पचपदरा। पचपदरा रिफाइनरी के क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) में लगी आग की जांच कर रही एनआईए को डिजिटल हैकिंग या ग्लोबल सेबोटाज जैसे कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। तकनीकी जांच में सामने आया है कि निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी की गई थी।
हादसे के 3 प्रमुख कारण
- घटिया स्टील का उपयोग: सीडीयू की इनलेट लाइन में मानकों के अनुसार पी-5 अलॉय स्टील के पाइप होने चाहिए थे, लेकिन वहां तीन से चार गुना सस्ती कार्बन स्टील लगाई गई। जब करीब 400°C तक गर्म वैक्यूम रेजिड्यू पाइप से आगे बढ़ा, तो घटिया स्टील के कारण लीकेज हुआ और हवा के संपर्क में आते ही आग भड़क गई।
- स्मार्ट सेफ्टी वॉल्व का फेल होना: यूनिट में लगे ऑटोमैटिक सेफ्टी वॉल्व ऐन मौके पर सक्रिय नहीं हुए। प्रेशर कम होने पर इन वॉल्व को सप्लाई अपने आप बंद कर देनी चाहिए थी, लेकिन इनके फेल होने से हजारों लीटर ज्वलनशील पदार्थ आग में ईंधन का काम करता रहा।
- अनुभवहीन स्टाफ की तैनाती: घटना के समय रिफाइनरी की शिफ्ट में तैनात इंजीनियर अनुभवी नहीं थे। जांच में यह भी आया कि हाइड्रो-टेस्टिंग के दौरान निर्धारित एसओपी (SOP) का पालन नहीं किया गया और लीकेज ठीक करने के बजाय पैचवर्क का संदेह है।
पुरानी चेतावनियों को किया गया नजरअंदाज
हैरानी की बात यह है कि 5 साल पहले विशाखापट्टनम रिफाइनरी में भी इसी तरह का हादसा हुआ था। तब पेट्रोलियम मंत्रालय के ऑयल इंडस्ट्री सेफ्टी डायरेक्टरेट ने देशभर की रिफाइनरी में घटिया कार्बन स्टील और दोषपूर्ण स्प्रिंकलर सिस्टम को बदलने की सिफारिश की थी। सवाल उठ रहे हैं कि 79 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट में उन सुरक्षा सिफारिशों को क्यों लागू नहीं किया गया?
