Rajasthan Yojana Bhawan Case: योजना भवन नकदी कांड – सत्ता बदली तो भ्रष्टाचार पर भाजपा की आवाज भी धीमी पड़ गई ?

Rajasthan Yojana Bhawan Case: योजना भवन नकदी कांड - सत्ता बदली तो भ्रष्टाचार पर भाजपा की आवाज भी धीमी पड़ गई ?

Rajasthan Yojana Bhawan Case: योजना भवन नकदी कांड – सत्ता बदली तो भ्रष्टाचार पर भाजपा की आवाज भी धीमी पड़ गई ?

‘2.31 करोड़ नकद और एक किलो सोने की बरामदगी के तीन साल बाद भी बड़े सवाल कायम – विपक्ष में CBI जांच मांगने वाली भाजपा अब सत्ता में, हाईकोर्ट ने भी जांच की सुस्ती पर जताई नाराजगी

संवाददाता – द पब्लिक हब

जयपुर। भ्रष्टाचार के खिलाफ विपक्ष में आक्रामक तेवर और सत्ता में आने के बाद खामोशी राजस्थान का योजना भवन नकदी कांड भाजपा सरकार की इसी राजनीतिक कसौटी पर सवाल खड़े कर रहा है। मई 2023 में सरकारी भवन के बेसमेंट की अलमारी से 2.31 करोड़ रुपये नकद और करीब एक किलो सोना मिलने पर भाजपा ने इसे कांग्रेस शासन का बड़ा भ्रष्टाचार बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी। तत्कालीन भाजपा नेताओं ने सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में 3,500 से 5,000 करोड़ रुपये तक के कथित घोटाले के आरोप लगाए थे। दिसंबर 2023 में सत्ता परिवर्तन हुआ, लेकिन तीन साल से अधिक समय बाद भी बरामद धन के स्रोत, कथित लेन-देन के नेटवर्क और टेंडर प्रक्रिया में जिम्मेदार लोगों को लेकर निर्णायक तस्वीर सार्वजनिक नहीं है। सांसद हनुमान बेनीवाल ने 2026 में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से इसी मामले पर जवाब मांगकर पुरानी राजनीतिक बहस फिर खड़ी कर दी है। सवाल साफ है की जिस प्रकरण को भाजपा ने कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार का प्रतीक बताया था, उसकी
जांच और निष्कर्ष जनता के सामने कब आएंगे ?

करोड़ों की बरामदगी, जांच का दायरा हजारों करोड़ के आरोपों तक

19 मई 2023 को योजना भवन के बेसमेंट की बंद अलमारी से 2.31 करोड़ रुपये से अधिक नकदी और करीब एक किलो सोने की छड़ मिली थी। जांच में तत्कालीन संयुक्त निदेशक वेद प्रकाश यादव को गिरफ्तार किया गया। पुलिस की पूछताछ के दौरान ठेकेदारों से कथित रिश्वत लेकर रकम जमा करने के आरोप सामने आए। बाद में एसीबी और ईडी ने भी जांच शुरू की। भाजपा ने इस बरामदगी को विभागीय खरीद और सरकारी निविदाओं में कथित भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए तत्कालीन सरकार को घेरा। राजेंद्र राठौड़, सीपी जोशी और किरोड़ीलाल मीणा ने 24 मई 2023 को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में करीब 3,500 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया था। बाद में किरोड़ीलाल मीणा ने यह आंकड़ा करीब 5,000 करोड़ रुपये तक बताया और जांच की दिशा पर सवाल उठाए थे। लेकिन राजनीतिक आरोपों से आगे अब जांच के नतीजे जानना जरूरी है। बरामद धन किसका था ? कथित रिश्वत देने वाले कौन थे? क्या सरकारी टेंडरों और खरीद में किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका सामने आई ?

हाईकोर्ट की नाराजगी, जांच अब भी सवालों में

सितंबर 2024 में राजस्थान हाईकोर्ट ने एसीबी को सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के पिछले पांच वर्षों के टेंडरों की जांच के निर्देश दिए। इसके बाद एसआईटी गठित हुई। फरवरी 2026 में अदालत ने जांच की धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए प्रगति रिपोर्ट मांगी। सुनवाई में 27 मामलों से संबंधित दस्तावेज, एक प्राथमिकी और 23 निविदाओं सहित तीन शिकायतों की जांच का उल्लेख सामने आया था। मार्च 2026 में एसीबी ने रिपोर्ट पेश करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। अदालत की चिंता ने इस प्रकरण को फिर महत्वपूर्ण बना दिया है। जांच का दायरा बढ़ा, लेकिन अब तक सार्वजनिक रूप से ऐसे निर्णायक निष्कर्ष सामने नहीं आए, जिनसे पूरे कथित तंत्र की तस्वीर साफ हो सके।

सत्ता में जवाबदेही की असली परीक्षा

बेनीवाल ने मुख्यमंत्री से बरामद नकदी और सोने के मालिक, कथित भ्रष्टाचार में शामिल लोगों तथा जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका सवाल भाजपा के पुराने रुख और मौजूदा सरकार की कार्यशैली के बीच सीधा विरोधाभास सामने रखता है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि एसीबी और ईडी की जांच कहां तक पहुंची, टेंडरों की पड़ताल में क्या सामने आया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी। भ्रष्टाचार पर सियासत करना आसान है, लेकिन सत्ता में रहते हुए उसका पर्दाफाश करना असली परीक्षा है।

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