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जयपुरशिक्षा विभाग

SI भर्ती-2021 पर हाईकोर्ट का ‘हंटर’: “प्रवेश पत्र पर फोटो ही साफ नहीं, तो डमी अभ्यर्थी कैसे रुकते?

By The Public Hub
Last updated: April 6, 2026
3 Min Read

राजस्थान में सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती-2021 को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संगीता शर्मा की खंडपीठ ने वर्ष 2021 की परीक्षा प्रक्रिया में रही गंभीर खामियों को उजागर करते हुए इसे ‘शुचिता पर आंच’ करार दिया है। कोर्ट की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब प्रदेश में नई एसआई भर्ती-2025 की परीक्षाएं आयोजित हो रही हैं, जो सिस्टम के लिए एक बड़े सबक के रूप में देखी जा रही हैं।

Contents
प्रबंधन की विफलता: “जब फोटो ही साफ नहीं, तो पहचान कैसी?”कालेर और जगदीश गैंग का ‘सोशल नेटवर्क’नकल विरोधी कानून: 2021 बनाम वर्तमान (2026)SOG की विरोधाभासी रिपोर्ट और कोर्ट का निष्कर्ष

प्रबंधन की विफलता: “जब फोटो ही साफ नहीं, तो पहचान कैसी?”

हाईकोर्ट ने आरपीएससी (RPSC) द्वारा जारी प्रवेश पत्रों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब एडमिट कार्ड पर अभ्यर्थियों की तस्वीरें ही स्पष्ट नहीं थीं, तो ‘डमी कैंडिडेट’ को रोकना असंभव था।

  • सुरक्षा नदारद: कोर्ट ने नोट किया कि केंद्रों पर न तो बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन था और न ही जैमर लगाए गए थे।
  • वीडियोग्राफी का अभाव: प्रभावी वीडियोग्राफी की कमी के कारण एसओजी (SOG) को जांच के लिए पर्याप्त रिकॉर्ड तक नहीं मिल सके। इंटरनेट बंद न करना भी इस संगठित अपराध को बढ़ावा देने का बड़ा कारण बना।

कालेर और जगदीश गैंग का ‘सोशल नेटवर्क’

एसओजी की जांच का हवाला देते हुए अदालत ने बताया कि किस तरह संगठित गिरोहों ने परीक्षा को दूषित किया:

  1. बीकानेर कनेक्शन: मैट्रिक्स कोचिंग इंस्टीट्यूट के राजाराम ने प्रश्न पत्र की तस्वीरें खींचकर ‘कालेर गैंग’ को भेजीं।
  2. जयपुर कनेक्शन: रवींद्र बाल भारती स्कूल से लीक हुआ पेपर ‘जगदीश गैंग’ तक पहुंचा।
  3. अनियंत्रित प्रसार: सोशल मीडिया के जरिए पेपर इस कदर सर्कुलेट हुआ कि अब यह पता लगाना नामुमकिन है कि इसका लाभ कितने अनगिनत उम्मीदवारों तक पहुंचा। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि दागी और बेदाग उम्मीदवारों को अलग करना अब संभव नहीं है।

नकल विरोधी कानून: 2021 बनाम वर्तमान (2026)

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कानून के कड़े होते स्वरूप को भी रेखांकित किया है, जो अपराधियों के लिए अब ‘काल’ बन चुका है:

विशेषतावर्ष 2021 की स्थितिवर्तमान कानून (2023-26)
अधिकतम सजामात्र 3 वर्ष की जेलआजीवन कारावास (उम्रकैद)
जुर्मानासामान्य जुर्माना10 लाख से 10 करोड़ रुपये
संपत्ति कुर्कीकोई प्रावधान नहीं थाअपराध से अर्जित संपत्ति की कुर्की/अधिग्रहण
जांच अधिकारीकोई भी रैंकन्यूनतम एडिशनल एसपी (Add. SP)

SOG की विरोधाभासी रिपोर्ट और कोर्ट का निष्कर्ष

हाईकोर्ट ने एसओजी की दो अलग-अलग रिपोर्टों पर भी टिप्पणी की। पहली रिपोर्ट में जांच एजेंसी ने कहा था कि दागी अभ्यर्थियों को अलग करना मुश्किल है, जबकि दूसरी रिपोर्ट में इसकी संभावना जताई। हालांकि, कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि एक बार पेपर सोशल मीडिया पर आ गया, तो उसकी पहुंच की सीमा तय करना असंभव है।

TAGGED:Kaler Gang Jagdish Gang SI ExamRajasthan High Court SI 2021 DecisionRPSC Admit Card ControversySOG Paper Leak Report
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