भोपाल। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच ने राजस्थान सरकार द्वारा फरवरी 2025 में जारी की गई ‘भूजल नियमन गाइडलाइंस’ (Guidelines for Ground Water Regulation) को केंद्र सरकार के नियमों के विपरीत मानते हुए रद्द कर दिया है.
मुख्य बिंदु और अदालती कार्यवाही:
- केंद्र बनाम राज्य नियम: ट्रिब्यूनल ने पाया कि राजस्थान सरकार द्वारा 5 फरवरी 2025 को जारी अधिसूचना केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) के कड़े नियमों को कमजोर कर रही थी. अपीलकर्ता ताहिर हुसैन ने दलील दी थी कि राज्य सरकार ने “सरकारी पेयजल योजनाओं” को छूट देकर नियमों को शिथिल किया, जो कि 2020 की केंद्रीय गाइडलाइंस का उल्लंघन है.
- अवैध दोहन पर चिंता: एनजीटी ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय के 29 साल पुराने निर्देशों के बावजूद देश में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है. राजस्थान जैसे राज्यों में, जहां भूजल की अत्यधिक कमी है, नियमों में ढील देना खतरनाक है.
- सरकार का यू-टर्न: सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से पेश हलफनामे में स्वीकार किया गया कि केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की आपत्तियों के बाद विवादित अधिसूचनाओं (05.02.2025/10.02.2025) को वापस ले लिया गया है.
- NGT का आदेश: न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत केंद्रीय नियम राज्य के कानूनों पर प्रभावी रहेंगे. ट्रिब्यूनल ने मुख्य सचिव को एक महीने के भीतर बैठक कर अवैध ट्यूबवेलों पर अंकुश लगाने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने के निर्देश दिए हैं.
