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Home - जलदाय विभाग - 181 और कलेक्टर से गुहार फिर भी नहीं मिला पानी: बाड़मेर में भीषण गर्मी के बीच महिलाएं दूर से पानी लाने को मजबूर

जलदाय विभागबाड़मेर

181 और कलेक्टर से गुहार फिर भी नहीं मिला पानी: बाड़मेर में भीषण गर्मी के बीच महिलाएं दूर से पानी लाने को मजबूर

By The Public Hub
Last updated: May 21, 2026
5 Min Read

बाड़मेर: एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में ‘हर घर जल’ और सुदृढ़ पेयजल व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरहदी जिले बाड़मेर की ग्राम पंचायत गादान से एक चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। यहां लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद ग्रामीण आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।

Contents
20 साल से बंद पड़ा है कुआं, हैंडपंप भी खराब48 डिग्री तापमान में पशुओं पर गहराया संकट, महंगे टैंकरों का सहाराहेल्पलाइन से लेकर कलेक्टर तक गुहार, फिर भी विभाग मौनयहां दर्ज कराई जा चुकी हैं शिकायतें:क्या कहते हैं स्थानीय ग्रामीण?

सरकारी रिकॉर्ड और “मेरी पंचायत” पोर्टल की मानें तो वर्ष 2022-23 में इस ग्राम पंचायत क्षेत्र में सार्वजनिक पेयजल पाइपलाइन निर्माण कार्य पर 8 लाख 14 हजार 92 रुपये खर्च कर इसे पूरी तरह ‘पूर्ण’ दर्शा दिया गया है। लेकिन धरातल की कड़वी सच्चाई यह है कि आज तक इस पाइपलाइन से ग्रामीणों को नियमित जलापूर्ति नसीब नहीं हो सकी है।

20 साल से बंद पड़ा है कुआं, हैंडपंप भी खराब

गादान गांव में पानी के पुराने स्रोत भी पूरी तरह दम तोड़ चुके हैं। ग्रामीणों के अनुसार, गांव का करीब सौ साल पुराना कुआं पिछले 20 वर्षों से बंद पड़ा है। इस कुएं के पास ही वर्ष 2012 में एक जीएलआर (ग्राउंड लेवल रिजर्वोयर) का निर्माण करवाया गया था, लेकिन उसमें भी महज कुछ महीने ही पानी आया और तब से वह सूखा है। पास में लगा सरकारी हैंडपंप भी लंबे समय से खराब और बंद पड़ा है।

अभिलेखों में काम पूरा होने के बावजूद पानी न पहुंचने के पीछे ग्रामीण तकनीकी खामियों, अधूरे कनेक्शन, पानी के कम दबाव और बूस्टर व्यवस्था की कमी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

48 डिग्री तापमान में पशुओं पर गहराया संकट, महंगे टैंकरों का सहारा

बाड़मेर में इन दिनों सूरज आग उगल रहा है और पारा 48 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है। इस भीषण गर्मी के दौर में ग्रामीण और पशुपालक दोहरी मार झेल रहे हैं:

  • महंगे दामों पर पानी खरीदने की मजबूरी: गांव में पानी न होने के कारण ग्रामीणों को उड़खा और राणीगांव से निजी टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं। एक सिंगल टैंकर के लिए गरीब ग्रामीणों को 1500 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
  • पशुधन पर आफत: गादान क्षेत्र में 900 से अधिक मवेशी (पशु) हैं। इस झुलसाने वाली गर्मी में पानी का कोई स्थायी स्रोत न होने से बेजुबान पशुओं की हालत बेहद चिंताजनक बनी हुई है।
  • महिलाओं का संघर्ष: घर की महिलाएं तपती धूप में मीलों दूर से सिर पर मटका रखकर पानी लाने को मजबूर हैं, जिससे उनका दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

हेल्पलाइन से लेकर कलेक्टर तक गुहार, फिर भी विभाग मौन

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने पानी की समस्या के समाधान के लिए सिस्टम के हर दरवाजे पर दस्तक दी है, लेकिन सिवाय आश्वासनों के कुछ हासिल नहीं हुआ।

यहां दर्ज कराई जा चुकी हैं शिकायतें:

  • राज्य सरकार की हेल्पलाइन 181 पर कई बार शिकायतें दर्ज की गईं।
  • राजस्थान संपर्क पोर्टल के माध्यम से भी गुहार लगाई गई।
  • सूचना के अधिकार (RTI) के तहत भी आवेदन प्रस्तुत किए जा चुके हैं।
  • जिला कलेक्टर कार्यालय और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) को बार-बार लिखित में अवगत कराया गया है।

इतनी कोशिशों के बावजूद जमीनी स्तर पर पीएचईडी (जलदाय विभाग) का कोई भी ठोस परिणाम सामने नहीं आया है, जिससे विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

क्या कहते हैं स्थानीय ग्रामीण?

  • मंगलसिंह (ग्रामीण): “पूरे क्षेत्र में पानी का भयंकर संकट है। जीएलआर निर्माण के बाद कुछ महीने ही पानी की शक्ल देखने को मिली थी। अब जीएलआर और कुआं दोनों सूखे पड़े हैं। जब तक नई डाली गई पाइपलाइन में पानी की टेस्टिंग कर सप्लाई शुरू नहीं की जाती, तब तक यह संकट नहीं टलेगा।”
  • भंवर सिंह (ग्रामीण): “हमने कई बार जलदाय विभाग के अधिकारियों को पाइपलाइन की तकनीकी खामियों के बारे में शिकायत की, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। गर्मियों में हमारी स्थिति नरकीय हो जाती है। उण्डखा और राणीगांव से महंगे टैंकर डलवाकर जैसे-जैसे गुजारा कर रहे हैं।”
TAGGED:Animal Distress RajasthanBarmer Water CrisisDrinking Water PipelineGadan Village RajasthanGovernment Portal DataPHED Department NegligenceRajasthan Samparq 181Rural Infrastructure IssueSummer Water ScarcityTanker Mafia Barmer
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