Manipur Sexual Violence Case: मणिपुर यौन हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, तीसरी पीड़िता की गवाही सुनिश्चित करने का CBI को निर्देश
मणिपुर में 2023 के दौरान हुई यौन हिंसा की घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को निर्देश दिया है कि मामले की तीसरी पीड़िता की गवाही तय तारीखों पर गुवाहाटी की विशेष अदालत में सुनिश्चित की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम मुकदमे की सुनवाई में हो रही देरी को देखते हुए उठाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पीड़िता की गवाही दर्ज कराने की प्रक्रिया तय समय के अनुसार आगे बढ़नी चाहिए, ताकि मामले की सुनवाई में और देरी न हो।
3 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने बताया कि मामले में शिकायतकर्ता के अलावा तीन पीड़ित महिलाएं हैं। इनमें से एक पीड़िता की जिरह पहले ही पूरी हो चुकी है, जबकि दूसरी पीड़िता की गवाही दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में तीसरी पीड़िता की गवाही भी जल्द पूरी कराने के निर्देश दिए गए हैं।
13, 16 और 19 नवंबर को दर्ज होगी तीसरी पीड़िता की गवाही
सुप्रीम कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया है कि तीसरी पीड़िता को 13, 16 और 19 नवंबर को गुवाहाटी स्थित विशेष ट्रायल कोर्ट के सामने पेश कराया जाए, ताकि निर्धारित तारीखों पर उसकी गवाही दर्ज की जा सके। अदालत ने मामले को 19 नवंबर के बाद दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान CBI की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजा ठाकरे ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। वहीं, एक आरोपी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने सुनवाई में देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अदालत के कई निर्देशों के बावजूद मुकदमे की कार्यवाही अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िताओं की गवाही पूरी कराने को प्राथमिकता देते हुए CBI को तीसरी पीड़िता की उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा।
क्या है 2023 का मणिपुर यौन हिंसा मामला?
यह मामला 4 मई 2023 का है, जब मणिपुर में जातीय हिंसा के दौरान थौबल जिले में कुकी-जो समुदाय की तीन महिलाओं के साथ कथित तौर पर गंभीर हिंसा की गई थी। आरोप है कि भीड़ ने महिलाओं को निर्वस्त्र कर सार्वजनिक रूप से घुमाया था। इस घटना में दो महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म किए जाने के आरोप भी सामने आए थे। घटना के दौरान एक पीड़िता के पिता और भाई की भी कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी।
इस घटना का वीडियो जुलाई 2023 में सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया था। महिलाओं के साथ हुई इस अमानवीय घटना ने कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था और जांच CBI को सौंप दी थी। बाद में मामले की सुनवाई को गुवाहाटी स्थानांतरित कर दिया गया, जहां विशेष अदालत में ट्रायल चल रहा है।
आरोपियों की जमानत याचिका भी है सुनवाई के दायरे में
इस मामले में गवाही पूरी कराने के साथ आरोपियों की जमानत का मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट के सामने है। एक आरोपी युमलेम्बम जिबान सिंह की ओर से अदालत में जमानत की मांग की गई है। उसके वकील ने दलील दी कि बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद मुकदमे की सुनवाई में पर्याप्त प्रगति नहीं हो रही है।
वहीं, CBI की ओर से यह चिंता जताई गई है कि आरोपियों को जमानत मिलने से पीड़ित गवाहों के अदालत में बयान देने की इच्छा और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। एजेंसी ने पहले भी अदालत के सामने दलील दी थी कि पीड़िताओं की गवाही इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण है और इसे जल्द दर्ज कराया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी 5 अक्टूबर को CBI और ट्रायल कोर्ट को दो प्रमुख पीड़ित गवाहों की पेशी और गवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने संकेत दिया था कि गवाहों की गवाही दर्ज होने के बाद जमानत से जुड़े मुद्दों पर विचार करना बेहतर होगा।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आगे बढ़ रही सुनवाई
मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट लगातार नजर बनाए हुए है। मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा के दौरान राज्य में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी और हजारों लोग विस्थापित हुए थे। इस हिंसा से जुड़े कई गंभीर मामलों की जांच CBI और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले मणिपुर और असम सरकारों सहित संबंधित पक्षों से हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों की व्यवस्था पर भी विचार करने को कहा था। इसका उद्देश्य मामलों की सुनवाई में तेजी लाना और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने की प्रक्रिया को मजबूत करना है।
पीड़िताओं की गवाही क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
इस मामले में पीड़िताओं के बयान मुकदमे की सुनवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनकी गवाही से घटना से जुड़े आरोपों और परिस्थितियों को अदालत के सामने रखने में मदद मिलेगी। साथ ही, गवाहों की जिरह पूरी होने से मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया को गति मिल सकती है।
अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के बाद 13, 16 और 19 नवंबर की तारीखें अहम हो गई हैं। इन तारीखों पर तीसरी पीड़िता की पेशी और गवाही सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी CBI की होगी। इसके बाद 19 नवंबर के बाद सुप्रीम कोर्ट मामले की अगली सुनवाई करेगा।
फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पीड़िताओं की गवाही की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी और आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अदालत क्या फैसला लेगी। देश की नजर अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी है। इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया का समय पर पूरा होना पीड़िताओं को न्याय दिलाने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण कदम होगा।









Leave a Reply