ने पुणे की विशेष अदालत से आशुतोष कुमार पाठक की ट्रांजिट रिमांड भी हासिल की। एजेंसी मामले में डिजिटल रिकॉर्ड और बैंकिंग लेनदेन की जांच कर रही है।
ग्राहक की शिकायत से कैसे खुला 10.24 करोड़ का मामला?
इस पूरे मामले का खुलासा 16 सितंबर को हुआ, जब एक महिला खाताधारक अपने खाते की पासबुक अपडेट कराने बैंक पहुंची। इस दौरान उसे खाते में तीन ऐसे डेबिट ट्रांजैक्शन दिखाई दिए, जिनकी उसने अनुमति नहीं दी थी।
महिला ने इन लेनदेन को लेकर बैंक अधिकारियों से सवाल किया। मामला शाखा प्रबंधन तक पहुंचा तो बैंक ने संबंधित ट्रांजैक्शन की जांच शुरू की। बैंक को जब इन लेनदेन से जुड़े दस्तावेज और वाउचर नहीं मिले, तो संदेह और गहरा गया।
इसके बाद बैंक ने कई खातों की जांच की और शुरुआती पड़ताल में करीब 10.24 करोड़ रुपये के कथित अनधिकृत लेनदेन का पता चला। बैंक ने अपनी शिकायत में बताया कि यह रकम अलग-अलग ग्राहकों के खातों से निकाली गई थी।
दूसरे कर्मचारियों की Login ID और Password का हुआ इस्तेमाल?
बैंक की शुरुआती जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि कथित धोखाधड़ी के लिए शाखा में तैनात दूसरे अधिकारियों के लॉगिन क्रेडेंशियल का इस्तेमाल किया गया था।
बैंक की शिकायत के अनुसार, दीपांशी ने कथित तौर पर छह अन्य बैंक अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग करके Core Banking System (CBS) के जरिए ग्राहकों के खातों से रकम ट्रांसफर की। जांच में सिस्टम लॉग और यूजर एक्टिविटी रिकॉर्ड में कई संदिग्ध ट्रांजैक्शन भी सामने आए।
आरोप है कि इन ट्रांजैक्शन से जुड़े वाउचर और जरूरी दस्तावेज भी रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं थे। कुछ ग्राहकों के मोबाइल ट्रांजैक्शन अलर्ट में बदलाव किए जाने की बात भी बैंक की शिकायत में सामने आई है। इससे खाताधारकों को पैसे निकलने की जानकारी तुरंत नहीं मिल पाई। हालांकि, दूसरे कर्मचारियों की भूमिका और उनके लॉगिन का इस्तेमाल उनकी जानकारी में हुआ या नहीं, यह जांच का विषय है।
FD तोड़कर भी निकाली गई रकम
इस कथित घोटाले में केवल सेविंग अकाउंट ही नहीं, बल्कि ग्राहकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भी जांच के दायरे में हैं। बैंक की शुरुआती पड़ताल में सामने आया कि कुछ FD में संयुक्त खाताधारक के रूप में दूसरे लोगों के नाम जोड़े गए थे।
इसके बाद कुछ FD के भुगतान से जुड़े बैंक खाते की जानकारी बदलकर उन्हें समय से पहले बंद किए जाने और उनकी रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर किए जाने का आरोप है।
बैंक की शिकायत में 49 फिक्स्ड डिपॉजिट का विवरण भी शामिल किया गया है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन जमाओं से कितनी रकम निकाली गई और किन-किन खातों के जरिए उसे आगे भेजा गया।
कई अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के घेरे में
CBI की FIR में दीपांशी शर्मा और आशुतोष पाठक के अलावा कुछ अन्य निजी व्यक्तियों और अज्ञात सरकारी कर्मचारियों का भी जिक्र है। बैंक की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अलग-अलग खातों के माध्यम से रकम को घुमाकर आशुतोष पाठक से जुड़े खाते तक पहुंचाया गया।
CBI ने इस मामले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात, रिकॉर्ड में हेराफेरी और भ्रष्टाचार से संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधान भी लगाए गए हैं।
एजेंसी बैंक के डिजिटल रिकॉर्ड, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और संदिग्ध खातों की जांच कर रही है। फिलहाल यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कथित धोखाधड़ी से कितने ग्राहक प्रभावित हुए और पूरी रकम किन-किन लोगों तक पहुंची।
बैंक में जमा पैसा कितना सुरक्षित? ग्राहकों के लिए बढ़ी चिंता
ग्रेटर नोएडा का यह मामला बैंकिंग सिस्टम में आंतरिक सुरक्षा और कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। आमतौर पर ग्राहक मानते हैं कि बैंक के अंदर होने वाला हर लेनदेन सुरक्षित और निगरानी में रहता है। लेकिन इस मामले में बैंक कर्मचारियों के लॉगिन क्रेडेंशियल के कथित दुरुपयोग ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल CBI की जांच जारी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं। जांच से यह भी स्पष्ट होगा कि कथित धोखाधड़ी में किन लोगों की भूमिका थी और ग्राहकों की रकम को वापस दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।









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