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जयपुरवित्त विभाग

साइबर ठगी की जांच में फंसे निर्दोष लोगों के लिए वरदान बना GRM सिस्टम; तीन स्तरों पर तय हुई अधिकारियों की जवाबदेही

By The Public Hub
Last updated: May 19, 2026
5 Min Read

जयपुर। डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए की जाने वाली कानूनी कार्रवाई कई बार आम और निर्दोष नागरिकों के लिए बड़ी मुसीबत बन जाती है। साइबर ठगी की जांच के दौरान संदिग्ध ट्रांजैक्शन की कड़ियों को ट्रैक करते समय पुलिस अक्सर कई बैंक खातों को होल्ड या फ्रीज कर देती है, जिससे उन असली खाताधारकों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है जिनका अपराध से कोई लेना-देना नहीं होता।

Contents
क्या है GRM मॉड्यूल और कैसे करता है काम?खाता अनफ्रीज कराने का स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेसपारदर्शिता के लिए तीन स्तरों पर तय हुई जवाबदेहीराजस्थान पुलिस की नागरिकों से जरूरी सतर्कता अपील

इसी गंभीर समस्या को दूर करने के लिए राजस्थान पुलिस ने अब एक बेहद पारदर्शी और पूरी तरह ऑनलाइन समाधान पेश किया है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा विकसित GRM (Grievance Redressal Mechanism) मॉड्यूल अब उन खाताधारकों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरा है, जिनके बैंक खाते साइबर जांच के दायरे में आने के कारण फ्रीज, लियन (Lien) या होल्ड कर दिए जाते हैं।

क्या है GRM मॉड्यूल और कैसे करता है काम?

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) श्री वीके सिंह ने बताया कि राज्य में साइबर अपराधियों पर कड़े प्रहार के साथ-साथ आम जनता को प्रशासनिक जटिलताओं से बचाना भी पुलिस की प्राथमिकता है।

यह नव-विकसित GRM मॉड्यूल एक आधुनिक ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली है। यह सीधे नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड Management सिस्टम (CFCFRMS) के अंतर्गत इंटीग्रेटेड होकर कार्य करता है। इसका मुख्य उद्देश्य किसी फ्रॉड राशि के ट्रांसफर होने की कड़ियों (Transaction Trail) में गलती से फ्रीज हुए वास्तविक और निर्दोष खाताधारकों को त्वरित राहत उपलब्ध कराना है।

खाता अनफ्रीज कराने का स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

यदि किसी नागरिक का बैंक खाता अचानक होल्ड या फ्रीज हो जाता है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है। पुलिस द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार यह प्रक्रिया बेहद आसान है:

[स्टेप 1: अपनी बैंक शाखा में जाकर KYC और ट्रांजैक्शन का सत्यापन कराएं]
                          ↓
[स्टेप 2: बैंक अधिकारी GRM पोर्टल पर Grievance ID जनरेट करेगा]
                          ↓
[स्टेप 3: मामला सीधे संबंधित थाना पुलिस जांच अधिकारी के पास ऑनलाइन ट्रांसफर होगा]
                          ↓
[स्टेप 4: पुलिस अधिकारी ट्रांजैक्शन और फ्रॉड में आपकी संलिप्तता की जांच करेगा]
                          ↓
[स्टेप 5: (आवश्यकता होने पर) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) से आपका पक्ष सुना जाएगा]
                          ↓
[स्टेप 6: निर्दोष पाए जाने पर पुलिस सीधे बैंक को खाता अनफ्रीज करने का डिजिटल आदेश देगी]

अपील का अधिकार: यदि किसी कारणवश या तकनीकी वजह से थाना स्तर पर आपकी शिकायत को खारिज कर दिया जाता है, तो कानूनन खाताधारक के पास जिला और राज्य स्तर के ग्रीवेंस रिड्रेसल ऑफिसर (GRO) के समक्ष इस फैसले के खिलाफ अपील दायर करने का भी पूरा अधिकार सुरक्षित रहेगा।

पारदर्शिता के लिए तीन स्तरों पर तय हुई जवाबदेही

इस व्यवस्था में किसी भी स्तर पर देरी या लापरवाही को रोकने के लिए पुलिस और बैंकिंग दोनों सेक्टरों में अधिकारियों की त्रिकोणीय जवाबदेही (Three-tier Accountability) तय की गई है:

प्रशासनिक स्तरपुलिस विभाग के जिम्मेदार अधिकारीबैंकिंग सेक्टर के जिम्मेदार अधिकारी
1. राज्य स्तर (State Level)पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) साइबर क्राइमनेशनल नोडल ऑफिसर / स्टेट ग्रीवेंस ऑफिसर
2. जिला स्तर (District Level)अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (Addl SP) / डीएसपीरीजनल नोडल ऑफिसर / एरिया मैनेजर
3. थाना स्तर (Thana Level)संबंधित मुकदमे का जांच अधिकारी (IO)संबंधित बैंक शाखा प्रबंधक (Branch Grievance Officer)

राजस्थान पुलिस की नागरिकों से जरूरी सतर्कता अपील

एडीजी वीके सिंह ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे कभी भी लालच या किसी के झांसे में आकर अपना बैंक खाता किराए पर न दें, न ही किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी (OTP), सीवीवी (CVV) या नेट बैंकिंग पासवर्ड साझा करें। साइबर फ्रॉड का शिकार होने या किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन वित्तीय गतिविधि की स्थिति में नागरिक बिना समय गंवाए निम्नलिखित माध्यमों पर तुरंत सूचना दर्ज करवा सकते हैं:

  • तत्काल कॉल करें: राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर
  • राजस्थान पुलिस हेल्पडेस्क नंबर: 9256001930 / 9257510100
  • आधिकारिक सरकारी पोर्टल: [संदिग्ध लिंक हटा दिया गया] पर लॉगिन करें।
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