राजस्थान में शिक्षा के नाम पर व्यापार करने वाले और बिना मान्यता के स्कूल चलाने वाले माफियाओं पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। बीकानेर के नोखा ब्लॉक के पारवा गांव में चल रहे एक ऐसे ही स्कूल पर शिक्षा विभाग की टीम ने छापेमारी कर उसे सील कर दिया है। जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और डराने वाले हैं।
दो कमरे, एक रसोई और 100 मासूमों का भविष्य
जांच टीम ने पाया कि ‘पीएस मेमोरियल स्कूल’ नाम का यह संस्थान बिना किसी सरकारी मान्यता के महज 25×20 फीट के एक छोटे से मकान में संचालित हो रहा था।
- खौफनाक मंजर: स्कूल के मात्र दो कमरों और यहाँ तक कि रसोई घर में 100 से ज्यादा बच्चों को ठूस-ठूस कर बिठाया गया था।
- सुरक्षा से खिलवाड़: जिस रसोई में बच्चे पढ़ रहे थे, वहां चूल्हा और चिमनी तक मौजूद थी। इस ‘कागजी खेल’ के नाम पर गरीब अभिभावकों से हर महीने 500 से 800 रुपये की अवैध वसूली की जा रही थी।
मार्कशीट का काला कारोबार: दूसरे स्कूल से ‘सेटिंग’
यह केवल एक अवैध स्कूल नहीं, बल्कि संगठित ठगी का केंद्र था। संचालक ने नामदेव शिक्षण संस्थान के साथ सांठगांठ कर रखी थी। बच्चों को पढ़ाया पीएस मेमोरियल में जाता था, लेकिन सत्र खत्म होने पर उन्हें मार्कशीट और टीसी (TC) नामदेव स्कूल की थमा दी जाती थी। विभाग अब नामदेव शिक्षण संस्थान की मिलीभगत की जांच कर उसकी मान्यता रद्द करने की भी तैयारी कर रहा है।
कबाड़ बोलेरो: मौत का सफर
छापेमारी के दौरान यह भी पाया गया कि बच्चों को लाने-ले जाने के लिए एक ऐसी बोलेरो गाड़ी का उपयोग किया जा रहा था जो कबाड़ घोषित होने लायक थी।
- परमिट का अभाव: गाड़ी के पास न तो फिटनेस सर्टिफिकेट था और न ही बाल वाहिनी का परमिट।
- ओवरलोडिंग: क्षमता से अधिक बच्चों को इस जर्जर गाड़ी में भरकर उनकी जान जोखिम में डाली जा रही थी।
अब क्या होगा आगे? प्रशासन की रणनीति
| कदम | विवरण |
| छात्रों का शिफ्टिंग | सीबीईईओ प्रेमदान चारण के अनुसार, इन बच्चों को तुरंत पास के सरकारी स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा ताकि उनकी पढ़ाई खराब न हो। |
| कानूनी कार्रवाई | स्कूल संचालक मोहनलाल के खिलाफ धोखाधड़ी और बच्चों की जान जोखिम में डालने के तहत FIR दर्ज की जा रही है। |
| बड़े स्तर पर जांच | शिक्षा निदेशालय अब उन सभी 2500 संदिग्ध स्कूलों की सूची खंगाल रहा है, जो बिना मान्यता के संचालित होने के रडार पर हैं। |
