राजधानी जयपुर में गुरुवार (17 अप्रैल, 2026) को हाउसिंग बोर्ड (आवासन मंडल) की टीम जब करोड़ों की बेशकीमती जमीन से कब्जा हटाने पहुंची, तो वहां रणक्षेत्र जैसे हालात बन गए। बीटू बाइपास से द्रव्यवती नदी तक फैली करीब 42 बीघा सरकारी जमीन को मुक्त कराने की इस कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया और टीम पर पथराव कर दिया।
करोड़ों की जमीन और पथराव का शोर हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद उप-आवासन आयुक्त संजय शर्मा के नेतृत्व में बोर्ड की टीम आधा दर्जन जेसीबी मशीनों और भारी पुलिस जाप्ते के साथ मौके पर पहुंची थी। जैसे ही मशीनों ने अवैध बाउंड्री वॉल और ढांचों को तोड़ना शुरू किया, वहां मौजूद महिलाओं और स्थानीय निवासियों ने विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि महिलाओं ने जेसीबी मशीनों पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए, जिसके कारण प्रशासन को कुछ समय के लिए काम रोकना पड़ा।
क्या है पूरा मामला? (2200 करोड़ का गणित) विवादित जमीन का यह टुकड़ा जयपुर के प्राइम लोकेशन पर स्थित है, जिसकी बाजार कीमत 2200 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है।
- अधिग्रहण: हाउसिंग बोर्ड ने इस जमीन का अधिग्रहण साल 1989 में शुरू किया था, जो 1991 में पूरा हो गया।
- लापरवाही: अधिग्रहण के बावजूद बोर्ड ने दशकों तक इस जमीन का भौतिक कब्जा नहीं लिया।
- घोटाला: इसी बीच भू-माफियाओं ने पुराने और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यहाँ कॉलोनी काट दी और भोले-भाले लोगों को कम कीमतों पर प्लॉट बेच दिए।
एसीबी कर रही है जांच साल 2019 में जब इस अवैध कॉलोनी के नियमितीकरण की फाइल जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) पहुंची, तो हाउसिंग बोर्ड ने एनओसी देने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद इस पूरे जमीन सौदे में बड़े फर्जीवाड़े की बात सामने आई। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को सौंपी गई थी।
आज की कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि प्रशासन अब इस बेशकीमती जमीन को किसी भी कीमत पर भू-माफियाओं के चंगुल में नहीं रहने देगा। फिलहाल मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है और रुक-रुक कर ध्वस्तीकरण की कार्यवाही जारी है।
