Air Pollution Impact on Solar Energy: प्रदूषण से भारत की सौर ऊर्जा क्रांति को बड़ा झटका, 9.6% घटा उत्पादन

Air Pollution Impact on Solar Energy: प्रदूषण से भारत की सौर ऊर्जा क्रांति को बड़ा झटका, 9.6% घटा उत्पादन

Air Pollution Impact on Solar Energy: उत्तर भारत का प्रदूषण सौर ऊर्जा क्रांति पर डाल रहा असर, धुंध और धूल से घट रहा बिजली उत्पादन

भारत में वायु प्रदूषण के कारण 2023 में सौर ऊर्जा उत्पादन में 9.6% की कमी का अनुमान, किसानों से लेकर फैक्ट्री संचालकों तक की बढ़ सकती है आर्थिक परेशानी

नई दिल्ली। भारत में सौर ऊर्जा को भविष्य की सबसे बड़ी स्वच्छ ऊर्जा उम्मीदों में गिना जा रहा है। सरकार से लेकर आम लोगों और उद्योगों तक, हर स्तर पर सोलर पैनल लगाने को बढ़ावा दिया जा रहा है। लेकिन उत्तर भारत में बढ़ता वायु प्रदूषण इस सौर ऊर्जा क्रांति के सामने एक ऐसी चुनौती बनकर उभर रहा है, जिस पर अपेक्षाकृत कम चर्चा होती है। सर्दियों में आसमान में छाने वाली धुंध, धूल और प्रदूषण के कण केवल लोगों की सेहत ही नहीं, बल्कि सूर्य की रोशनी से बिजली बनाने की क्षमता को भी प्रभावित कर रहे हैं।

Outlook Business की रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण भारत में सौर ऊर्जा उत्पादन को बड़ा नुकसान हो रहा है। इसका असर किसानों, फैक्ट्रियों और रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने वाले उपभोक्ताओं की आर्थिक गणना पर भी पड़ सकता है।

2023 में सौर ऊर्जा उत्पादन को 9.6% का नुकसान

मई 2026 में Nature Sustainability में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, वायु प्रदूषण के कारण भारत के सौर ऊर्जा उत्पादन में वर्ष 2023 के दौरान अनुमानित 9.6 प्रतिशत की कमी आई। यह नुकसान करीब 15 टेरावाट-घंटे (TWh) बिजली के बराबर बताया गया है।

इसकी तुलना में वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा उत्पादन में प्रदूषण के कारण औसतन 5.8 प्रतिशत की कमी का अनुमान है। यानी भारत में प्रदूषण का असर वैश्विक औसत से काफी अधिक रहा।

रिपोर्ट में IIT दिल्ली के 2022 के एक अध्ययन का भी उल्लेख है। इसके अनुसार, 2001 से 2018 के बीच उत्तर भारत के सोलर पैनलों तक पहुंचने वाली सूर्य की रोशनी में प्रदूषण के कारण औसतन करीब 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी।

आखिर कैसे प्रदूषण कम करता है सोलर पैनलों की क्षमता?

सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए सूर्य की पर्याप्त रोशनी जरूरी होती है। लेकिन हवा में मौजूद PM2.5, धूल, ब्लैक कार्बन और सल्फेट जैसे सूक्ष्म कण सूर्य की किरणों को पैनल तक पहुंचने से पहले ही अवशोषित या बिखेर देते हैं।

इसके अलावा, प्रदूषण के ये कण सोलर पैनलों की सतह पर भी जमा हो जाते हैं। इंजीनियरिंग की भाषा में इसे ‘एटेन्युएशन’ और ‘सोइलिंग’ कहा जाता है।

इसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ता है। सोलर पैनल को जितनी रोशनी मिलनी चाहिए, उतनी नहीं मिल पाती। उत्तर भारत में अक्टूबर से जनवरी के बीच पराली जलाने, वाहनों के धुएं और निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल के कारण यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

किसानों की सोलर सिंचाई योजना पर भी असर

सौर ऊर्जा का इस्तेमाल केवल घरों और फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों को सोलर पंप और सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई की सुविधा दी जा रही है।

लेकिन उत्तर भारत में रबी फसलों की सिंचाई का महत्वपूर्ण समय और प्रदूषण का मौसम अक्सर एक साथ पड़ते हैं। ऐसे में यदि सोलर पैनल से बिजली उत्पादन कम होता है तो किसानों के पंप कम समय तक चल सकते हैं या पानी देने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

इसका नतीजा यह हो सकता है कि किसानों को दोबारा डीजल पंप या दूसरे बिजली स्रोतों पर निर्भर होना पड़े। इससे सौर ऊर्जा अपनाने के पीछे मिलने वाली आर्थिक बचत भी कम हो सकती है।

फैक्ट्रियों और छोटे उद्योगों का बढ़ सकता है खर्च

लुधियाना, पानीपत और नोएडा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में कई कंपनियां बिजली खर्च कम करने के लिए रूफटॉप सोलर सिस्टम अपना रही हैं।

इन उद्योगों की आर्थिक योजना इस अनुमान पर आधारित होती है कि सोलर पैनल से नियमित मात्रा में बिजली मिलेगी। लेकिन प्रदूषण के कारण उत्पादन घटने पर उन्हें अतिरिक्त बिजली ग्रिड से खरीदनी पड़ सकती है।

इससे उद्योगों की लागत बढ़ सकती है और सोलर सिस्टम से मिलने वाला आर्थिक फायदा कम हो सकता है।

राजस्थान में भी धूल बन सकती है बड़ी चुनौती

रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धुंध और पराली जलाने से निकलने वाला धुआं सौर ऊर्जा उत्पादन को प्रभावित करता है। वहीं राजस्थान में धूल के कण सोलर पैनलों की सतह पर जमा होने के कारण बिजली उत्पादन घटा सकते हैं।

ऐसे में राजस्थान जैसे राज्य, जहां सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं, वहां नियमित पैनल सफाई और बेहतर रखरखाव महत्वपूर्ण हो जाता है।

सौर ऊर्जा बचाने के लिए क्या हैं उपाय?

विशेषज्ञों के अनुसार, सोलर प्रोजेक्ट लगाने से पहले स्थानीय प्रदूषण और धूल के स्तर को ध्यान में रखकर बिजली उत्पादन का अनुमान लगाना चाहिए। पैनलों की नियमित सफाई, पानी की बचत करने वाली सफाई तकनीक और आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम से नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

निष्कर्ष: भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल जरूर है, लेकिन स्वच्छ ऊर्जा का लक्ष्य हासिल करने के लिए स्वच्छ हवा भी उतनी ही जरूरी है। प्रदूषण केवल लोगों की सांसों और स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं कर रहा, बल्कि देश की हरित ऊर्जा अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी धीमी कर सकता है। सौर ऊर्जा को सफल बनाने के लिए पैनल लगाने के साथ-साथ हवा को साफ रखने पर भी उतना ही ध्यान देना होगा।

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