जयपुर। राजस्थान में सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती-2021 के पेपर लीक विवाद के बाद आगामी सितंबर माह में प्रस्तावित दोबारा परीक्षा (Re-exam) अब फिर से कानूनी दांवपेंच में उलझती नजर आ रही है। राजस्थान हाईकोर्ट ने इस पुन: परीक्षा में केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को शामिल करने के फैसले पर कड़ा रुख अपनाया है, जिन्होंने साल 2021 की मूल परीक्षा के दोनों पेपर दिए थे।
हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने सोमवार को देवेंद्र सैनी, प्रश्नजीत सिंह व अन्य की याचिकाओं पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने आरपीएससी प्रबंधन से इस बेहद गंभीर और संवेदनशील मामले में 20 मई 2026 तक हर हाल में लिखित जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं।
क्या है पूरा विवाद और याचिकाकर्ताओं की दलील?
याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र सैनी, निखिल कुमावत और अन्य ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि आरपीएससी द्वारा अपनाया जा रहा यह नियम पूरी तरह से भेदभावपूर्ण और गैर-संवैधानिक है।
- तर्क 1 (समानता का उल्लंघन): वकीलों ने कहा कि मूल परीक्षा के समय जो अभ्यर्थी किन्हीं अपरिहार्य या व्यक्तिगत कारणों से दोनों प्रश्न पत्रों में नहीं बैठ सके थे, उन्हें अब पूरी तरह बाहर करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 (समानता और अवसर की समानता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है।
- तर्क 2 (आरपीएससी का पुराना रिकॉर्ड): याचिका में आरपीएससी की ही पूर्व में रद्द हुई ईओ-आरओ (EO-RO) भर्ती का उदाहरण दिया गया। अधिवक्ताओं ने बताया कि जब ईओ-आरओ परीक्षा पेपर लीक के कारण रद्द हुई थी, तब दोबारा परीक्षा में आयोग ने उन सभी 100% अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र जारी किए थे जिन्होंने फॉर्म भरा था, भले ही वे पहली परीक्षा में अनुपस्थित रहे हों। ऐसे में एसआई भर्ती के लिए अलग पैमाना क्यों रखा जा रहा है?
विवादित प्रेसनोट: आयोग ने बीते 8 मई 2026 को एक प्रेसनोट जारी किया था, जिसके तहत केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को 16 से 30 मई तक अपने आवेदन फॉर्म में संशोधन (Edit) करने की अनुमति दी गई है, जिन्होंने पूर्व की मूल परीक्षा के दोनों प्रश्न पत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी।
भर्ती परीक्षा का सांख्यिकी गणित (फैक्ट फाइल)
इस विवाद का सीधा असर उन लाखों युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है जो पिछले 5 सालों से खाकी पहनने का सपना संजोए बैठे हैं:
- कुल आवेदनकर्ता: $\approx$ 7 लाख 95 हजार अभ्यर्थियों ने साल 2021 में इस भर्ती के लिए वैध आवेदन किया था।
- परीक्षा में बैठे अभ्यर्थी: 13 से 15 सितंबर 2021 को आयोजित हुई लिखित परीक्षा के दोनों प्रश्न पत्रों में केवल 3,83,097 अभ्यर्थी ही उपस्थित हुए थे।
- वंचितों की संख्या: आयोग के वर्तमान नियम के कारण लगभग 4 लाख से अधिक वे आवेदक दोबारा परीक्षा की दौड़ से सीधे बाहर हो रहे हैं, जो मूल परीक्षा के दिन अनुपस्थित थे।
निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक रद्द हो चुकी है यह भर्ती
गौरतलब है कि बड़े पैमाने पर हुई डमी कैंडिडेट और पेपर लीक की धांधली के बाद राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 28 अगस्त 2025 को इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को सिरे से रद्द करने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। इसके बाद सरकार और प्रभावित ट्रेनी एसआई (Trainee SI) मामले को लेकर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (खंडपीठ) पहुंचे, लेकिन खंडपीठ ने भी 4 अप्रैल 2026 को एकलपीठ के फैसले को पूरी तरह सही माना।
हताश होकर चयनित अभ्यर्थियों ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में विशेष अनुमति याचिका (SLP) के जरिए चुनौती दी थी। मगर, बीते 4 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए चयनित अभ्यर्थियों की सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था। अब जब परीक्षा सितंबर में दोबारा होने जा रही है, तब परीक्षा में बैठने की पात्रता (Eligibility) को लेकर यह नया कानूनी टकराव पैदा हो गया है।