नई दिल्ली | जी-20 के आधिकारिक सहभागिता समूह, महिला 20 (W20) इंडिया ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के कार्यान्वयन और परिसीमन ढांचे में हो रहे विलंब पर गहरी निराशा जाहिर की है । समूह का कहना है कि यद्यपि भारतीय संसद द्वारा यह ऐतिहासिक कानून वर्ष 2023 में ही पारित कर दिया गया था, लेकिन इसका संचालन अभी भी लंबित है । W20 इंडिया के अनुसार, यह देरी महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को आगे बढ़ाने और दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं को ठोस परिणामों में परिवर्तित करने का एक ‘चूका हुआ अवसर’ है ।
कथनी और करनी के बीच बढ़ता फासला
W20 इंडिया ने रेखांकित किया है कि भारत वैश्विक मंचों पर महिला नेतृत्व की वकालत करने में एक अग्रणी आवाज रहा है । हालांकि, इस कानून को लागू करने में हो रही देरी अंतरराष्ट्रीय वकालत और घरेलू स्तर पर हो रही प्रगति के बीच के अंतर को स्पष्ट करती है । समूह ने जोर देकर कहा कि वैश्विक नेतृत्व में विश्वसनीयता तभी मजबूत होती है जब किसी राष्ट्र के आंतरिक कार्य उसकी घोषित प्राथमिकताओं को दर्शाते हों ।
G20 प्रतिबद्धताओं का हवाला
भारत की G20 अध्यक्षता (2023) के दौरान ‘नई दिल्ली नेताओं की घोषणा’ में नेतृत्व के सभी स्तरों पर महिलाओं की पूर्ण, समान और सार्थक भागीदारी के महत्व की पुष्टि की गई थी । W20 इंडिया का मानना है कि इस कानून को लागू करने में देरी उन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के बिल्कुल विपरीत है ।
सतत विकास लक्ष्यों (SDG) पर संकट
समूह ने चेतावनी दी है कि यह देरी संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 5 (SDG 5) की प्रगति को धीमा कर रही है । इस लक्ष्य का मुख्य उद्देश्य महिलाओं की पूर्ण भागीदारी और नेतृत्व के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है । विधायी निकायों में महिलाओं का समान प्रतिनिधित्व न केवल निष्पक्षता का विषय है, बल्कि यह समावेशी शासन और सतत विकास की आधारशिला भी है ।
प्रतिनिधियों की सामूहिक मांग और भविष्य की रणनीति
हाल ही में आयोजित एक बैठक में, W20 इंडिया के सभी प्रमुख प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर इस मुद्दे पर आवाज उठाई है:
- डॉ. संध्या पुरेचा (प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख)
- डॉ. ज्योति किरण शुक्ला
- भारती घोष
- डॉ. शमिका रवि
- बांसुरी स्वराज
- धारित्री पटनायक
इन प्रतिनिधियों ने सभी हितधारकों से संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के सार्थक प्रतिनिधित्व की गारंटी देने वाले तंत्र को आगे बढ़ाने का आह्वान किया है । उन्होंने स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण एजेंडे को सफल बनाने के लिए ‘राजनीतिक इच्छाशक्ति’ और ‘रचनात्मक आम सहमति’ अनिवार्य है ।
ज्योति किरण शुक्ला एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री हैं। वह राजस्थान के पांचवें राज्य वित्त आयोग की अध्यक्ष बनने वाली पहली महिला हैं। इसके अलावा वह पेट्रोनेट एनबीसीसी (NBCC) और एचएससीसी (HSCC) के निदेशक मंडल में सेवा दे चुकी हैं और ब्राज़ील में भारतीय संस्कृति निदेशक के पद पर भी रह चुकी हैं

“महिला आरक्षण और परिसीमन बिल अपने आप में भारत की अंतर्राष्ट्रीय कमिटमेंट का एक जीता जागता अफर्मेटिव स्वरूप है। इसलिए इसे अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण से भारत की विमेन लेड डेवलपमेंट की कमिटमेंट के तौर पर देखा जाना चाहिए।”
“भारत की ये कमिटमेंट है अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, ये लीडरशिप कमिटमेंट है कि प्रधानमंत्री द्वारा विमेन लेड डेवलपमेंट को उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महिला रिजर्वेशन और पॉलिटिकल रिप्रेजेंटेशन ये प्रथम वरीयता का विषय होना चाहिए था। इस दृष्टि से W20 की टीम ने अपनी डिसअपॉइंटमेंट व्यक्त की है और डॉ. ज्योति किरण शुक्ला जो इंडिया डेलिगेट हैं, उन्होंने इस विषय पर विशेष तौर पर राजस्थान की महिलाओं से अपील की है कि वे आगे बढ़ें और इस बिट्रायल का पुरजोर विरोध करें।”
देशव्यापी आंदोलन की तैयारी
W20 इंडिया ने घोषणा की है कि वे इस दिशा में निर्णायक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही निम्नलिखित कदम उठाएंगे:
- पूरे देश में जागरूकता पहल की शुरुआत।
- महिलाओं की राजनीतिक और आर्थिक भागीदारी पर चर्चा मंचों का आयोजन।
- देशव्यापी सम्मेलनों (Conclaves) का संचालन।