जयपुर। बॉक्स एफ.एम. (Box FM) के एक विशेष संवाद कार्यक्रम में राजधानी जयपुर (साउथ) के डीसीपी और राजस्थान कैडर के तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी राजर्षि राज वर्मा ने युवाओं, श्रोताओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों से सीधा और खुलकर संवाद किया। इस खास कार्यक्रम में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, यूपीएससी (UPSC) की तैयारी, बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड, सोशल मीडिया के प्रभाव, नशे की प्रवृत्ति और महिला सुरक्षा जैसे कई ज्वलंत विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।
प्रेरणादायक रही है डीसीपी की यात्रा
कार्यक्रम की शुरुआत बॉक्स एफ.एम. की ऊर्जावान शैली में हुई। आरजे मुकुल ने खाकी की सख्ती और संवेदनशीलता का जिक्र करते हुए डीसीपी साहब का परिचय कराया। श्रोताओं को बताया गया कि बिहार-झारखंड की जड़ों से निकले संस्कार, दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से अर्थशास्त्र की पढ़ाई और पहले ही प्रयास में सिविल सेवा (UPSC) पास करने की उनकी यात्रा आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। बॉक्स एफ.एम. के निदेशक मुकुल गोस्वामी और आकाशवाणी-दूरदर्शन के पूर्व निदेशक राकेश जैन ने डीसीपी का स्वागत करते हुए कहा कि पुलिस और युवाओं के बीच इस तरह के संवाद से समाज में भरोसे की मजबूत कड़ी बनती है।
अपराध रोकथाम में समाज की भागीदारी जरूरी
कार्यक्रम के दौरान श्रोताओं ने बड़ी संख्या में सवाल पूछे। श्रोता गौरव मेहता द्वारा सड़क पर मारपीट और बढ़ते अपराधों पर पूछे गए सवाल के जवाब में डीसीपी राजर्षि राज वर्मा ने कहा कि अपराध से निपटने के लिए केवल पुलिसिया कार्रवाई पर्याप्त नहीं है; इसके लिए तकनीक का उपयोग और समाज की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। वहीं, सूरज किशन शर्मा द्वारा माफिया तंत्र से निपटने को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने अपने जोधपुर कार्यकाल का अनुभव साझा करते हुए कहा कि माफियाओं से लड़ाई एक दिन की नहीं होती। मजबूत सूचना तंत्र, तकनीक और जनता के साथ से ही किसी भी अवैध तंत्र की जड़ें खोखली की जा सकती हैं।
यूपीएससी अभ्यर्थियों को दिए सफलता के मंत्र
कार्यक्रम का एक बड़ा हिस्सा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के नाम रहा। तीसरे प्रयास को लेकर मार्गदर्शन मांगने वाली कृति गौतम के सवाल पर डीसीपी ने कहा, “असफल प्रयास कभी बेकार नहीं जाते। यूपीएससी केवल जानकारी की नहीं, बल्कि धैर्य, निरंतरता और व्यक्तित्व की परीक्षा है।” अखबार पढ़ने के सही तरीके पर उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विद्यार्थी को “क्या हुआ” से ज्यादा “क्यों हुआ और इसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा” यह समझना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोचिंग केवल रास्ता दिखा सकती है, लेकिन सफलता स्वाध्याय, अनुशासन, सीमित अध्ययन सामग्री के बार-बार दोहराव और नियमित उत्तर लेखन अभ्यास से ही मिलती है।
उन्होंने यह भी कहा कि “किस्मत केवल उन्हीं का साथ देती है, जो अपनी तैयारी पूरी रखते हैं। हार मान लेना सबसे बड़ी असफलता है।”
साइबर सुरक्षा: सतर्कता ही बचाव है
सुरभि खीची द्वारा साइबर अपराधों पर पूछे गए सवाल के जवाब में डीसीपी साहब ने डिजिटल दुनिया में सतर्कता को ही सबसे बड़ी सुरक्षा बताया। उन्होंने युवाओं को अनजान लिंक पर क्लिक न करने, ओटीपी साझा न करने, सोशल मीडिया पासवर्ड मजबूत रखने और टू-स्टेप वेरिफिकेशन (दो-स्तरीय सुरक्षा) का उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि साइबर ठगी होने पर शर्म या डर के कारण चुप न रहें, बल्कि तुरंत पुलिस से शिकायत करें।
नशा और शॉर्टकट: युवाओं के लिए बर्बादी का रास्ता
कॉलेज युवाओं में बढ़ते नशे के चलन पर गंभीर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि नशा केवल कानून का विषय नहीं है, बल्कि यह परिवार और शिक्षा व्यवस्था की संयुक्त चिंता है। गलत संगति जीवन की दिशा बदल सकती है, इसलिए मित्र चुनते समय भी करियर चुनने जितनी ही सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने युवाओं को सोशल मीडिया की झूठी चमक (Illusion) से बचने और त्वरित सफलता (शॉर्टकट) की चाह में अपराध के रास्ते पर न जाने की नसीहत दी।
महिला सुरक्षा और खाकी का संतोष
महिला सुरक्षा के मुद्दे पर डीसीपी ने कहा कि पुलिस की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह है कि बेटियां खुद को सुरक्षित महसूस करें, लेकिन यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। अपनी नौकरी के सर्वश्रेष्ठ पक्ष के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “जब कोई पीड़ित व्यक्ति पुलिस के पास भरोसे से आता है और उसे न्याय मिलता है, तो वह सुकून इस सेवा का सबसे बड़ा पुरस्कार होता है।”
श्रोताओं ने बताया ’12th Fail’ जैसी प्रेरक कहानी
कार्यक्रम के प्रति श्रोताओं की प्रतिक्रिया बेहद सकारात्मक और उत्साहजनक रही। कई श्रोताओं ने डीसीपी की जीवन यात्रा को चर्चित फिल्म ’12th Fail’ के संघर्ष और संकल्प जैसी कहानी बताया। अंत में बॉक्स एफ.एम. की टीम ने श्री राजर्षि राज वर्मा का आभार व्यक्त किया। यह कार्यक्रम रेडियो के माध्यम से समाज, प्रशासन और युवाओं के बीच एक जीवंत और सशक्त संवाद का बेहतरीन उदाहरण बना।