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स्वास्थ्य

अब ‘PMOS’ के नाम से जाना जाएगा महिलाओं का साइलेंट किलर; विशेषज्ञों ने कहा- सिस्ट से कहीं ज्यादा जटिल है यह बीमारी

By The Public Hub
Last updated: May 13, 2026
3 Min Read

दशकों से ‘पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम’ नाम के कारण यह धारणा बनी हुई थी कि इस बीमारी की अनिवार्य शर्त अंडाशय (Ovary) में सिस्ट का होना है। रिसर्चर्स और एंडोक्राइन सोसाइटी के विशेषज्ञों ने पाया कि इस स्थिति से पीड़ित कई महिलाओं के अल्ट्रासाउंड में वास्तव में सिस्ट दिखाई ही नहीं देते थे। इसके बावजूद, उन्हें मेटाबॉलिक और हार्मोनल समस्याएं रहती थीं। चूंकि पुराना नाम केवल ‘सिस्ट’ पर केंद्रित था, इसलिए कई महिलाएं और डॉक्टर तब तक इसे गंभीरता से नहीं लेते थे जब तक स्कैन में गांठे न दिखें। नया नाम ‘PMOS’ इस भ्रम को दूर कर स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट करता है।

नए नाम ‘PMOS’ का विस्तृत विश्लेषण

विशेषज्ञों ने इस सिंड्रोम की जटिलता को समझाने के लिए नया नाम चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित रखा है:

  • पॉलीएंडोक्राइन (Polyendocrine): यह दर्शाता है कि यह समस्या केवल ओवरी तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर के कई हार्मोन सिस्टम को प्रभावित करती है।
  • मेटाबोलिक (Metabolic): यह इंसुलिन रेजिस्टेंस, मोटापा, और डायबिटीज के बढ़ते जोखिमों को केंद्र में रखता है।
  • ओवेरियन (Ovarian): यह बताता है कि यह आज भी ओव्यूलेशन, पीरियड्स और फर्टिलिटी को प्रभावित करने वाली मुख्य वजह है।
  • सिंड्रोम (Syndrome): यह स्पष्ट करता है कि यह कोई अकेली बीमारी नहीं, बल्कि संबंधित लक्षणों और स्वास्थ्य जोखिमों का एक समूह है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

भारत में हर पांच में से एक महिला पीसीओएस (अब पीएमओएस) से प्रभावित है। विशेषज्ञों का मानना है कि नया नाम इस समस्या से जुड़े सामाजिक टैबू को कम करने में मदद करेगा। इसे केवल ‘प्रजनन संबंधी समस्या’ के बजाय एक ‘मेटाबॉलिक डिसऑर्डर’ के रूप में देखे जाने से महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य, दिल की बीमारियों और मधुमेह की समय पर पहचान हो सकेगी।

लक्षण और उपचार में क्या होगा बदलाव?

पीएमओएस के लक्षण वही पुराने रहेंगे, जिनमें अनियमित पीरियड्स, चेहरे पर अनचाहे बाल (Hirsutism), मुंहासे, अचानक वजन बढ़ना और फर्टिलिटी की समस्याएं शामिल हैं। नाम बदलने के बावजूद, प्राथमिक उपचार की पद्धति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। विशेषज्ञ अभी भी दवाओं से ज्यादा लाइफस्टाइल मैनेजमेंट पर जोर दे रहे हैं, जिसमें शामिल हैं:

  1. संतुलित आहार और नियमित व्यायाम।
  2. तनाव कम करना और बेहतर नींद लेना।
  3. जरूरत पड़ने पर हार्मोनल और इंसुलिन-सेंसिटिव थेरेपी।

विशेषज्ञों की अपेक्षा है कि इस नए नामकरण से दुनिया भर में स्वास्थ्य नीतियों और बीमा दावों में भी स्पष्टता आएगी, जिससे प्रभावित महिलाओं को बेहतर और सटीक चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।

TAGGED:Endocrine Society Update.Fertility and HormonesHormonal DisorderInsulin ResistanceMetabolic HealthPCOS renamed to PMOSPolyendocrine Metabolic Ovarian SyndromeThe Lancet Medical ReportWomen Health Update
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