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सीकरखनन

माफिया का ‘पत्थर’ वाला खेल बेनकाब: सीकर में 132 करोड़ का राजस्व डकारा, पहाड़ों को निगल गए खदान मालिक!

By The Public Hub
Last updated: March 30, 2026
5 Min Read

राजस्थान में खनन माफियाओं के हौसले किस कदर बुलंद हैं और सरकारी तंत्र किस कदर ‘धृतराष्ट्र’ बना हुआ है, इसका एक खौफनाक और सनसनीखेज खुलासा सीकर जिले में हुआ है। खनन विभाग की नाक के नीचे 13 खदानों से करोड़ों रुपये का पत्थर अवैध रूप से खोदकर बेच दिया गया, जबकि सरकारी फाइलों में इसकी आधी जानकारी भी दर्ज नहीं है।

Contents
ड्रोन मैपिंग ने उड़ाई विभाग की नींद: फाइलें कुछ और, हकीकत कुछ औरपहाड़ों की जगह अब खौफनाक गहरे गड्ढे, 2014 से चल रहा था खेलकौन है इन 132 करोड़ की लूट का जिम्मेदार? रडार पर ‘मेहरबान’ अफसरसॉफ्टवेयर और DGPS से खुला ‘अवैध’ राजExpose Now के तीखे सवाल: वसूली होगी या साठगांठ से रफा-दफा होगा मामला?अब क्या होगा? प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप

ड्रोन मैपिंग ने उड़ाई विभाग की नींद: फाइलें कुछ और, हकीकत कुछ और

आमतौर पर अंधेरे और ऊबड़-खाबड़ रास्तों में छिपकर रहने वाले इन काले कारनामों को इस बार ‘ड्रोन टेक्नोलॉजी’ ने बेनकाब किया है। माइनिंग एक्सपर्ट्स के साथ की गई वैज्ञानिक जांच और ड्रोन मैपिंग में जो आंकड़े सामने आए हैं, उसने खनन विभाग के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं:

  • रिकॉर्ड में खनन: केवल 61.74 लाख टन।
  • हकीकत (ड्रोन सर्वे): करीब 1.28 करोड़ टन पत्थर निकाला जा चुका है।
  • अवैध खनन का महा-अंतर: सीधे तौर पर 66.36 लाख टन पत्थर का कोई हिसाब-किताब नहीं है।
  • राजस्व का भारी नुकसान: इस चोरी से सीधे तौर पर राजस्थान सरकार के खजाने को 132 करोड़ रुपये के राजस्व (Revenue) का चूना लगा है।

पहाड़ों की जगह अब खौफनाक गहरे गड्ढे, 2014 से चल रहा था खेल

सीकर के मीणा की नांगल इलाके (राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर) में खनन का यह खेल ऐसा चला कि भूगोल ही बदल गया। जहां कभी 20 मीटर ऊंचे पहाड़ हुआ करते थे, वहां आज माफियाओं की हवस ने 95 मीटर तक गहरे खौफनाक गड्ढे बना दिए हैं। 13 हेक्टेयर में फैले इस इलाके में माफियाओं ने नियमों को ताक पर रखकर, बिना किसी डर के धरती का सीना छलनी कर दिया है। यह अवैध कारोबार साल 2014 से लगातार बदस्तूर जारी था।

कौन है इन 132 करोड़ की लूट का जिम्मेदार? रडार पर ‘मेहरबान’ अफसर

सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह उठता है कि जब 2014 से लगातार पहाड़ों को निगला जा रहा था, तो जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों में बैठकर क्या कर रहे थे? जिनके कार्यकाल के दौरान यह अवैध खनन फला-फूला और सरकारी खजाने को भारी चपत लगी:

  1. तत्कालीन माइनिंग इंजीनियर (ME) जे.पी. जाखड़।
  2. तत्कालीन सहायक खनिज अभियंता (AME) अनिल गुप्ता।
  3. और बाद में जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी— मनोज शर्मा, धर्म सिंह मीणा व अमीचंद दुहारिया।

क्या इन अधिकारियों की कथित लापरवाही या मूक सहमति के बिना इतने बड़े पैमाने पर लूट मुमकिन थी?

सॉफ्टवेयर और DGPS से खुला ‘अवैध’ राज

इस वैज्ञानिक खुलासे के लिए विशेषज्ञ टीम ने करीब 600 हाई-रिज़ॉल्यूशन फोटो लिए। इन्हें खास सॉफ्टवेयर और DGPS डिवाइस के जरिए प्रोसेस करके ‘डिजिटल टेरेन मॉडल’ में बदला गया। इस तकनीकी जांच से साफ हो गया कि खनन पट्टा संख्या 102/2002, 71/2002 और 63/2002 जैसी खदानों में स्वीकृत सीमा से कहीं ज्यादा और अवैध तरीके से खुदाई की गई है।

Expose Now के तीखे सवाल: वसूली होगी या साठगांठ से रफा-दफा होगा मामला?

सीकर के इस 132 करोड़ रुपये के महाघोटाले में अब सबकी नजरें भजनलाल सरकार और खनिज विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं।

  • पेनल्टी और वसूली: नियम कहते हैं कि अवैध खनन की स्थिति में लीज धारकों से बाजार दर के हिसाब से भारी पेनल्टी वसूली जानी चाहिए। क्या विभाग इन 13 पट्टाधारकों से पेनल्टी सहित करोड़ों की वसूली की हिम्मत जुटा पाएगा?
  • FIR का डर किसे?: इतने बड़े पैमाने पर सरकारी संपत्ति की चोरी एक गंभीर ‘क्रिमिनल ऑफेंस’ है। क्या विभाग खनन माफियाओं और पट्टाधारकों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कराकर उन्हें जेल भेजेगा? या फिर पुराने रिकॉर्ड्स की तरह इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
  • मिलीभगत पर वार: सालों से हो रहे इस अवैध खनन पर अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी मिलीभगत की ओर इशारा करती है। क्या उन जिम्मेदारों (AME, ME और अन्य अधिकारियों) पर भी कड़ी कार्रवाई होगी जिनकी नाक के नीचे पहाड़ों का अस्तित्व मिटा दिया गया?

अब क्या होगा? प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप

इस बड़े खुलासे के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा है। वर्तमान एएमई (AME) अशोक वर्मा ने स्वीकार किया है कि मामला गंभीर है। उन्होंने कहा कि खान मालिकों से ड्रोन सर्वे रिपोर्ट मांगी गई है और गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

क्या यह जांच केवल कागजों तक सीमित रहेगी या राजस्थान की जनता के 132 करोड़ रुपये वापस सरकारी खजाने में आएंगे? हम इस खबर पर पैनी नजर बनाए रखेंगे।

TAGGED:132 Crore Revenue LossDrone Survey MiningIllegal Stone Mining RajasthanMeena ki Nangal MiningSikar Mining Scam
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