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10वीं-12वीं की नौकरी पर MA, PhD वालों का हक नहीं! SC ने कहा- अधिकतम योग्यता तय करना पूरी तरह वैध

By The Public Hub
Last updated: June 5, 2026
4 Min Read

नई दिल्ली। आज के समय में सरकारी नौकरी पाने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा है। अक्सर देखा जाता है कि चपरासी, सफाईकर्मी या क्लर्क जैसी छोटी सरकारी नौकरियों (चतुर्थ श्रेणी) के लिए भी पीएचडी (PhD), बीटेक (B.Tech) और पोस्ट ग्रेजुएट (PG) डिग्री वाले उम्मीदवार लाइन में लगे होते हैं। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस पर एक अहम और स्पष्ट टिप्पणी की है। सर्वोच्च अदालत ने साफ किया है कि हर नौकरी के लिए ज्यादा पढ़ा-लिखा होना जरूरी नहीं है। अगर किसी पद के लिए ‘अधिकतम शैक्षणिक योग्यता’ (Maximum Qualification) तय की गई है, तो उससे अधिक पढ़े-लिखे उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित कर नौकरी से बाहर किया जा सकता है।

Contents
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?क्यों जरूरी है अधिकतम योग्यता की सीमा?सरकार एक ‘आदर्श नियोक्ता’ (Model Employer)

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी भी नियोक्ता (Employer) का उद्देश्य केवल सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे व्यक्ति को नौकरी देना नहीं होता, बल्कि उस पद के लिए ‘सही और उपयुक्त’ व्यक्ति का चयन करना होता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि हर पद की अपनी एक विशेष प्रकृति और जरूरत होती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई नौकरी विशेष रूप से 10वीं या 12वीं पास युवाओं के लिए निकाली गई है, और सरकार ने उसमें अधिकतम योग्यता तय कर दी है, तो वहां MA या PhD वाले उम्मीदवारों को बाहर रखना पूरी तरह वैध और न्यायसंगत है।

क्यों जरूरी है अधिकतम योग्यता की सीमा?

अदालत ने इस व्यवस्था को सामाजिक रूप से संतुलित बताया और इसके निम्नलिखित कारण गिनाए:

  • सीमित शिक्षा वालों को अवसर: कुछ सरकारी पद विशेष रूप से उन लोगों के लिए बनाए जाते हैं, जो किन्हीं कारणों से उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाए।
  • समान प्रतिस्पर्धा: अगर छोटी नौकरियों में भी अत्यधिक योग्य (Overqualified) उम्मीदवारों को शामिल कर लिया जाए, तो कम पढ़े-लिखे उम्मीदवारों के लिए चयन की संभावना न के बराबर रह जाएगी।
  • अधिकारों का संरक्षण: कम शैक्षणिक योग्यता वाले पद पर अधिक योग्य व्यक्ति को नियुक्त करना, एक वास्तविक और जरूरतमंद उम्मीदवार से उसका अवसर छीनने जैसा है।

सरकार एक ‘आदर्श नियोक्ता’ (Model Employer)

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि एक आदर्श नियोक्ता के रूप में सरकार के लिए यह बिल्कुल सही है कि वह कुछ श्रेणियों की नौकरियों को कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए सुरक्षित (रिज़र्व) रखे।

मद्रास हाई कोर्ट का आदेश किया रद्द: इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक अस्थायी बैंक सहायक को बहाल करने का निर्देश दिया गया था। दरअसल, उस कर्मचारी ने नौकरी पाने के लिए अपने स्नातक (ग्रेजुएट) होने की बात छिपाई थी, जबकि वह नौकरी केवल 10वीं पास तक की योग्यता वाले अभ्यर्थियों के लिए ही निर्धारित थी। अदालत ने माना कि ऐसी नीतियां बिल्कुल सही हैं और न्यायपालिका हमेशा इनका समर्थन करती रही है।

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