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Home - कानून - ‘जनता की सुनवाई न करना गंभीर लापरवाही’— एसपी को दिए 2 दिन के भीतर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश

कानूनश्रीगंगानगर

‘जनता की सुनवाई न करना गंभीर लापरवाही’— एसपी को दिए 2 दिन के भीतर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश

By The Public Hub
Last updated: June 4, 2026
5 Min Read

श्रीगंगानगर। राजस्थान में पीड़ित नागरिकों की थानों में सुनवाई न करने और एफआईआर (FIR) दर्ज करने में टालमटोल करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सूरतगढ़ की एसीजेएम (ACJM) कोर्ट ने एक बेहद सख्त और नजीर बनने वाला आदेश जारी किया है. न्यायालय ने एक मामले में नियमानुसार एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने को कर्तव्य निर्वहन में गंभीर लापरवाही और विफलता माना है. इसके लिए अदालत ने सूरतगढ़ सिटी थाना प्रभारी (एसएचओ) सहित तीन पुलिस अधिकारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए उन पर कुल 1.20 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना ठोक दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने इन दागी अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से फील्ड ड्यूटी से हटाने के भी प्रशासनिक आदेश जारी किए हैं.

Contents
यह है पूरा मामला: जब पीड़ित को खटखटाना पड़ा कोर्ट का दरवाजाएसएचओ, एसआई और एएसआई पर लगा 40-40 हजार का व्यक्तिगत जुर्मानानिष्पक्षता के लिए ‘फील्ड ड्यूटी’ से हटाने और एसपी को 2 दिन का अल्टीमेटम

यह है पूरा मामला: जब पीड़ित को खटखटाना पड़ा कोर्ट का दरवाजा

यह पूरा मामला एक पीड़ित शिकायतकर्ता के परिवाद पर पुलिस द्वारा कानून के मुताबिक मामला दर्ज न करने से जुड़ा हुआ है. पीड़ित व्यक्ति जब अपनी न्यायसंगत शिकायत लेकर थाने पहुंचा, तो वहां तैनात अधिकारियों ने उसकी रिपोर्ट दर्ज करने से साफ मना कर दिया. पुलिस के इस ढुलमुल और असंवेदनशील रवैये से परेशान होकर आखिरकार शिकायतकर्ता को न्याय के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ी.

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीजेएम कोर्ट सूरतगढ़ में इस पर विस्तृत सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान न्यायालय ने उपलब्ध रिकॉर्ड, पुलिस की केस डायरी और प्रस्तुत किए गए तमाम तथ्यों का बड़ी बारीकी से अवलोकन किया. इसके बाद अदालत ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए माना कि संबंधित पुलिस अधिकारियों द्वारा अपने कानूनी कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरती गई है, जो कतई स्वीकार्य नहीं है.

एसएचओ, एसआई और एएसआई पर लगा 40-40 हजार का व्यक्तिगत जुर्माना

न्यायालय ने इस लापरवाही के लिए किसी एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरी जांच शृंखला को दोषी माना. एसीजेएम कोर्ट ने अपने आदेश में सूरतगढ़ सिटी थाना प्रभारी (एसएचओ) दिनेश सारण, उपनिरीक्षक (एसआई) नगेंद्र सिंह और सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) सुभाषचंद्र को इस कृत्य के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है.

अदालत ने इन तीनों अधिकारियों पर 40-40 हजार रुपये का व्यक्तिगत (Personal) जुर्माना लगाया है. इस प्रकार कुल मिलाकर 1 लाख 20 हजार रुपये की जुर्माना राशि निर्धारित की गई है, जिसे अदालत ने संबंधित अधिकारियों को आगामी 15 दिनों के भीतर हर हाल में राजकीय कोष में जमा कराने के सख्त निर्देश दिए हैं.

निष्पक्षता के लिए ‘फील्ड ड्यूटी’ से हटाने और एसपी को 2 दिन का अल्टीमेटम

माननीय न्यायालय ने दोषी पुलिसकर्मियों पर केवल आर्थिक दंड ही नहीं लगाया, बल्कि उनके खिलाफ कड़ी प्रशासनिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई का खाका भी तैयार किया है. कोर्ट ने अपने लिखित आदेश में कहा है कि जिन अधिकारियों के खिलाफ यह दंडात्मक कार्रवाई की गई है, उन्हें तुरंत प्रभाव से सक्रिय फील्ड ड्यूटी से हटाया जाए. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत ने यह कड़ा निर्देश इसलिए दिया है ताकि मामले की आगामी जांच में पूरी निष्पक्षता बनी रहे और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके.

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने सीधे श्रीगंगानगर पुलिस अधीक्षक (एसपी) और सूरतगढ़ पुलिस उपाधीक्षक (डीवाईएसपी) को भी स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी किए हैं. न्यायालय ने दोनों आला अधिकारियों को पाबंद किया है कि वे इस संबंधित मामले में दो दिन के भीतर अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज करवाएं और कानून के अनुसार आगे की निष्पक्ष अनुसंधान प्रक्रिया सुनिश्चित करें.

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट रेखांकित किया कि किसी भी नागरिक की शिकायत पर समय रहते उचित और त्वरित कानूनी कार्रवाई करना पुलिस की सबसे पहली विधिक जिम्मेदारी है. सूरतगढ़ एसीजेएम कोर्ट के इस ऐतिहासिक और कड़े आदेश के बाद पूरे राजस्थान पुलिस महकमे में चर्चाएं तेज हो गई हैं. अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला पुलिस कप्तान के निर्देशानुसार मामले में एफआईआर कब दर्ज होती है और इन तीनों लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ विभागीय स्तर पर आगे क्या अनुशासनात्मक एक्शन लिया जाता है.

TAGGED:Court Penalty on PoliceExpose NowFIR Registration OrderPolice Negligence RajasthanSHO Dinesh Saran FinedSri Ganganagar NewsSri Ganganagar SP ActionSuratgarh ACJM Court Decision
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