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राजस्थान में निवेश का ‘साइड इफेक्ट’: फ्रांसीसी कंपनी के लिए राजदूत को लिखनी पड़ी गुहार; जमीन आवंटन में मनमानी और जानबूझकर देरी का आरोप

By The Public Hub
Last updated: March 28, 2026
4 Min Read

राजस्थान में निवेश के बड़े-बड़े दावों और ‘राइजिंग राजस्थान’ जैसे आयोजनों की चकाचौंध के बीच एक ऐसा दस्तावेज़ सामने आया है, जिसने सूबे की ब्यूरोक्रेसी और निवेश नीति की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। यह दस्तावेज़ कोई मामूली कागज़ नहीं, बल्कि भारत में फ्रांस के राजदूत महामहिम थियरी माथौ (Thierry Mathou) द्वारा स्वयं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लिखा गया एक गोपनीय पत्र है।

Contents
क्या है मामला?फ्रांसीसी राजदूत के पत्र में तीन ऐसी बातें हैं जो राजस्थान की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं:बड़ा सवाल: कौन रोक रहा है निवेश?

यह पत्र साफ-साफ बयां कर रहा है कि राजस्थान में निवेश करना विदेशी कंपनियों के लिए कितना बड़ा सिरदर्द बन चुका है, और कैसे मुख्यमंत्री स्तर पर हुई बातचीत को भी ज़मीनी अफ़सरशाही ठेंगे पर रख रही है।

क्या है मामला?

फ्रांस की दिग्गज कंपनी सूफ्ले माल्ट इंडिया (Soufflet Malt India), जो माल्ट उद्योग में विश्व स्तर पर अग्रणी है, राजस्थान में एक बड़ी परियोजना के लिए निवेश करना चाहती है। इसके लिए उसे राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास और निवेश निगम (RIICO) से ज़मीन चाहिए।

फ्रांसीसी राजदूत के पत्र के अनुसार:

“मुख्यमंत्री और राजदूत के बीच एक ‘सकारात्मक बातचीत’ और ‘आपसी समझ’ पहले ही बन चुकी थी। लेकिन, इसके बावजूद RIICO ने ज़मीन आवंटन की शर्तों में अचानक बड़े बदलाव कर दिए।”


फ्रांसीसी राजदूत के पत्र में तीन ऐसी बातें हैं जो राजस्थान की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं:

  1. ‘पॉजिटिव बातचीत’ का कोई मोल नहीं? राजदूत लिखते हैं, “…आपके साथ पिछली बैठक के दौरान हुई सकारात्मक बातचीत और बनी आपसी समझ के बावजूद…” यह बताता है कि निवेशक मुख्यमंत्री से तो आश्वासन ले लेते हैं, लेकिन जब फाइल विभागों में जाती है, तो उसे रोक दिया जाता है। क्या अफ़सरशाही मुख्यमंत्री की बात मानने को तैयार नहीं है?
  2. अचानक कीमत क्यों बढ़ी? पत्र का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यह है: “…विशेष रूप से, RIICO ने हाल ही में उस कीमत से काफी अधिक कीमत पर जमीन आवंटन का प्रस्ताव दिया है जिस पर पहले चर्चा हुई थी…” जब एक बार कीमत पर ‘आपसी समझ’ बन चुकी थी, तो RIICO ने अचानक कीमत क्यों बढ़ाई? क्या यह ‘कमीशन’ की मांग का एक तरीका है, जैसा कि अक्सर निवेशक गुपचुप तरीके से शिकायत करते हैं?
  3. जानबूझकर देरी? ज़मीन आवंटन की समयसीमा को आगे बढ़ाकर दिसंबर 2026 तक खींच दिया गया है। पत्र के अनुसार, इससे परियोजना “गंभीर जोखिम” में पड़ गई है। क्या यह देरी जानबूझकर की जा रही है ताकि निवेशक हार मान ले या किसी ‘सेटिंग’ के लिए तैयार हो जाए?

बड़ा सवाल: कौन रोक रहा है निवेश?

जब एक विदेशी राजदूत को अपने देश की कंपनी के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गुहार लगानी पड़े, तो यह समझा जा सकता है कि सिस्टम के भीतर भ्रष्टाचार और लालफीताशाही की जड़ें कितनी गहरी हैं। यह पत्र राजस्थान की साख पर एक बड़ा बट्टा है।

“क्या ‘एक खिड़की’ (Single Window System) का दावा केवल कागज़ों पर है? अगर राजदूत को पत्र लिखना पड़ रहा है, तो समझ लीजिए कि राजस्थान में निवेश ‘सिस्टम’ के बिना नामुमकिन है।”

TAGGED:Bhajan Lal Sharma bureaucracyFrench Ambassador Letter RajasthanRising Rajasthan ExposeSoufflet Malt India RIICO Land
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