राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में पेपर लीक की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब जाँच की आंच आयोग के शीर्ष पदों तक पहुँच गई है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने स्कूल व्याख्याता कृषि विज्ञान भर्ती परीक्षा-2022 के मामले में आरपीएससी के पूर्व सदस्य और पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. शिव सिंह राठौड़ को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है। यह कार्रवाई तब हुई जब गिरफ्तार माफिया अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा और पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की गई, जिसमें कई रसूखदारों के नाम सामने आने की चर्चा है।
अदालती कार्यवाही की बात करें तो एसओजी ने मुख्य आरोपी शेर सिंह मीणा को कोर्ट में पेश किया, जहाँ से उसे 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। रिमांड अवधि के दौरान एसओजी की टीम शेर सिंह, बाबूलाल कटारा और उसके भांजे विजय डामोर से त्रिकोणीय पूछताछ कर रही है। एडीजी विशाल बंसल के अनुसार, इस जाँच का मुख्य उद्देश्य पैसे के लेन-देन वाले स्थानों की तस्दीक करना और उस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना है जिसने लाखों युवाओं के सपनों को ₹60 लाख की मामूली रकम के लिए बेच दिया।
जाँच में पेपर लीक करने का जो तरीका सामने आया है, वह किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। बाबूलाल कटारा ने आरपीएससी कार्यालय की गोपनीयता को ताक पर रखते हुए वहीं से मूल प्रश्नपत्र चोरी किया और उसे अपने सरकारी आवास पर ले आया। वहाँ उसके भांजे विजय डामोर ने सुरक्षा घेरे के बीच पूरे पेपर को एक निजी रजिस्टर में हाथ से उतारा। इसके बाद इस हस्तलिखित कॉपी को ₹60 लाख के एवज में शेर सिंह मीणा को सौंप दिया गया। कटारा की लालच यहीं खत्म नहीं हुई; उसने पैसों के साथ-साथ शेर सिंह से अपने भांजे के लिए भूगोल (Geography) का पेपर भी माँगा था।
शेर सिंह मीणा ने इस पेपर को आगे विनोद रेवाड़, भूपेंद्र सारण और सुरेश ढाका जैसे कुख्यात माफियाओं को ऊँची कीमतों पर बेचा। इनमें से विनोद और भूपेंद्र तो पहले ही सलाखों के पीछे पहुँच चुके हैं, लेकिन सुरेश ढाका अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है और फरार चल रहा है। शेर सिंह ने कबूला है कि उसने सुरेश ढाका से भूगोल का पेपर लेकर विजय डामोर को भेजा था, लेकिन संयोगवश विजय उस समय अपना मोबाइल नहीं देख पाया और बिना नकल सामग्री के ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश कर गया।
फिलहाल, एसओजी डॉ. शिव सिंह राठौड़ से यह जानने की कोशिश करेगी कि क्या इस गिरोह को आयोग के भीतर से कोई और मौन समर्थन प्राप्त था। पेपर देने की जगह और ट्रांजेक्शन के डिजिटल सबूतों को जुटाया जा रहा है। एडीजी बंसल ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों पर शिकंजा कसा जा सकता है। राज्य सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता से समझौता करने वाले किसी भी ‘बड़े नाम’ को बख्शा नहीं जाएगा।
