गुलाबी नगरी की सड़कों पर इन दिनों एक नया खतरा चमक रहा है। नगर निगम (JMC) ने कमाई की चमक में अंधा होकर शहर की यातायात सुरक्षा को पूरी तरह ताक पर रख दिया है। नियमों के विरुद्ध जाकर शहर के व्यस्त चौराहों और मुख्य मार्गों पर 14 डायनामिक इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले लगाने की अनुमति दे दी गई है। इतना ही नहीं, निगम अधिकारियों की ‘मौन स्वीकृति’ के चलते 10 प्रमुख स्थानों पर अवैध रूप से ये डिस्प्ले खड़े कर दिए गए हैं, जिन पर धड़ल्ले से विज्ञापन चल रहे हैं।
सड़क सुरक्षा से सीधा समझौता: जानलेवा साबित हो सकती हैं स्क्रीनें: सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिन स्थानों पर ये हाई-ब्राइटनेस एलईडी स्क्रीनें लगाई गई हैं, उनमें त्रिमूर्ति सर्किल, रामबाग सर्किल, ओटीएस चौराहा और एमआई रोड जैसे व्यस्ततम इलाके शामिल हैं। इन जगहों पर यातायात का भारी दबाव रहता है और चालकों को अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तेज रोशनी वाली और लगातार बदलते दृश्यों वाली ये स्क्रीनें वाहन चालकों का ध्यान भटका सकती हैं। विशेषकर रात के समय ये स्क्रीनें भीषण दुर्घटनाओं का सबब बन सकती हैं।
नियमों का खेल: बिना NOC के खड़े हैं डिस्प्ले: हैरानी की बात यह है कि यातायात पुलिस ने इन इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले के लिए कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी नहीं किया है, फिर भी ये सीना तानकर शहर में खड़े हैं। चर्चा है कि इस पूरे मामले में नगर निगम के अधिकारियों और विज्ञापन एजेंसियों के बीच एक गहरा सिंडिकेट काम कर रहा है। विभाग के ही कुछ सूत्रों का कहना है कि एक रसूखदार आईएएस (IAS) अधिकारी के कथित दबाव में मालवीय नगर पुलिया, रिद्धि-सिद्धि चौराहा और गांधी पथ जैसे अति-व्यस्त इलाकों में ये स्क्रीनें लगवाई गई हैं।
अधूरे नियम, फिर भी कैसे हो गई नीलामी? नगर निगम के राजस्व उपायुक्त मनोज वर्मा के बयानों ने इस पूरी व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि वर्तमान में इन डिस्प्ले के लिए निगम के नियमों में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है और न ही अब तक इनकी फीस का निर्धारण किया गया है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब नियम ही तय नहीं थे, तो नवंबर 2025 में इन इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले का ऑक्शन (नीलामी) किस आधार पर और किन शर्तों पर कर दिया गया?
निजी संपत्तियों पर भी ‘अवैध’ कब्जा: यह ‘चमकता खेल’ सिर्फ चौराहों तक ही सीमित नहीं है। निजी आवासों और इमारतों पर भी संपत्ति मालिकों को किराया देकर अवैध तरीके से ये स्क्रीनें लगवाई जा रही हैं। जगतपुरा के विवा सिटी मॉल, मानसरोवर मेट्रो स्टेशन और वैशाली नगर के प्राइम लोकेशंस पर ये स्क्रीनें साफ देखी जा सकती हैं।
विशेषज्ञों का साफ कहना है कि निगम का तर्क ‘करोड़ों का राजस्व’ कमाना हो सकता है, लेकिन यह काली कमाई शहरवासियों की सुरक्षा और उनकी जान की कीमत पर की जा रही है।
