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राजस्थान

Maha Shivratri 2026: उदयपुर से डूंगरपुर तक, ये हैं राजस्थान के 5 चमत्कारी शिव मंदिर जहाँ उमड़ेगी आस्था

By The Public Hub
Last updated: February 14, 2026
5 Min Read

महाशिवरात्रि का पावन पर्व भगवान शिव के भक्तों के लिए साल का सबसे बड़ा त्योहार होता है। राजस्थान की वीर भूमि, भक्ति और आध्यात्म का भी एक बड़ा केंद्र है। इस वर्ष महाशिवरात्रि (Maha Shivratri 2026) के अवसर पर राज्य के प्राचीन शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलेगी।

Contents
1. एकलिंगजी मंदिर, उदयपुर (Eklingji Temple, Udaipur)2. अचलेश्वर महादेव मंदिर, माउंट आबू (Achaleshwar Mahadev Temple, Mount Abu)3. परशुराम महादेव मंदिर, पाली (Parshuram Mahadev Temple, Pali)4. घुश्मेश्वर महादेव मंदिर, सवाई माधोपुर (Ghushmeshwar Mahadev Temple, Sawai Madhopur)5. बेणेश्वर शिव मंदिर, डूंगरपुर (Beneshwar Shiva Temple, Dungarpur)

राजस्थान में ऐसे कई ऐतिहासिक शिव मंदिर हैं जो सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारतें नहीं हैं, बल्कि अपनी अनूठी वास्तुकला, गहरे रहस्यों और पौराणिक मान्यताओं के कारण देश भर में विशेष पहचान रखते हैं।

अगर आप भी इस महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ के अद्भुत दर्शन करना चाहते हैं, तो हम आपको बता रहे हैं राजस्थान के उन 5 चमत्कारी शिव धामों के बारे में, जहाँ आस्था का सैलाब उमड़ता है।


1. एकलिंगजी मंदिर, उदयपुर (Eklingji Temple, Udaipur)

उदयपुर से कुछ ही दूरी पर स्थित एकलिंगजी का मंदिर मेवाड़ की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। यह मंदिर मेवाड़ राजघराने के आराध्य देवता को समर्पित है।

  • क्या है खास: यहां भगवान शिव एक अद्भुत चार मुखों वाले शिवलिंग (चतुर्मुखी शिवलिंग) के रूप में विराजमान हैं। यह मंदिर अपनी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है।
  • मान्यता: ऐसी मान्यता है कि मेवाड़ के महाराणा स्वयं को एकलिंगजी का दीवान मानकर ही शासन करते थे। यहां सच्चे मन से दर्शन करने वालों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
  • महाशिवरात्रि पर: इस पर्व पर यहां विशेष श्रृंगार किया जाता है और पूरी रात भजन-कीर्तन व रात्रि जागरण का आयोजन होता है, जो देखते ही बनता है।

2. अचलेश्वर महादेव मंदिर, माउंट आबू (Achaleshwar Mahadev Temple, Mount Abu)

राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू की अरावली पहाड़ियों में स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर अपनी रहस्यमयी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है।

  • क्या है खास: यह दुनिया का शायद एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां शिवलिंग की नहीं, बल्कि भगवान शिव के ‘अंगूठे’ की पूजा की जाती है। यहां के शिवलिंग के नीचे एक प्राकृतिक गड्ढा है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह पाताल तक जाता है।
  • मान्यता: पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब अरावली पर्वत डगमगाने लगा था, तब भगवान शिव ने अपने अंगूठे से इसे स्थिर किया था। इसी अंगूठे के निशान की यहां पूजा होती है।

3. परशुराम महादेव मंदिर, पाली (Parshuram Mahadev Temple, Pali)

पाली जिले में अरावली की दुर्गम पहाड़ियों के बीच स्थित परशुराम महादेव मंदिर को ‘राजस्थान का अमरनाथ’ भी कहा जाता है।

  • क्या है खास: यह मंदिर एक प्राकृतिक गुफा के अंदर स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सैकड़ों सीढ़ियां चढ़कर एक कठिन रास्ता तय करना पड़ता है, जो अमरनाथ यात्रा जैसा अनुभव कराता है।
  • मान्यता: कहा जाता है कि भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम ने यहां शिवजी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें अपना फरसा (परशु) प्रदान किया था।

4. घुश्मेश्वर महादेव मंदिर, सवाई माधोपुर (Ghushmeshwar Mahadev Temple, Sawai Madhopur)

सवाई माधोपुर जिले के शिवाड़ गांव में स्थित घुश्मेश्वर महादेव मंदिर एक अत्यंत प्राचीन शिव धाम है। इन्हें ‘घृष्णेश्वर’ और ‘घुसृणेश्वर’ के नाम से भी जाना जाता है।

  • क्या है खास: यह मंदिर अपनी प्राचीनता और भव्य मेलों के लिए जाना जाता है। महाशिवरात्रि पर यहां लाखों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं।
  • मान्यता: यह मंदिर अपनी एक विशेष पौराणिक कथा के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां जो भी भक्त सच्चे मन से पूजा-अर्चना करता है, उसे विशेष फल की प्राप्ति होती है और शिवजी उसके सारे कष्ट हर लेते हैं।

5. बेणेश्वर शिव मंदिर, डूंगरपुर (Beneshwar Shiva Temple, Dungarpur)

राजस्थान के डूंगरपुर जिले में स्थित बेणेश्वर धाम आदिवासियों की आस्था का सबसे बड़ा महाकुंभ है।

  • क्या है खास: यह मंदिर तीन नदियों—माही, सोम और जाखम—के पवित्र त्रिवेणी संगम पर स्थित है। यहां का मुख्य आकर्षण स्वयं-भू शिवलिंग है, जो स्वयं प्रकट हुए माने जाते हैं।
  • मान्यता: इसे ‘आदिवासियों का हरिद्वार’ भी कहा जाता है। यहां हर साल माघ पूर्णिमा पर विशाल मेला लगता है। महाशिवरात्रि के मौके पर दूर-दूर से श्रद्धालु यहां त्रिवेणी संगम में स्नान कर शिवलिंग का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।
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