Sunday, Jun 14, 2026

Weekly Newspaper

The Public Hub
Login
  • Home
  • राजस्थान
  • विभाग
  • जुर्म
  • धर्म
  • भारत
Reading: फीस एक्ट बना मज़ाक ! राजस्थान के निजी स्कूलों पर कौन करेगा कार्रवाई ?
Share
E-Paper
Font ResizerAa
The Public HubThe Public Hub
  • E-Paper
  • राजस्थान
  • जुर्म
  • कानून
  • योजना
  • धर्म
  • भारत
  • शिक्षा विभाग
Search
  • Home
  • E-Paper
  • Privacy Policy
  • About us
  • Terms and Conditions
  • Contact
Follow US
Made by ThemeRuby using the Foxiz theme. Powered by WordPress

Home - जयपुर - फीस एक्ट बना मज़ाक ! राजस्थान के निजी स्कूलों पर कौन करेगा कार्रवाई ?

जयपुरशिक्षा विभाग

फीस एक्ट बना मज़ाक ! राजस्थान के निजी स्कूलों पर कौन करेगा कार्रवाई ?

By The Public Hub
Last updated: May 20, 2026
5 Min Read

‘द पब्लिक हब’ विशेष रिपोर्ट

“कागज़ों में अभिभावकों को अधिकार, फिर भी स्कूलों की मनमानी जारी”…
शिक्षा विभाग मौन क्यों ?”

जयपुर। राजस्थान सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस रोकने के लिए वर्ष 2016 में राजस्थान स्कूल्स एक्ट (रेगुलेशन ऑफ फीस) लागू किया था। कानून बनाया गया, समितियाँ बनाई गईं, दंड के प्रावधान जोड़े गए, लेकिन सवाल यह है कि आखिर इतने सालों के बाद भी अभिभावक राहत क्यों नहीं महसूस कर रहे ?
राज्य के हजारों अभिभावकों का आरोप है कि निजी स्कूल आज भी खुलेआम फीस एक्ट की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। यूनिफॉर्म, किताबें, स्मार्ट क्लास, एक्टिविटी, वार्षिक शुल्क और ट्रांसपोर्ट के नाम पर अभिभावकों से लाखों रुपये की अतिरिक्त वसूली की जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल ?
क्या शिक्षा विभाग निजी स्कूलों के सामने बेबस है ?

एक्ट क्या कहता है… और क्या हो रहा है ?

फीस एक्ट के अनुसार :

1.स्कूल बिना अनुमति फीस नहीं बढ़ा सकते।
2.पीटीए और स्कूल लेवल फी कमिटी अनिवार्य है।
3.फीस प्रस्ताव 6 माह पहले समिति के सामने रखना होता है।
4.तय फीस 3 वर्षों तक लागू रहती है।
5.स्कूलों को फीस वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करनी होती है।
6.अतिरिक्त फीस लेने पर जुर्माना और रकम वापसी का प्रावधान है।

लेकिन वास्तविकता यह है कि :

1.अधिकांश अभिभावकों को पीटीए की बैठक तक की जानकारी नहीं होती।
2.कई स्कूल फीस कमेटियों को “मैनेज” करने के आरोपों से घिरे हैं।
3.किताबें और यूनिफॉर्म तय दुकानों से खरीदने का दबाव अब भी जारी है।
4.हर वर्ष किसी न किसी नए शुल्क के नाम पर वसूली बढ़ती जा रही है।
5.शिकायत करने वाले अभिभावकों को मानसिक दबाव झेलने के आरोप भी सामने आते हैं।
6.फीस नहीं भरोगे या देरी से भरोगे तो बच्चों को परेशान करेंगे !

कई अभिभावकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर ‘द पब्लिक हब’ को बताया कि स्कूल प्रबंधन के खिलाफ खुलकर बोलना आसान नहीं है।
कुछ मामलों में आरोप लगे कि
परीक्षा रोकने की धमकी दी गई,
ऑनलाइन पोर्टल बंद किए गए,
बच्चों को गतिविधियों से अलग किया गया,
टीसी देने का दबाव बनाया गया।
किसी अन्य स्कूल में एडमिशन की बात की तो टीसी ना देने की धमकी तक दी गई ! हालांकि अधिकांश मामलों में अभिभावक औपचारिक शिकायत करने से भी डरते हैं।

शिक्षा विभाग की कार्रवाई भी सवालों में ?

फीस एक्ट में स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद कार्रवाई के आंकड़े बेहद सीमित दिखाई देते हैं।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कितने स्कूलों की फीस संरचना की जांच हुई ?
कितने स्कूलों पर जुर्माना लगा ?
कितनी अतिरिक्त फीस वापस कराई गई ?
कितने अधिकारियों ने स्वतः संज्ञान लिया ?
यदि कानून प्रभावी है तो अभिभावकों की शिकायतें लगातार क्यों बढ़ रही हैं ?
क्या सिर्फ “कागज़ी समितियाँ” चल रही हैं ?
कानून के तहत बनी समितियों में अभिभावकों की भागीदारी अनिवार्य है, लेकिन कई अभिभावकों का आरोप है कि
चयन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होती,
सामान्य अभिभावकों को जानकारी नहीं दी जाती!
फैसले पहले ही तय होते हैं, फीस निर्धारण में वास्तविक चर्चा नहीं होती।
यदि ऐसा है तो फिर यह एक्ट अभिभावकों की सुरक्षा कर रहा है या सिर्फ औपचारिकता निभा रहा है ?
“कानून में सख्ती, ज़मीन पर नरमी क्यों ?”
फीस एक्ट की धारा 15 के अनुसार
पहली बार उल्लंघन पर ₹50 हजार से ₹2.5 लाख तक जुर्माना,
दोबारा उल्लंघन पर ₹1 लाख से अधिक दंड,
अतिरिक्त फीस वापसी,
लगातार उल्लंघन पर प्रबंधन पद से अयोग्यता तक का प्रावधान है।
फिर भी सवाल वही
अब तक कितने बड़े स्कूलों पर सख्त कार्रवाई हुई ?

