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Home - राजस्थान - जैसलमेर में गूंजी EWS आरक्षण सुधार की मांग: क्या खत्म होंगी जमीन और मकान की जटिल शर्तें?

राजस्थान

जैसलमेर में गूंजी EWS आरक्षण सुधार की मांग: क्या खत्म होंगी जमीन और मकान की जटिल शर्तें?

By The Public Hub
Last updated: April 30, 2026
3 Min Read

राजस्थान के जैसलमेर में EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आरक्षण के नियमों में बदलाव की मांग तेज हो गई है। ईडब्ल्यूएस जन जागृति मंच के नेतृत्व में आयोजित जनआंदोलन में यह बात सामने आई कि वर्तमान पात्रता मानदंड कई जरूरतमंदों को लाभ से वंचित रख रहे हैं।

Contents
जमीन और मकान की शर्तें बनीं रुकावटकेंद्र और राज्य की नीतियों में असंगतिसमावेशी और लचीले मॉडल की मांग

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए लागू 10 प्रतिशत आरक्षण में सुधार की मांग को लेकर जैसलमेर में बड़ा जनआंदोलन देखने को मिला। ईडब्ल्यूएस जन जागृति मंच के बैनर तले जुटे युवाओं, किसानों और प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से मौजूदा पात्रता मानदंडों में संशोधन की पुरजोर मांग की है।

जमीन और मकान की शर्तें बनीं रुकावट

पूर्व मंत्री धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 2019 में लागू यह आरक्षण ऐतिहासिक था, लेकिन इसकी कुछ शर्तें व्यावहारिक नहीं हैं:

  • 5 एकड़ कृषि भूमि की सीमा: बढ़ती लागत और कम उत्पादन के कारण किसान वर्ग की आय सीमित है, फिर भी भूमि की इस सीमा के कारण वे पात्रता से बाहर हो रहे हैं।
  • आवास संबंधी शर्तें: संयुक्त परिवारों में रहने वाले युवा आरक्षण की पात्रता पाने के लिए अपने परिवार से अलग रहने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे सामाजिक और पारिवारिक ढांचा प्रभावित हो रहा है。

केंद्र और राज्य की नीतियों में असंगति

आंदोलन के दौरान नीतियों में एकरूपता की कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा:

  • कई समुदाय राजस्थान में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में शामिल हैं, लेकिन केंद्र में वे सामान्य श्रेणी में आते हैं।
  • केंद्र में सामान्य श्रेणी में होने के कारण उन्हें EWS का लाभ मिलना चाहिए, लेकिन वहां की कड़ी शर्तों की वजह से वे इस लाभ से भी वंचित रह जाते हैं।

समावेशी और लचीले मॉडल की मांग

मंच ने मांग की है कि राजस्थान में पूर्व में अपनाए गए लचीले मॉडल की तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यावहारिक नीति लागू की जाए। इसमें मुख्य रूप से भूमि और आवास संबंधी शर्तों को समाप्त करने और पात्रता मानदंडों को अधिक समावेशी बनाने पर जोर दिया गया है।

सर्व समाज की भागीदारी: कार्यक्रम में जैसलमेर के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में युवाओं और किसानों ने हिस्सा लिया। छात्रसंघ अध्यक्ष जसवंतसिंह तेजमालता के स्वागत संबोधन से शुरू हुए इस कार्यक्रम में मुरलीधर खत्री, कमल किशोर ओझा और अंजना मेघवाल सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।


संपादकीय टिप्पणी: “आरक्षण का उद्देश्य अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को लाभ पहुँचाना है। यदि नियम ही बाधा बन जाएं, तो पुनर्विचार आवश्यक हो जाता है। जैसलमेर से उठी यह आवाज नीति-निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है।”

TAGGED:Dharmendra Singh RathoreEWS Eligibility CriteriaEWS ReservationFarmer WelfareJaisalmer ProtestRajasthan NewsReservation ReformSocial Justice
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