Tuesday, May 19, 2026

Weekly Newspaper

The Public Hub
Login
  • Home
  • राजस्थान
  • विभाग
  • जुर्म
  • धर्म
  • भारत
Reading: हवा में ‘वेटरनरी यूनिट’, करोड़ों का बिल: बिना डॉक्टर गांवों में पहुंच रही मोबाइल वैन, पशु चिकित्सा योजना में बड़ा खेल
Share
E-Paper
Font ResizerAa
The Public HubThe Public Hub
  • E-Paper
  • राजस्थान
  • जुर्म
  • कानून
  • योजना
  • धर्म
  • भारत
  • शिक्षा विभाग
Search
  • Home
  • E-Paper
  • Privacy Policy
  • About us
  • Terms and Conditions
  • Contact
Follow US
Made by ThemeRuby using the Foxiz theme. Powered by WordPress
जयपुरस्वास्थ्य

हवा में ‘वेटरनरी यूनिट’, करोड़ों का बिल: बिना डॉक्टर गांवों में पहुंच रही मोबाइल वैन, पशु चिकित्सा योजना में बड़ा खेल

By The Public Hub
Last updated: May 19, 2026
5 Min Read

जयपुर। ग्रामीण अंचलों में मूक मवेशियों के त्वरित और मुफ्त इलाज के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी ‘मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई’ (Mobile Veterinary Unit – MVU) योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पूरे प्रदेश में संचालित हो रही 536 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के नाम पर हर महीने करीब 9.48 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट ठिकाने लगाया जा रहा है, लेकिन धरातल पर पशुपालकों को इसका कोई वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है।

Contents
1.77 लाख रुपये प्रति माह में ‘दवा और डॉक्टर’ दोनों लापताग्राउंड जीरो की हकीकत: ‘1962’ सुविधा खुद ही बीमारविधानसभा में उठ चुका है मुद्दा, जांच के नाम पर सिर्फ लीपापोती

सच्चाई यह है कि जिला स्तरीय अधिकारियों की कथित मिलीभगत से बिना किसी ठोस सबूत (जैसे जियो टैगिंग या डॉक्टर की उपस्थिति) के हर महीने फर्जी बिल बनाकर विभाग को पेश किए जा रहे हैं और सरकार की तिजोरी को चूना लगाया जा रहा है।

1.77 लाख रुपये प्रति माह में ‘दवा और डॉक्टर’ दोनों लापता

न फोटो, न वीडियो, न ही जियो टैगिंग

नियमों के मुताबिक, अनुबंधित फर्म द्वारा जिस भी बीमार पशु का उपचार किया जाता है, उसकी लाइव फोटो, वीडियो और सबसे महत्वपूर्ण जियो टैगिंग (Geo-Tagging) होना अनिवार्य है ताकि वैन की सही लोकेशन का पता चल सके। लेकिन हकीकत यह है कि किसी भी वैन के पास इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे में यह साबित करना नामुमकिन है कि वैन वास्तव में मौके पर गई भी थी या नहीं।

नागौर जिले की बात करें तो यहाँ कुल 13 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां संचालित हैं। प्रत्येक वैन के बदले सरकार द्वारा प्रति माह 1.77 लाख रुपये का भुगतान अनुबंधित फर्म को किया जाता है। इस राशि में एक क्वालिफाइड डॉक्टर, एक वैन चालक, आवश्यक दवाइयां और वाहन का ईंधन शामिल है। नियम यह भी है कि यदि किसी दिन डॉक्टर या चालक अनुपस्थित रहता है, तो उस दिन का भुगतान काटा जाना चाहिए, लेकिन यहाँ कागजों में सभी 13 वैनों में चिकित्सकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति दिखाई जा रही है।

ग्राउंड जीरो की हकीकत: ‘1962’ सुविधा खुद ही बीमार

पशुपालकों से बात करने पर इस योजना की जो कड़वी सच्चाई सामने आई है, वह बेहद चौंकाने वाली है:

गांव और पशुपालकशिकायत और जमीनी हकीकत
1. खजवाना (पशुपालक सुरेश जाखड़)दोपहर 1:50 बजे भैंस के इलाज के लिए हेल्पलाइन नंबर 1962 पर कॉल किया। वैन शाम 5 बजे पहुंची, लेकिन गाड़ी में कोई पशु चिकित्सक नहीं था। तीन युवक आए, जिन्होंने खुद को वेटरनरी छात्र बताया और बिना पूरी जानकारी के एक खुली हुई टैबलेट (दवा) देकर चले गए।
2. गांव इंदास (पशुपालक प्रकाश पूनिया)दोपहर सवा 3 बजे हेल्पलाइन पर कॉल किया। महिला कर्मचारी ने जानकारी ली और इंतजार करने को कहा। बाद में एक युवक ने फोन कर दोबारा पशु के बारे में जानकारी मांगी और अंत में कह दिया—“आज गाड़ी नहीं आ सकती, आप मंगलवार को फोन करना।”
3. गांव बू-नरावताइस गांव में तो हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के बावजूद वैन पहुंची ही नहीं और पशुपालक निजी डॉक्टरों को मोटी रकम देने पर मजबूर हुए।