‘द पब्लिक हब’ का सवाल ?

यदि सरकार ने कानून बनाया है तो उसका पालन करवाना भी सरकार की जिम्मेदारी है।
आज अभिभावक पूछ रहे हैं
“क्या शिक्षा व्यवस्था सेवा है या खुला व्यवसाय?”
“क्या फीस एक्ट सिर्फ फाइलों तक सीमित है ?”
“क्या आम अभिभावक की आवाज़ सुनने वाला कोई है ?”
अगर लगातार यही हाल रहा तो राजस्थान में शिक्षा अब केवल पढ़ाई का विषय नहीं, बल्कि आर्थिक संघर्ष का मुद्दा बनती जा रही है।
और जब एक्ट होने के बावजूद मनमानी जारी हो..तो सवाल सिर्फ स्कूलों पर नहीं, सरकारी व्यवस्था पर भी उठते हैं ?

TAGGED:Education CommercializationEducation Department RajasthanExtortion by SchoolsFee Regulation Act 2016Parents ComplaintsPTA GuidelinesRajasthan Private SchoolsSchool Fee Hike
Share This Article
Facebook Copy Link Print
Leave a Comment Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

HOT NEWS

सर्दी-खांसी से लेकर जोड़ों के दर्द और रेस्पिरेटरी प्रॉब्लम्स का नया विधिक कारण

राजस्थान का ‘महा-घूसकांड’: ₹2.43 करोड़ के साथ बीज निगम डायरेक्टर गिरफ्तार, किरोड़ी मीणा पर कांग्रेस का सीधा हमला

कर्मचारियों के तबादलों पर हलचल तेज, CM भजनलाल शर्मा ने दिए बड़े संकेत, जानिए कब से शुरू होगी प्रक्रिया

तीखे हुए सूर्यदेव के तेवर; झुलसाने वाली गर्मी के बीच 30 KM की रफ्तार से चलेंगी धूलभरी हवाएं

राजस्थान SI भर्ती घोटाला: आरपीएससी मेंबर बाबूलाल कटारा से लीक हुआ था पर्चा, परीक्षा में टॉपर बना भाई; SOG की 144वीं गिरफ्तारी

YOU MAY ALSO LIKE

जयपुर के उपभोक्ताओं को बड़ी सौगात: खुलेंगे 4 नए सहायक अभियन्ता कार्यालय, बिजली समस्याओं का होगा तुरंत समाधान

जयपुर, 1 जून। राजस्थान की भजनलाल सरकार ने राज्य के बिजली उपभोक्ताओं को सुगम और निर्बाध सेवाएं देने की दिशा…

ऊर्जा विभागजयपुर
June 2, 2026

सोलर पैनल घोटाले में ईडी की एंट्री: विभागीय जांच अब तक अधूरी, क्या जिम्मेदार अफसरों को बचाने की हो रही कोशिश?

सरकारी इमारतों पर सोलर पैनल लगाने के नाम पर हुए करीब 46 करोड़ रुपये के फर्जी बैंक गारंटी घोटाले में…

जयपुरअपराध
May 9, 2026

प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ी रोहिणी नगर योजना; 1594 बीघा जमीन पर बसावट का सपना 20 साल बाद भी अधूरा

राजधानी के रेनवाल मांजी क्षेत्र में स्थित रोहिणी नगर योजना सरकारी उदासीनता और बुनियादी सुविधाओं के अभाव का जीता-जागता उदाहरण…

शहरी विकास विभागजयपुर
April 21, 2026

आरएएस भर्ती 2026: RPSC ने निकाली 607 पदों पर वैकेंसी, जानें आवेदन की तारीख, पदों का विवरण और परीक्षा पैटर्न

अजमेर: राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर है। राजस्थान लोक…

अजमेरशिक्षा विभाग
May 27, 2026

The Public Hub is Jaipur’s premier weekly newspaper dedicated to high-impact investigative journalism. Focused on Rajasthan’s socio-political landscape, we deliver research-based deep dives and hard-hitting facts that go beyond the headlines. Registered under RNI: RJBIL/26.A0142, we are committed to accountability and the pursuit of truth.

  • Home
  • Privacy Policy
  • About us
  • Terms and Conditions
  • E-Paper
  • राजस्थान
  • जुर्म
  • कानून
  • योजना
  • धर्म
  • भारत
  • शिक्षा विभाग
  • Home
  • राजस्थान
  • विभाग
  • जुर्म
  • धर्म
  • भारत

Follow US: 

-

All Rights Reserved
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?