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Home - कानून व्यवस्था विभाग - फ्लैट नहीं दिया तो ब्याज सहित लौटानी होगी खून-पसीने की कमाई; राजस्थान रेरा ने जारी किया बिल्डर के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट

कानून व्यवस्था विभागजयपुर

फ्लैट नहीं दिया तो ब्याज सहित लौटानी होगी खून-पसीने की कमाई; राजस्थान रेरा ने जारी किया बिल्डर के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट

By The Public Hub
Last updated: May 22, 2026
5 Min Read

जयपुर। राजस्थान में फ्लैट बुक कराकर बरसों से अपने आशियाने का इंतजार कर रहे खरीदारों (आवंटियों) के पक्ष में राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (Rajasthan RERA) ने एक बेहद सख्त और बड़ा कदम उठाया है। तय समय सीमा के भीतर फ्लैट का कब्जा न देने और अदालती आदेश के बावजूद खरीदारों का पैसा न लौटाने पर रेरा ने सख्त रुख अख्तियार किया है।

Contents
2017 में मिलना था आशियाना, 2026 में भी इंतजाररेरा रजिस्ट्रार ने जारी किया ‘रिकवरी सर्टिफिकेट’जयपुर में फ्लैट के ताले तोड़कर दिलाया था कब्जा

अथॉरिटी के रजिस्ट्रार ने अब अलवर जिला कलेक्टर को एक आधिकारिक पत्र लिखकर डिफॉल्टर बिल्डर कंपनी ‘ग्रांड सफायर इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड’ की संपत्तियों और बैंक खातों को कुर्क (Seize) करने के निर्देश जारी किए हैं, ताकि पीड़ित आवंटियों को उनकी जमा राशि ब्याज सहित वापस दिलाई जा सके।

2017 में मिलना था आशियाना, 2026 में भी इंतजार

खून-पसीने की गाढ़ी कमाई फंसाकर बैठे थे 12 आवंटी

इस पूरे विवाद की शुरुआत मार्च 2014 में हुई थी, जब अपने सपनों का घर पाने की उम्मीद में 12 मध्यमवर्गीय आवंटियों ने बिल्डर कंपनी ‘ग्रांड सफायर इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड’ के प्रोजेक्ट में आवासीय फ्लैट बुक कराए थे। अनुबंध और शर्तों के मुताबिक, बिल्डर को इन फ्लैट्स का पूरा मालिकाना हक और कब्जा सितंबर 2017 तक हर हाल में आवंटियों को सुपुर्द करना था। लेकिन तय समय सीमा बीत जाने के कई साल बाद भी जब बिल्डर ने न तो फ्लैट दिए और न ही कोई संतोषजनक जवाब, तो ठगे गए आवंटियों ने रेरा (RERA) की शरण ली।

अधिवक्ता की दलील और रेरा के आदेश की अवहेलना

मामले में पीड़ित आवंटियों की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता अमित छंगाणी ने अथॉरिटी के सामने बकायदार कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ मोर्चा खोला। उन्होंने ‘राजस्थान भू राजस्व अधिनियम 1956’ और ‘रेरा एक्ट की धारा 40 (1)’ के सख्त प्रावधानों का हवाला देते हुए बिल्डर से पूरी रकम की वसूली कर आवंटियों को भुगतान कराने की अपील की।

इस पर सुनवाई करते हुए रेरा के न्याय निर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer) ने 12 अगस्त 2021 को ही बिल्डर को आदेश दिया था कि वह सभी आवंटियों की जमा राशि को तय ब्याज दर के साथ वापस लौटाए। हालांकि, बिल्डर ने इस आदेश को भी ठेंगे पर रख दिया और किसी को कोई भुगतान नहीं किया।

रेरा रजिस्ट्रार ने जारी किया ‘रिकवरी सर्टिफिकेट’

बिल्डर द्वारा लगातार की जा रही आदेशों की अवहेलना को देखते हुए रेरा ने कानूनी चाबुक चलाया है:

  • वसूली प्रमाण पत्र जारी: 12 मई 2022 को रजिस्ट्रार रेरा को इस मामले में ‘वसूली प्रमाण पत्र’ (Recovery Certificate) जारी करने के निर्देश दिए गए थे।
  • कलेक्टर को पत्र: इसी क्रम में रजिस्ट्रार ने 8 जून 2022 को अंतिम वसूली प्रमाण पत्र जारी कर सीधे अलवर जिला कलेक्टर को भेज दिया है। इसमें साफ कहा गया है कि कंपनी के बैंक खाते सीज किए जाएं और संपत्ति की नीलामी कर आवंटियों का पैसा चुकाया जाए।
  • प्रोग्रेस रिपोर्ट तलब: रेरा रजिस्ट्रार ने इस पूरी कुर्की और वसूली की कार्रवाई की लाइव प्रोग्रेस रिपोर्ट आगामी 15 जून तक अलवर कलेक्टर से मांगी है।

जयपुर में फ्लैट के ताले तोड़कर दिलाया था कब्जा

रियल्टी सेक्टर में रेरा की यह कड़ाई पहली बार नहीं देखी जा रही है। इससे पहले रेरा ने जयपुर के सोडाला स्थित जमना डेयरी के पास बने ‘यूनिक बिल्डर’ के प्रोजेक्ट ‘अनन्या’ पर भी ऐसी ही ऐतिहासिक सर्जिकल स्ट्राइक की थी। इस योजना में साल 2015 में आवासीय फ्लैट बुक किए गए थे, लेकिन 7 साल बाद भी सात आवंटियों को कब्जा नहीं मिल पाया था। तब रेरा की टीम ने खुद मौके पर जाकर पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में फ्लैटों के ताले तोड़े थे और आवंटियों को सीधे उनके घरों का कब्जा दिलाया था। रेरा के इतिहास में ताले तोड़कर कब्जा दिलाने की वह पहली और सबसे बड़ी नजीर थी।

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