Saturday, March 21, 2026
राजधानीदहशत में जयपुर हाईकोर्ट: साढ़े तीन महीने में 10वीं बार मिला धमकी भरा मेल, VPN के इस्तेमाल से पुलिस की बढ़ी मुश्किलें

दहशत में जयपुर हाईकोर्ट: साढ़े तीन महीने में 10वीं बार मिला धमकी भरा मेल, VPN के इस्तेमाल से पुलिस की बढ़ी मुश्किलें

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित हाईकोर्ट बेंच एक बार फिर ‘बम’ की धमकी से थर्रा उठी है। शुक्रवार सुबह एक अज्ञात ईमेल के जरिए हाईकोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की चेतावनी दी गई, जिसके बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के हाथ-पांव फूल गए। ईमेल में मुख्य न्यायाधीश (CJI) के दौरे को रद्द करने की मांग करते हुए दोपहर 12 बजे तक परिसर खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया था।

RDX प्लांट करने का दावा और सुरक्षा ड्रिल

धमकी भरे मेल में दावा किया गया कि हाईकोर्ट परिसर में आरडीएक्स (RDX) प्लांट कर दिया गया है। सूचना मिलते ही डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ते ने पूरे परिसर की घेराबंदी कर सघन तलाशी शुरू की। हालांकि, गहन जांच के बाद कोई भी संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई, जिससे प्रशासन ने राहत की सांस ली। इस सुरक्षा जांच के कारण अदालत की कार्यवाही में देरी हुई और सुनवाई सुबह 11 बजे के बाद ही शुरू हो सकी।

CJI और जस्टिस सूर्यकांत का दौरा निशाने पर

आज सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत जयपुर के दौरे पर हैं, जहां वे साइबर सुरक्षा पर एक सेमिनार का उद्घाटन करने वाले हैं। धमकी भरे मेल में इसी दौरे को निशाना बनाने की बात कही गई थी। बता दें कि बीते गुरुवार को भी हाईकोर्ट को इसी तरह की धमकी मिली थी, जो बाद में महज एक अफवाह साबित हुई।

साढ़े तीन महीने में 10वीं बार धमकी

जयपुर हाईकोर्ट के लिए धमकियों का यह सिलसिला एक गंभीर चुनौती बन गया है। पिछले साढ़े तीन महीनों में यह 10वीं बार है जब कोर्ट को उड़ाने की धमकी मिली है:

  • शुरुआत: 31 अक्टूबर 2025 को पहली धमकी मिली।
  • दिसंबर का खौफ: 5, 8, 9, 10 और 11 दिसंबर को लगातार मेल आए।
  • साल 2026: इस साल अब तक 6 जनवरी, 17 फरवरी, 19 फरवरी और आज 20 फरवरी को धमकी मिल चुकी है।

पकड़ से बाहर क्यों है आरोपी?

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि आरोपी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का इस्तेमाल कर रहा है। वीपीएन के जरिए आईपी एड्रेस लगातार बदलने के कारण पुलिस को सटीक लोकेशन ट्रेस करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। साइबर कानून विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय वीपीएन प्रोवाइडर कंपनियों से डेटा हासिल करना एक लंबी कानूनी प्रक्रिया है, जिसका फायदा उठाकर आरोपी बार-बार दहशत फैला रहा है।

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