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शिक्षा विभागजयपुर

महंगी किताबों से मिलेगा छुटकारा! मानवाधिकार आयोग ने स्कूल बैग पॉलिसी और NCERT नियम पर दिखाई सख्ती

By The Public Hub
Last updated: April 24, 2026
3 Min Read

देशभर के निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर थोपी जा रही महंगी किताबों और भारी-भरकम स्कूल बैग के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन हैं और अब सभी स्कूलों में NCERT की किताबें अनिवार्य रूप से लागू की जानी चाहिए।

Contents
10 गुना ज्यादा दाम पर बिक रही हैं किताबेंमानवाधिकार आयोग के कड़े निर्देश:अभिभावकों को बड़ी राहत

10 गुना ज्यादा दाम पर बिक रही हैं किताबें

आयोग ने ‘नमो फाउंडेशन’ द्वारा दायर एक शिकायत पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। शिकायत में कहा गया था कि निजी प्रकाशक एनसीईआरटी (NCERT) की तुलना में 500% से 1000% अधिक कीमत पर किताबें बेच रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, जहाँ NCERT की एक किताब ₹60-70 में उपलब्ध है, वहीं निजी प्रकाशक उसी विषय की किताब ₹600 से ₹800 के बीच बेच रहे हैं।

मानवाधिकार आयोग के कड़े निर्देश:

प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने शिक्षा मंत्रालय, CBSE और सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी कर निम्नलिखित कड़े निर्देश दिए हैं:

  • स्कूल-वार ऑडिट: सभी राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र के प्रत्येक स्कूल की बुकलिस्ट का ऑडिट करें और देखें कि वहां कौन सी किताबें पढ़ाई जा रही हैं।
  • 30 दिन की समय सीमा: आयोग ने प्रशासन को 30 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) सौंपने को कहा है।
  • शैक्षणिक भेदभाव का अंत: आयोग ने कहा कि सरकारी और निजी स्कूलों के बीच पाठ्यक्रम में अंतर “शैक्षणिक भेदभाव” है, जो बच्चों के मौलिक अधिकारों के खिलाफ है।
  • स्कूल बैग पॉलिसी: ‘नेशनल स्कूल बैग पॉलिसी 2020’ के तहत बस्ते का वजन बच्चे के वजन के 10% से अधिक नहीं होना चाहिए। आयोग ने इसे कड़ाई से लागू करने का आदेश दिया है।

अभिभावकों को बड़ी राहत

आयोग के इस हस्तक्षेप के बाद, राज्यों ने जिला शिक्षा अधिकारियों (BSAs/DIOS) को स्कूलों का निरीक्षण करने के निर्देश भेजने शुरू कर दिए हैं। यदि कोई स्कूल एनसीईआरटी के बजाय निजी प्रकाशकों की किताबें लेने के लिए मजबूर करता है, तो उसके खिलाफ शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) की धारा 29 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

“शिक्षा व्यापार नहीं है। एनसीईआरटी की किताबें गुणवत्तापूर्ण और सस्ती हैं। निजी स्कूलों द्वारा कमीशन के लालच में अभिभावकों पर निजी प्रकाशकों की किताबें थोपना बंद होना चाहिए।” > — मानवाधिकार आयोग की खंडपीठ की टिप्पणी

TAGGED:Cheap TextbooksEducation NewsHuman Rights Commission NoticeNCERT BooksNHRC IndiaPrivate School FeesPriyank KanoongoRight to Education ActSchool Audit IndiaSchool Bag Policy 2020
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