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स्वास्थ्य

साइलेंट किलर तनाव: युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है हाई ब्लड प्रेशर

By The Public Hub
Last updated: May 18, 2026
6 Min Read

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव (Stress) इतना आम हो चुका है कि लोग इसे अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या का एक सामान्य हिस्सा मानने लगे हैं। लेकिन यह सामान्य दिखने वाला मानसिक तनाव अंदर ही अंदर शरीर को खोखला कर रहा है। कभी हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) को बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब डॉक्टर 20-30 साल के युवाओं, ऑफिस कर्मचारियों, छात्रों और पारिवारिक जिम्मेदारियों में उलझे माता-पिता में भी इसे तेजी से बढ़ते हुए देख रहे हैं। बाहर से पूरी तरह फिट और सेहतमंद दिखने वाले लोग भी अंदर ही अंदर लगातार तनाव का गंभीर असर झेल रहे हैं, और इसका सबसे सीधा और घातक प्रभाव हमारे दिल (Heart) पर पड़ रहा है।

Contents
तनाव के दौरान शरीर में होने वाली जैविक प्रतिक्रियाऑफिस की कुर्सी पर बैठे-बैठे भी शरीर महसूस करता है ‘खतरा’नींद और मेलाटोनिन हार्मोन पर दोहरा प्रहारखराब जीवनशैली और बदलती आदतें बढ़ा रहीं खतरा

वैश्विक चिकित्सा अध्ययनों के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता है, इसलिए इसे ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, तनाव के दौरान हमारा शरीर ‘फाइट और फ्लाइट’ (Fight or Flight) मोड में चला जाता है, जिससे हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर दोनों अचानक बढ़ जाते हैं।

तनाव के दौरान शरीर में होने वाली जैविक प्रतिक्रिया

चरणशरीर में बदलावहृदय और धमनियों पर असर
1. मानसिक तनावदिमाग को खतरे का सिग्नल मिलता है।शरीर ‘फाइट या फ्लाइट’ मोड में एक्टिव हो जाता है।
2. हार्मोन का स्रावएडल्ट साइकाइट्रिस्ट डॉ. मौर्यदीप घटक के अनुसार, शरीर कोर्टिसोल हार्मोन रिलीज करता है।दिल की धड़कन (Heart Rate) तेजी से बढ़ने लगती है।
3. धमनियों का सिकुड़नारक्त वाहिकाएं (Blood Vessels) संकुचित होने लगती हैं।रक्त का प्रवाह प्रभावित होने से ब्लड प्रेशर (BP) तुरंत बढ़ जाता है।

ऑफिस की कुर्सी पर बैठे-बैठे भी शरीर महसूस करता है ‘खतरा’

कंसलटेंट साइकाइट्रिस्ट डॉ. मौर्यदीप घटक बताते हैं कि:

“हमारा शरीर मानसिक और शारीरिक तनाव में फर्क नहीं कर पाता। इसका मतलब यह है कि कोई व्यक्ति भले ही ऑफिस की वातानुकूलित कुर्सी पर आराम से बैठा हो, लेकिन यदि वह मानसिक रूप से किसी प्रोजेक्ट, डेडलाइन या आर्थिक दबाव को लेकर तनाव में है, तो उसका शरीर ठीक उसी तरह प्रतिक्रिया देगा जैसे वह किसी वास्तविक शारीरिक खतरे या जंगली जानवर से बचने के लिए भाग रहा हो।”

समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब यह तनाव कुछ मिनटों या घंटों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ‘क्रोनिक’ (लगातार बना रहने वाला) रूप ले लेता है। देर रात तक काम करना, स्मार्टफोन के लगातार आते नोटिफिकेशन, ट्रैफिक जाम, आर्थिक परेशानियां और निजी जिंदगी के उतार-चढ़ाव हमारे दिमाग को चौबीसों घंटे ‘हाई अलर्ट मोड’ पर रखते हैं। अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा शोधों के अनुसार, लंबे समय तक रहने वाला यह मानसिक तनाव धीरे-धीरे स्थायी (Permanent) हाई ब्लड प्रेशर का कारण बन जाता है।

नींद और मेलाटोनिन हार्मोन पर दोहरा प्रहार

तनाव का सबसे बड़ा और पहला शिकार हमारी नींद होती है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि नींद के दौरान हमारा दिल और रक्त वाहिकाएं दिनभर की थकान और टूट-फूट से खुद को रिकवर (Repair) करती हैं। सामान्य परिस्थितियों में सोते समय मनुष्य का ब्लड प्रेशर कम हो जाता है, जिससे दिल को पर्याप्त आराम मिलता है।

लेकिन लगातार बने रहने वाले तनाव के कारण यह प्राकृतिक रिकवरी प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो जाती है। इसके अलावा, तनाव दूर करने के बहाने देर रात तक मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप का इस्तेमाल करने से आंखों पर पड़ने वाली नीली रोशनी दिमाग में मेलाटोनिन हार्मोन (नींद लाने वाला हार्मोन) के उत्पादन को कम कर देती है। नतीजा यह होता है कि इंसान रातभर करवटें बदलता रहता है और सुबह उठने पर भी उसका शरीर थका हुआ महसूस करता है।

खराब जीवनशैली और बदलती आदतें बढ़ा रहीं खतरा

हाई ब्लड प्रेशर के बायोलॉजिकल कारणों के साथ-साथ तनाव इंसान की आदतों को भी बेहद नुकसानदेह तरीके से बदल देता है। तनावग्रस्त लोग अक्सर:

  • नियमित एक्सरसाइज और योग छोड़ देते हैं।
  • मानसिक संतुष्टि के लिए ‘जंक फूड’ और अत्यधिक ऑयली खाना खाने लगते हैं।
  • खुद को शांत करने के भ्रम में धूम्रपान (Smoking) और शराब (Alcohol) का सहारा लेने लगते हैं।

ये सभी आदतें मिलकर हाई ब्लड प्रेशर और कार्डियक अरेस्ट (हार्ट अटैक) के खतरे को कई गुना बढ़ा देती हैं। डॉक्टरों का मानना है कि अब तनाव को सिर्फ एक मानसिक या मूड से जुड़ी समस्या मानकर नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है। यह सीधे हमारी हार्ट हेल्थ से जुड़ा एक बड़ा खतरा है। नियमित व्यायाम, कम से कम 7-8 घंटे की गहरी नींद, सोने से एक घंटे पहले स्क्रीन टाइम पूरी तरह बंद करना और वर्क-लाइफ बैलेंस (काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन) बनाकर ही इस अदृश्य खतरे से बचा जा सकता है।

TAGGED:Cortisol Hormone EffectHeart Health TipsHypertension in YouthLifestyle and High BPMental Stress HypertensionSilent Killer Hypertension.Sleep Deprivation EffectsStress and Blood Pressure
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