प्रदेश के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में चल रहे एक बड़े संगठित भ्रष्टाचार के सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। हनुमानगढ़ के पल्लू और बीकानेर के गजनेर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये का क्लेम उठाने की साजिश को मंत्री ने मौके पर पहुँचकर नाकाम कर दिया। मंत्री का दावा है कि उत्तर प्रदेश और बिहार के फर्जी किसानों के नाम पर राजस्थान के अन्नदाता का हक मारा जा रहा था।
SBI पल्लू में 9 करोड़ का ‘अंधा खेल’
गुरुवार दोपहर कृषि मंत्री अचानक हनुमानगढ़ के पल्लू स्थित एसबीआई (SBI) ब्रांच पहुँचे। यहाँ 162 ऐसे ‘किसानों’ के नाम पर 9 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम पास हुआ था, जिनकी क्षेत्र में कोई जमीन ही नहीं है। मंत्री ने जब बैंक मैनेजर से इन किसानों की ‘जमाबंदी’ और जमीन के रिकॉर्ड मांगे, तो अधिकारी कोई भी दस्तावेज पेश नहीं कर पाए। बिना जमाबंदी के बीमा क्लेम पास होना सीधे तौर पर बैंक प्रबंधन और बिचौलियों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

बीकानेर के गजनेर में भी ₹6 करोड़ की ‘लूट’
ऐसा ही मामला बीकानेर के गजनेर क्षेत्र में भी सामने आया है। यहाँ करीब 6 करोड़ रुपये का फर्जी क्लेम तैयार किया गया था। जांच में खुलासा हुआ कि कुल मिलाकर करीब 228 फर्जी खाते (पल्लू और गजनेर मिलाकर) खोलकर उन्हें ऋणी दिखाया गया और करोड़ों की राशि इसी सप्ताह ट्रांसफर होने वाली थी।
मंत्री के तीखे सवाल: “ऐसी खुली लूट कभी नहीं देखी”
बैंक की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने इसे अन्नदाता के साथ सीधा विश्वासघात बताया। उन्होंने कहा कि जुलाई 2025 में प्रीमियम कटने के बावजूद बैंक अब तक ‘बेखबर’ बना हुआ था।
“जिस किसान के पसीने से देश चलता है, उसी के नाम पर ऐसी लूट शर्मनाक है। पटवार रिपोर्ट में साफ है कि इन लोगों के पास जमीन नहीं है, फिर बीमा कैसे हुआ? इस घोटाले में बैंक पूरी तरह मिला हुआ है। यह सालासर जैसा ही बड़ा सिंडिकेट है।” — डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, कृषि मंत्री
उच्च स्तरीय जांच के आदेश
मंत्री ने इस पूरे मामले की हाई लेवल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्नदाता के हक पर डाका डालने वाले किसी भी अधिकारी या बैंक कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल क्लेम राशि के भुगतान पर रोक लगा दी गई है और बैंक के रिकॉर्ड्स को सीज करने की तैयारी की जा रही है।
