‘INDIA’ ब्लॉक का ‘चलो दिल्ली’ प्रदर्शन: वोट चोरी और CEC के खिलाफ ‘चलो दिल्ली’ महा-आंदोलन
टैगलाइन: मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानवेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में गड़बड़ी (SIR) के खिलाफ विपक्ष का हुंकार, राहुल गांधी, ममता बनर्जी और अखिलेश यादव समेत कई दिग्गज नेता सड़क पर उतरे।
दिल्ली की ऐतिहासिक सियासत एक बार फिर सुलग उठी है। राजधानी के रामलीला मैदान में आज ‘INDIA’ गठबंधन द्वारा आयोजित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महा-रैली ने देश की राजनीति का पारा अचानक हाई कर दिया है। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) में कथित अनियमितताओं और बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटने के गंभीर आरोपों के बीच विपक्ष ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस महा-आंदोलन ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और अधिक तीखा होने वाला है।
खुली बस में सवार हुए विपक्ष के दिग्गज
कनॉट प्लेस और मिंटो रोड जंक्शन से शुरू हुए इस महा-मार्च में विपक्षी एकता की एक मजबूत तस्वीर देखने को मिली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा सहित तमाम बड़े नेता एक ओपन-टॉप बस में सवार होकर रामलीला मैदान की ओर बढ़े। इस दौरान उनके साथ पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ नेता और हजारों की संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे, जो हाथों में तिरंगा झंडा थामे सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) पर सीधा हमला
विपक्ष का यह पूरा प्रदर्शन मुख्य रूप से मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानवेश कुमार के खिलाफ केंद्रित रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग एक निष्पक्ष संस्था की तरह काम करने के बजाय सत्ताधारी दल के इशारों पर काम कर रहा है। आरोप है कि SIR प्रक्रिया के तहत सोची-समझवीं रणनीति के तहत लाखों नागरिकों के वोट सूची से हटाए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर देश के लोकतंत्र पर बड़ा हमला है। कांग्रेस और अन्य घटक दलों ने दोटूक शब्दों में कहा कि जब तक लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा नहीं हो जाती, तब तक उनका यह संघर्ष थमने वाला नहीं है।
राजधानी में भारी सुरक्षा बल और सियासी बयानबाजी
इस महा-रैली को लेकर दिल्ली पुलिस पूरी तरह मुस्तैद नजर आई। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए रामलीला मैदान और उसके आसपास के इलाकों में लगभग 10,000 पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया था, साथ ही चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। दूसरी ओर, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस विरोध प्रदर्शन को महज एक राजनीतिक नौटंकी करार दिया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि जनता ने देश के विकास के लिए जनादेश दिया है और विपक्ष सिर्फ अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए जनता को गुमराह कर रहा है।
निष्कर्ष: लोकतंत्र की रक्षा या राजनीतिक जंग?
रामलीला मैदान की यह विशाल भीड़ और विपक्षी नेताओं के तेवर यह बताने के लिए काफी हैं कि आने वाले दिनों में चुनाव सुधारों और निष्पक्षता का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहने वाला है। जहां एक तरफ विपक्ष इसे ‘संविधान और लोकतंत्र को बचाने की आखिरी लड़ाई’ बता रहा है, वहीं शासक दल इसे जनता के जनादेश का अनादर मान रहा है। बहरहाल, इस विरोध प्रदर्शन ने देश की सियासत में हलचल तेज कर दी है और आने वाले चुनावों से पहले सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है।
इस आंदोलन और आगे की राजनीतिक हलचल को लेकर आपकी क्या राय है? हमें नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं।









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