जयपुर: राजस्थान सरकार ने प्रदेश की वन संपदा को सुरक्षित रखने और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए बड़े बदलावों की तैयारी कर ली है। वन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के संरक्षित वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की पल-पल की निगरानी के लिए एक ‘विशेष सेल’ (Special Cell) का गठन किया जाए। यह सेल सीधे विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
बुधवार को शासन सचिवालय में आयोजित राज्य वन्यजीव मंडल की स्थायी समिति की सातवीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री शर्मा ने ये निर्देश जारी किए।
बैठक के प्रमुख निर्णय और निर्देश:
- हेरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा: वन क्षेत्रों के भीतर स्थित ऐतिहासिक इमारतों, स्मारकों और पुराने शिकार हॉल (Hunting Halls) का जीर्णोद्धार किया जाएगा। इन्हें पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि विरासत के संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन राजस्व भी बढ़ सके।
- पुलिस पर निर्भरता घटेगी: मंत्री ने ‘वाइल्डलाइफ इंटेलिजेंस नेटवर्क’ को मजबूत करने पर जोर दिया। इसका उद्देश्य वन्यजीव अपराधों से निपटने में वन विभाग को आत्मनिर्भर बनाना और पुलिस पर निर्भरता कम करना है।
- भ्रामक खबरों पर रोक: किसी वन्यजीव की मृत्यु की स्थिति में अफवाहों को रोकने के लिए विभाग अब तुरंत प्रेस वार्ता (Press Conference) कर तथ्यात्मक जानकारी साझा करेगा।
- संघर्ष रोकने के लिए SOP: मानव-वन्यजीव संघर्ष और वन्यजीवों की बढ़ती जनसंख्या के प्रबंधन के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर उसे सख्ती से लागू किया जाएगा।
ग्रामीणों से सीधा संवाद बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार ने निर्देश दिए कि वन क्षेत्रों से सटे गांवों में हर महीने अधिकारियों द्वारा बैठकें की जाएं। इससे ग्रामीणों की समस्याएं सुलझेंगी और वन विभाग के प्रति उनका विश्वास बढ़ेगा। इसके अलावा, बैठक में दुर्लभ जीव कराकल (Caracal) के संरक्षण और ‘फॉरेस्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम’ के जरिए स्थानीय लोगों को रोजगार देने पर भी चर्चा हुई।
बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक पवन कुमार उपाध्याय सहित वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और समिति सदस्य मौजूद रहे।
