राजस्थान की उच्च न्यायपालिका इस समय नेतृत्व और कार्यबल की भारी कमी से जूझ रही है। प्रदेश के हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (सीजे) का पद खाली हुए इसी सप्ताह छह माह पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन अभी तक नई नियुक्ति को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थिति यह है कि राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के कुल 50 स्वीकृत पदों में से 11 पद खाली पड़े हैं। नियुक्तियों में इस देरी का सीधा खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है, जहाँ मुकदमों की पेंडेंसी का आंकड़ा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
लंबित मुकदमों का बोझ और रिक्त पद न्यायाधीशों की कमी का सीधा असर सुनवाई की गति पर पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार:
- राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित केस: 6.76 लाख से अधिक
- देशभर के हाईकोर्ट्स में लंबित केस: 63.97 लाख से अधिक
- रिक्तियां: राजस्थान में 50 में से 11 पद खाली हैं। देशभर में कुल 1,122 पदों में से 316 पद रिक्त हैं।
सिस्टम की खामी और कॉलेजियम पर सवाल झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश प्रकाश टाटिया ने वर्तमान नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट कॉलेजियम से भेजे गए नाम बार-बार खारिज क्यों हो रहे हैं, इस पर विचार की जरूरत है। उन्होंने तर्क दिया कि दूसरे राज्यों से कम समय के लिए सीजे लाने की परंपरा से संस्थान को हानि हो रही है। जब तक नए सीजे नामों को क्लियर करते हैं, उनका कार्यकाल पूरा हो जाता है और नए सीजे के आने पर प्रक्रिया फिर से शून्य से शुरू होती है। यह न केवल कॉलेजियम की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि योग्य अधिवक्ताओं के जज बनने के अवसर को भी प्रभावित करता है।
किस हाईकोर्ट के मूल से कितने सीजे? वर्तमान में देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों के प्रतिनिधित्व की स्थिति असमान है:
- इलाहाबाद: 04 (सर्वाधिक)
- मध्यप्रदेश: 03
- दिल्ली, बॉम्बे, पंजाब-हरियाणा: 02-02
- राजस्थान, पटना, मद्रास, केरल: 01-01
हरसंभव प्रयास का आश्वासन राज्य के विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने इस विषय पर कहा कि चूंकि केंद्र में विधि मंत्री राजस्थान से हैं, इसलिए राज्य सरकार इन मुद्दों के समाधान के लिए लगातार संपर्क में है। रिक्त पदों को भरने और सीजे की नियुक्ति के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यदि इस वर्ष खाली होने वाले अन्य 10 सीजे पदों के लिए समय रहते प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो न्यायपालिका पर दबाव असहनीय हो जाएगा।