विधानसभा में उठ चुका है मुद्दा, जांच के नाम पर सिर्फ लीपापोती

इस योजना की वास्तविकता और लग रहे गंभीर आरोपों को लेकर पूर्व में विधानसभा में भी विधायकों द्वारा सवाल पूछे जा चुके हैं। तारांकित सवाल के माध्यम से सदन में इस पर जवाब मांगा गया था, लेकिन विभाग के पास अब तक इसका कोई स्पष्ट और संतोषजनक उत्तर नहीं है।

संयुक्त निदेशक का बयान:

पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. महेश मीणा ने बताया कि अनुबंधित फर्म को हर हाल में डॉक्टर और दवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होती है। अनुपस्थिति मिलने पर फर्म के भुगतान में कटौती का प्रावधान है। सोमवार को औचक मिलान के निर्देश दिए गए हैं।

पशुपालकों का आरोप है कि अनुबंधित फर्म बिना पूरा इलाज किए केवल अपनी गाड़ियों का किलोमीटर बढ़ाने और फर्जी आंकड़े जुटाने में लगी है, ताकि हर महीने करोड़ों रुपये का भुगतान उठाया जा स

TAGGED:1962 Veterinary Helpline IssueContractor Fraud Veterinary VansFake Medical Billing RajasthanMobile Veterinary Unit InvestigationNagaur Animal Husbandry NewsRajasthan Pashupalan DepartmentRural Livestock Medical Crisis.
Share This Article
Facebook Copy Link Print
Leave a Comment Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

HOT NEWS

डिजिटल मार्किंग का कमाल: सीबीएसई 12वीं के परिणाम जारी, SMS और डिजीलॉकर से ऐसे डाउनलोड करें मार्कशीट

NEET 2026: 135 सवालों के मिलान ने उड़ाए होश, आईबी के इनपुट पर एसओजी ने की नीट धांधली की स्ट्राइक

साइबर ठगी की जांच में फंसे निर्दोष लोगों के लिए वरदान बना GRM सिस्टम; तीन स्तरों पर तय हुई अधिकारियों की जवाबदेही

घोटाले की जड़ें गहरी: मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे मास्टरमाइंड के रिश्तेदारों पर भी CBI का शिकंजा, रडार पर कई छात्र

कैलामाता के भक्तों के लिए खुशखबरी: ₹20 करोड़ की लागत से चमकेगी करौली-कैलादेवी सड़क, PWD ने भेजा प्रस्ताव

YOU MAY ALSO LIKE

Rajasthan Semiconductor Policy 2026: सीएम भजनलाल का बड़ा फैसला, वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनेगा राजस्थान

तकनीकी प्रगति और आर्थिक समृद्धि के पथ पर अग्रसर राजस्थान ने आज एक नया इतिहास रच दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल…

जयपुर
March 25, 2026

जयपुर में सफर हुआ महंगा: NHAI ने बढ़ाई टोल दरें, 1 अप्रैल से देना होगा ज्यादा टोल टैक्स

जयपुर के चारों ओर स्थित नेशनल हाईवे और रिंग रोड पर सफर करने वाले भारी वाहन चालकों के लिए बुरी…

जयपुरपरिवहन विभाग
March 28, 2026

6.25 लाख छात्र-छात्राओं के बीच कड़ा मुकाबला: 17 मार्च को होगा प्रथम चरण का सीट आवंटन, पहली बार 11 ट्रांसजेंडर बच्चों ने भी किया आवेदन

जयपुर: राजस्थान शिक्षा विभाग द्वारा गुरुवार को शिक्षा संकुल में आरटीई (RTE) के तहत निजी स्कूलों में नि:शुल्क प्रवेश के…

जयपुर
March 13, 2026

मनरेगा मजदूरों के भुगतान में देरी पर किरोड़ी लाल मीणा का जवाब- ‘केंद्र को लिखी चिट्ठी, जल्द होगा बकाया चुकता’

जयपुर: राजस्थान विधानसभा में सोमवार को कार्यवाही के दौरान शिक्षा, खेल और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर तीखी बहस…

जयपुरराजस्थान
March 9, 2026

The Public Hub is Jaipur’s premier weekly newspaper dedicated to high-impact investigative journalism. Focused on Rajasthan’s socio-political landscape, we deliver research-based deep dives and hard-hitting facts that go beyond the headlines. Registered under RNI: RJBIL/26.A0142, we are committed to accountability and the pursuit of truth.

  • Home
  • Privacy Policy
  • About us
  • Terms and Conditions
  • E-Paper
  • राजस्थान
  • जुर्म
  • कानून
  • योजना
  • धर्म
  • भारत
  • शिक्षा विभाग
  • Home
  • राजस्थान
  • विभाग
  • जुर्म
  • धर्म
  • भारत

Follow US: 

-

All Rights Reserved
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?