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राजस्थान

रेप पीड़िता को मुआवजे के लिए आय प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट का कड़ा रुख

By The Public Hub
Last updated: February 21, 2026
3 Min Read

जयपुर राजस्थान उच्च न्यायालय ने पीड़ित न्याय प्रणाली में एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करते हुए स्पष्ट किया है कि तकनीकी दस्तावेजों और कागजी औपचारिकताओं के आधार पर किसी बलात्कार पीड़िता को मुआवजे के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढंड की एकल पीठ ने ‘विक्टिम बनाम राजस्थान राज्य (2025)’ मामले की सुनवाई करते हुए एक निचली POCSO अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें एक 15 वर्षीय पीड़िता को मुआवजे के लिए अयोग्य ठहराया गया था।

निचली अदालत का विवादित फैसला मामले के अनुसार, एक नाबालिग रेप सर्वाइवर ने पुनर्वास और सहायता के लिए मुआवजे का आवेदन किया था। हालांकि, संबंधित POCSO कोर्ट ने इस आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि पीड़िता ‘आय प्रमाण पत्र’ (Income Proof) और ‘स्कूल फीस’ से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रही है। कोर्ट का तर्क था कि इन दस्तावेजों के बिना आर्थिक नुकसान का आकलन नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट का रुख: न्याय सर्वोपरि इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस ढंड ने कड़ी टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने कहा कि “मुआवजा योजनाओं का मूल उद्देश्य सर्वाइवर्स की गरिमा को बहाल करना, उनका पुनर्वास करना और उन्हें न्याय दिलाना है। इन योजनाओं को प्रक्रियात्मक बाधाओं (Procedural Barriers) में नहीं उलझाया जाना चाहिए।”

कोर्ट ने आगे कहा कि एक 15 वर्षीय पीड़िता से आय के प्रमाण की मांग करना न केवल अतार्किक है, बल्कि यह पीड़ित मुआवजा कानूनों की मूल भावना को भी विफल करता है।

छह सप्ताह में निर्णय का निर्देश उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश को ‘कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण’ मानते हुए उसे ‘क्वैश’ (Quash) कर दिया है। अदालत ने संबंधित POCSO कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह अगले छह सप्ताह के भीतर इस मामले पर नए सिरे से विचार करे और यह सुनिश्चित करे कि पीड़िता के अधिकारों की रक्षा हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य की जिम्मेदारी है कि वह पीड़ित को कागजी कार्यवाही में उलझाने के बजाय उसे आवश्यक सहायता प्रदान करे।

TAGGED:Justice Anoop Kumar DhandLegal News HindiPOCSO ActRajasthan High CourtVictim CompensationVictim v State of Rajasthan.Women Rights Rajasthan
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