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जयपुरपरिवहन विभाग

ई-वाहन खरीदारों का टूटा भरोसा: सब्सिडी के इंतजार में बीते चार साल, अब अन्य लोगों को खरीदने से रोक रहे उपभोक्ता

By The Public Hub
Last updated: May 15, 2026
4 Min Read

जयपुर: एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैश्विक मंचों से लेकर घरेलू रैलियों तक भारत को पेट्रोल-डीजल की निर्भरता से मुक्त करने और ‘ग्रीन मोबिलिटी’ (Green Mobility) अपनाने की पुरजोर अपील कर रहे हैं, वहीं राजस्थान में सरकारी सुस्ती इस मिशन को पलीता लगा रही है। राजस्थान की महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी (REVP-2022) फाइलों के जाल में ऐसी उलझी है कि हजारों ई-वाहन खरीदार 2022 से आज 2026 तक अपनी वाजिब सब्सिडी की राह देख रहे हैं।

Contents
क्या थी राजस्थान इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी (REVP-2022)?धरातल पर बढ़ती नाराजगी: ठगा हुआ महसूस कर रहे उपभोक्ताबाजार पर असर: बिक्री में गिरावट की आशंकाविभाग का पक्ष: तकनीकी खामियों का हवाला

क्या थी राजस्थान इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी (REVP-2022)?

पूर्ववर्ती सरकार ने सितंबर 2022 में इस नीति को पांच साल (2027 तक) के लिए लागू किया था। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में प्रदूषण कम करना और इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को प्रोत्साहन देना था। नीति के तहत सब्सिडी का ढांचा कुछ इस प्रकार तय किया गया था:

वाहन श्रेणीसब्सिडी राशि (अनुमानित)अन्य लाभ
दोपहिया (2-Wheeler)₹5,000 से ₹10,000 तक (बैटरी क्षमता अनुसार)SGST रीइम्बर्समेंट
ई-रिक्शा / अन्य₹10,000 से ₹20,000 तकSGST रीइम्बर्समेंट

सरकार ने इस प्रोत्साहन राशि के लिए करीब 40 करोड़ रुपये का बजट भी मंजूर किया था, लेकिन हकीकत यह है कि बजट होने के बावजूद भुगतान की प्रक्रिया ठप पड़ी है।

धरातल पर बढ़ती नाराजगी: ठगा हुआ महसूस कर रहे उपभोक्ता

हजारों उपभोक्ताओं ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से राहत पाने और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर भारी निवेश कर ई-स्कूटर और ई-रिक्शा खरीदे थे। लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी सब्सिडी खाते में नहीं पहुंची है। ई-वाहन मालिकों का कहना है कि सरकार की घोषणा पर भरोसा करना उनकी भूल साबित हो रही है।

“हमने सब्सिडी के भरोसे ई-स्कूटर खरीदा था, लेकिन अब न तो सब्सिडी मिली और न ही सर्विस में कोई मदद। अब हम दूसरों को भी ई-वाहन न खरीदने की सलाह दे रहे हैं।” — एक पीड़ित ई-वाहन मालिक

बाजार पर असर: बिक्री में गिरावट की आशंका

ऑटोमोबाइल डीलरों का कहना है कि सब्सिडी में इस असामान्य देरी का सीधा असर अब नई बिक्री पर पड़ रहा है। पुराने ग्राहकों की शिकायतें सुनकर नए खरीदार पीछे हट रहे हैं। इससे राज्य का वह मिशन कमजोर पड़ रहा है जिसे प्रधानमंत्री मोदी देश के भविष्य के लिए अनिवार्य बता रहे हैं।

विभाग का पक्ष: तकनीकी खामियों का हवाला

जब इस देरी को लेकर परिवहन विभाग के उच्चाधिकारियों से सवाल किया गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह “तकनीकी खामी” का राग अलापा। अधिकारियों का कहना है कि पोर्टल और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया में कुछ अड़चनें हैं, जिन्हें दूर करने में अभी और समय लगेगा। सवाल यह है कि जब 2022 से बजट स्वीकृत है और आवेदन जमा हो चुके हैं, तो 2026 तक भी इन ‘खामियों’ को क्यों नहीं सुलझाया जा सका?

अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि क्या प्रधानमंत्री की हालिया अपीलों के बाद राजस्थान का प्रशासनिक अमला जागेगा या फिर राजस्थान की ई-व्हीकल पॉलिसी सिर्फ चुनावी घोषणाओं का एक कागजी पुलिंदा बनकर रह जाएगी।

TAGGED:Consumer GrievancesE-Rickshaw Subsidy RajasthanElectric Vehicle Market RajasthanElectric Vehicle Subsidy DelayGreen Mobility MissionPM Modi EV AppealRajasthan EV Policy 2026Rajasthan Government BudgetREVP 2022 RajasthanTransport Department News
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