Barabanki Murder Case: 42 लाख रुपये के मुआवजे के लिए रिश्तों का कत्ल! भाई-भाभी पर बहन की हत्या का आरोप
महादेवा कॉरिडोर प्रोजेक्ट में मकान के बदले मिलने थे करीब 42 लाख रुपये, बहन को हिस्सा न देना पड़े इसलिए हत्या की साजिश रचने का पुलिस का आरोप; आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मन्नू की हत्या के मामले में भाई और भाभी गिरफ्तार
संवाददाता – द पब्लिक हब
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां करीब 42 लाख रुपये के मुआवजे के लालच में एक भाई और भाभी पर अपनी ही बहन की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा है। मृतका मन्नू आंगनबाड़ी कार्यकर्ता थीं। पुलिस के मुताबिक, महादेवा कॉरिडोर प्रोजेक्ट के तहत मकान के बदले मिलने वाली मुआवजे की रकम में बहन को हिस्सा न देना पड़े, इसी वजह से उनकी हत्या की गई। पुलिस ने इस मामले में मृतका के भाई संदीप और उसकी पत्नी शीतल को गिरफ्तार कर लिया है।
महादेवा कॉरिडोर के मुआवजे से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला बाराबंकी जिले के रामनगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, संदीप का मकान महादेवा कॉरिडोर प्रोजेक्ट की जद में आ गया था। परियोजना के लिए मकान हटाए जाने के बदले उसे करीब 42 लाख रुपये का मुआवजा मिलने वाला था। इसी रकम को लेकर परिवार में विवाद पैदा होने की बात सामने आई है।
पुलिस का आरोप है कि संदीप और उसकी पत्नी शीतल नहीं चाहते थे कि इस मुआवजे में मन्नू को कोई हिस्सा मिले। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि रकम को लेकर दोनों के मन में लालच था और इसी वजह से उन्होंने मन्नू को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। हालांकि, मुआवजे में हिस्सेदारी को लेकर परिवार के बीच क्या कानूनी या पारिवारिक स्थिति थी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
30 अक्टूबर को ईंट से किए गए थे कई वार
पुलिस के मुताबिक, मन्नू की हत्या 30 अक्टूबर को की गई थी। उन पर ईंट से सिर और चेहरे पर कई वार किए गए, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना की जानकारी सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। मामले में मृतका के भाई संदीप और भाभी शीतल के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की। शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने परिवार के सदस्यों से पूछताछ की और घटना से जुड़े साक्ष्य जुटाए। जांच में मुआवजे की रकम को हत्या की वजह मानकर पड़ताल आगे बढ़ाई गई।
स्वाट और सर्विलांस टीम ने की कार्रवाई
बाराबंकी के अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तर) विवेक तिवारी के मुताबिक, मामले की जांच के लिए स्वाट, सर्विलांस और रामनगर थाना पुलिस की संयुक्त टीम लगाई गई थी। टीम ने जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर संदीप और उसकी पत्नी शीतल को गिरफ्तार किया।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ और जांच में महादेवा कॉरिडोर के लिए मिलने वाले करीब 42 लाख रुपये के मुआवजे का मामला सामने आया। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
मुआवजे की रकम ने उजागर किया रिश्तों का विवाद
इस घटना ने एक बार फिर संपत्ति और मुआवजे को लेकर परिवारों में पैदा होने वाले विवादों पर सवाल खड़े किए हैं। जिस बहन ने अपने भाई के साथ बचपन बिताया, उसी की हत्या के मामले में भाई और भाभी आरोपी बनाए गए हैं। पुलिस की जांच में सामने आया कथित मकसद करीब 42 लाख रुपये की मुआवजा राशि बताई जा रही है।
हालांकि, मामले में पुलिस के आरोपों और अदालत में साबित होने वाले तथ्यों के बीच अंतर समझना जरूरी है। फिलहाल दोनों आरोपी जेल में हैं और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही पूरे घटनाक्रम की अंतिम तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।









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