जयपुर | राजस्थान सरकार की RGHS योजना में डॉक्टरों और लैब संचालकों की मिलीभगत से किए जा रहे एक बड़े संगठित अपराध का पर्दाफाश हुआ है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच में सामने आया है कि इस धोखाधड़ी से न केवल सरकारी खजाने को करोड़ों की हानि हुई है, बल्कि वास्तविक मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी बुरा असर पड़ा है।
कैसे हो रहा था ‘फर्जीवाड़े का खेल’?
SOG के डीआईजी पारिस देशमुख के अनुसार, आरोपियों ने योजना की खामियों का फायदा उठाकर लूट का तंत्र विकसित कर लिया था:
- जाली परामर्श: बिना मरीज को देखे फर्जी पर्चियां बनाकर पोर्टल पर अपलोड करना।
- महंगी जांचों का मायाजाल: जरूरत न होने पर भी महंगी MRI लिखना और सामान्य जांच को “Contrast MRI” दिखाकर अधिक भुगतान लेना।
- तारीखों की हेराफेरी: एक मामले में मरीज 4 दिसंबर को आया था, लेकिन 5 दिसंबर दिखाकर भुगतान लिया गया, जबकि उस दिन मरीज शहर में ही नहीं था।
- अनुपस्थिति में हस्ताक्षर: कई पर्चियों पर उन डॉक्टरों के नाम और सील मिले जो उस दिन अवकाश पर थे या उस अस्पताल में पदस्थापित ही नहीं थे।
कार्रवाई का रिपोर्ट कार्ड: अब तक क्या हुआ?
घोटाले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं:
| श्रेणी | की गई कार्रवाई |
| गिरफ्तारियां | डॉ. कमल कुमार अग्रवाल और डॉ. बनवारी लाल (बी. लाल लैब)। |
| निलंबन | 7 डॉक्टर और 64 अन्य कर्मचारी निलंबित। |
| FIR और कार्ड | 19 एफआईआर दर्ज; करीब 500 कार्ड ब्लॉक किए गए। |
| आर्थिक वसूली | अस्पतालों से ₹32 करोड़ और लाभार्थियों से ₹2 करोड़ वसूले गए। |
| प्रतिबंध | 33 अस्पतालों का टीएमएस ब्लॉक; 8 अस्पताल डी-एम्पेनल। |
बीकानेर और भरतपुर में भी जांच की आंच
जांच का दायरा केवल सीकर तक सीमित नहीं है। बीकानेर के बोथरा डायग्नोस्टिक सेंटर और भरतपुर के भरतपुर नर्सिंग होम के खिलाफ भी गंभीर अनियमितताओं के चलते एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। पीबीएम अस्पताल बीकानेर के डॉक्टरों ने तस्दीक की है कि कई पर्चियों पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे।
निष्कर्ष: यह घोटाला ऐसे समय में सामने आया है जब चिकित्सा क्षेत्र में RGHS के ₹2200 करोड़ के बकाया भुगतान को लेकर पहले ही असंतोष है। SOG के संकेतों के अनुसार, आने वाले दिनों में कई और बड़े नाम इस घोटाले की चपेट में आ सकते हैं।
