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बूंदी

धनेश्वर में करोड़ों का काला खेल: आबादी ज़मीन निगल रही ‘बूंदी सिलिका’, ग्रामीणों का जबरन विस्थापन

By Admin
Last updated: March 29, 2026
6 Min Read
Highlights
  • लीज क्षेत्र से 3 किमी दूर कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) की ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा; मुकंदरा टाइगर रिजर्व के इको-सेंसिटिव ज़ोन में धड़ल्ले से चल रही मशीनें
  • ग्राम पंचायत, खनिज और राजस्व विभाग के अफसरों की मिलीभगत के गंभीर आरोप; NGT के नियमों की खुलेआम धज्जियां, ब्लास्टिंग से घरों में दरारें

बूंदी/धनेश्वर: नेशनल हाईवे-27 पर स्थित धनेश्वर क्षेत्र में सफेद पत्थर (सैंड स्टोन) के खनन के नाम पर करोड़ों रुपये के काले कारोबार का बड़ा खुलासा हुआ है। यहाँ नियमों को ताक पर रखकर, निर्धारित लीज क्षेत्र से 3 किलोमीटर दूर, कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) के रिकॉर्ड में दर्ज ‘आबादी भूमि’ पर अवैध खनन का साम्राज्य चल रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि यह पूरी गतिविधि मुकंदरा टाइगर रिजर्व (MTR) की सीमा से मात्र 900 मीटर की दूरी पर हो रही है, जिससे वन्यजीवों और पर्यावरण पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से प्रशासनिक मिलीभगत के आरोप पुख्ता हो रहे हैं।

Contents
लीज कहीं और, खुदाई कहीं और: प्रशासनिक मिलीभगत का चरमग्राम पंचायत का ‘फर्जीवाड़ा’: आबादी ज़मीन को बताया ‘बंजर’बिना मुआवजे विस्थापन, नेशनल हाईवे के किनारे ‘कच्चा’ पुनर्वासमुकंदरा टाइगर रिजर्व पर खतरा और NGT नियमों की धज्जियां‘द पब्लिक हब’ के सवाल

लीज कहीं और, खुदाई कहीं और: प्रशासनिक मिलीभगत का चरम

जानकारी के अनुसार, ‘बूंदी सिलिका कंपनी’ को लीज एग्रीमेंट संख्या 47/1994 के तहत 130.34 हेक्टेयर भूमि पर खनन की अनुमति है, जो 31 मार्च 2040 तक वैध दर्शाई गई है। लेकिन जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है। कंपनी अपनी आवंटित लीज साइट को छोड़कर 3 किलोमीटर दूर धनेश्वर गाँव की आबादी भूमि में अवैध रूप से सैंड स्टोन निकाल रही है। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, खसरा संख्या 162 और 267 की यह भूमि कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) के नाम दर्ज है, जहाँ पिछले 40 वर्षों से ग्राम पंचायत धनेश्वर के वार्ड 9, 10 और 11 के लोग निवास कर रहे हैं। आबादी ज़मीन में खनन की अनुमति किसने और कैसे दी, यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न है।

ग्राम पंचायत का ‘फर्जीवाड़ा’: आबादी ज़मीन को बताया ‘बंजर’

इस पूरे खेल में ग्राम पंचायत धनेश्वर की भूमिका सबसे संदिग्ध मानी जा रही है। आरोप है कि पंचायत ने खनन कंपनी को फायदा पहुँचाने के लिए सिस्टम के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा किया। 13 जून 2025 को सरपंच सत्यनारायण मेघवाल और सचिव मनोहर सिंह द्वारा तहसीलदार तालेड़ा को दी गई अनापत्ति (NOC) विरोधाभासों से भरी है। एक ओर जहाँ इस पत्र में भूमि को ‘आबादी’ नहीं बताया गया, वहीं दूसरी ओर उसी ज़मीन को ‘आबादी विस्तार’ के लिए प्रस्तावित भी कर दिया गया। इस दोहरे चरित्र ने पंचायत प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिना मुआवजे विस्थापन, नेशनल हाईवे के किनारे ‘कच्चा’ पुनर्वास

खनन माफिया की दहशत और प्रशासन की चुप्पी का खामियाजा गरीब ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। सैंड स्टोन के भारी भंडार को हड़पने के लिए कंपनी ने आबादी क्षेत्र में रह रहे ग्रामीणों को बलपूर्वक हटा दिया। उन्हें नेशनल हाईवे-27 के किनारे पक्के मकान और दुकानों में बसाने का लालच दिया गया, लेकिन हकीकत में किसी भी ग्रामीण को विस्थापन के बदले वैधानिक आवासीय पट्टा नहीं दिया गया। न ही नियमानुसार कोई मुआवजा प्रदान किया गया। यह विस्थापन और पुनर्वास पूरी तरह से अवैध और मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया जा रहा है।

मुकंदरा टाइगर रिजर्व पर खतरा और NGT नियमों की धज्जियां

धनेश्वर का यह अवैध खनन क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। मुकंदरा टाइगर रिजर्व की सीमा यहाँ से मात्र 900 मीटर दूर है। ऐसे में लगातार हो रही हैवी ब्लास्टिंग और मशीनों के शोर से वन्यजीवों का जीवन खतरे में है। इसके अलावा, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। नियमों के मुताबिक सड़क या सार्वजनिक स्थान से 50 मीटर और आबादी से 250 फीट की दूरी अनिवार्य है। लेकिन धनेश्वर में नेशनल हाईवे से मात्र 20 मीटर की दूरी पर खनन हो रहा है। ब्लास्टिंग के कंपन से हाईवे और पास के मकानों में दरारें आ गई हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

‘द पब्लिक हब’ के सवाल

करोड़ों के इस अवैध खनन ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिनका जवाब देने से प्रशासन कतरा रहा है:

  1. आबादी भूमि में खनन की अनुमति देने के पीछे कौन है?
  2. ग्राम पंचायत को ग्रामीणों के विस्थापन का अधिकार कैसे मिला?
  3. NGT और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर खनिज विभाग चुप क्यों है?
  4. शिकायतों के बावजूद जिला प्रशासन मौन क्यों है?

स्थानीय निवासी शंभू दयाल सुवालका का दर्द छलक पड़ा, उन्होंने कहा, “हम लंबे समय से यहाँ रह रहे हैं, लेकिन अब खान में ब्लास्टिंग से मकानों में दरारें आ गई हैं। हमें डर के माहौल में जीना पड़ रहा है। कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।”

वहीँ, जब ‘द पब्लिक हब’ ने खनिज विभाग के अभियंता प्रशांत बेडवाल से बात की, तो उन्होंने खनन को वैध बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र KDA में नहीं आता है, जो राजस्व रिकॉर्ड के विपरीत है। खान संचालक बूंदी सिलिका कंपनी के जयवर्धन बंसल ने दावा किया कि उनका एग्रीमेंट पुराना है और सभी दस्तावेज पोर्टल पर उपलब्ध हैं।

फिलहाल, धनेश्वर में ग्रामीण भारी रोष में हैं। उनका कहना है कि अगर तत्काल निष्पक्ष जांच नहीं हुई और अवैध खनन बंद नहीं कराया गया, तो वे उग्र जन आंदोलन के लिए विवश होंगे।

TAGGED:Bundi NewsDhaneshwar VillageEnvironmental ThreatIllegal Mining ScamKota Development AuthorityMukundra Tiger ReserveNGT Rules ViolationRajasthan NewsSand Stone MiningThe Public Hub
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