Rajasthan Police Academy: राजस्थान पुलिस अकादमी में सस्टेनेबल फूड पर जोर, प्रशिक्षुओं ने ली भोजन बर्बाद नहीं करने की शपथ; जानिए क्या है अभियान का उद्देश्य
जयपुर, राजस्थान। स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जयपुर स्थित राजस्थान पुलिस अकादमी में विशेष जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। ब्रिक्स सस्टेनेबल लाइफस्टाइल वीक (BRICS Sustainable Lifestyle Week) के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में टिकाऊ खानपान, संतुलित आहार और भोजन की बर्बादी रोकने पर विशेष जोर दिया गया। अभियान के चौथे दिन 4 नवंबर 2026 को ‘एडॉप्ट सस्टेनेबल फूड’ (Adopt Sustainable Food) थीम के माध्यम से पुलिस प्रशिक्षुओं और हॉस्टल प्रभारियों को जिम्मेदार खानपान की आदतें अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केवल बेहतर भोजन की आदतों को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि भोजन के महत्व को समझाते हुए संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूकता पैदा करना भी रहा। इस दौरान प्रशिक्षुओं को बताया गया कि भोजन की बर्बादी रोकना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है और छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
BRICS Sustainable Lifestyle Week के चौथे दिन आयोजित हुई गतिविधियां
राजस्थान पुलिस अकादमी में ब्रिक्स सस्टेनेबल लाइफस्टाइल वीक के अंतर्गत अलग-अलग विषयों पर जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में चौथे दिन का फोकस टिकाऊ खाद्य प्रणाली और जिम्मेदार खानपान पर रखा गया।
इस अवसर पर ‘एडॉप्ट सस्टेनेबल फूड’ थीम के तहत प्रशिक्षुओं को समझाया गया कि खानपान का सीधा संबंध व्यक्ति के स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों से भी है। भोजन का चयन, उसकी मात्रा और उसे उपयोग करने का तरीका हमारी जीवनशैली को प्रभावित करता है।
अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ और टिकाऊ खानपान को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना समय की जरूरत है। इसके लिए भोजन की गुणवत्ता, पोषण और अनावश्यक बर्बादी को रोकने जैसे पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है।
हॉस्टल प्रभारियों को रेशेदार फल खाने के लिए किया जागरूक
कार्यक्रम के दौरान राजस्थान पुलिस अकादमी में संचालित सभी हॉस्टलों के प्रभारियों को भी स्वस्थ खानपान के प्रति जागरूक किया गया। उन्हें निर्धारित मानकों के अनुसार रेशेदार फल खाने और संतुलित आहार अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
रेशेदार फल और पौष्टिक खाद्य पदार्थ शरीर को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संतुलित आहार व्यक्ति की शारीरिक क्षमता और सामान्य स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक होता है।
पुलिस प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं को शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहना पड़ता है। ऐसे में नियमित दिनचर्या के साथ पौष्टिक भोजन की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अकादमी में स्वस्थ भोजन की आदतों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।
‘उतना ही लो थाली में, व्यर्थ न जाए नाली में’ का दिया संदेश
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भोजन की बर्बादी रोकने को लेकर आयोजित जागरूकता गतिविधि रही। इस दौरान पुलिस प्रशिक्षुओं को भोजन व्यर्थ नहीं करने की शपथ दिलाई गई।
प्रशिक्षुओं को ‘उतना ही लो थाली में, व्यर्थ न जाए नाली में’ का संदेश दिया गया। इसके माध्यम से उन्हें समझाया गया कि भोजन करते समय अपनी आवश्यकता के अनुसार ही थाली में खाना लेना चाहिए। जरूरत से अधिक भोजन लेने और बाद में उसे फेंकने की आदत से बचना चाहिए।
अभियान के जरिए यह भी संदेश दिया गया कि अन्न का प्रत्येक दाना महत्वपूर्ण है। भोजन तैयार करने में पानी, ऊर्जा, श्रम और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग होता है। ऐसे में भोजन को बर्बाद करना केवल खाद्य सामग्री की बर्बादी नहीं, बल्कि उससे जुड़े संसाधनों का भी नुकसान है।
टिकाऊ खानपान और पर्यावरण संरक्षण के बीच क्या है संबंध?
सस्टेनेबल फूड यानी टिकाऊ खानपान का उद्देश्य ऐसी खाद्य आदतों को बढ़ावा देना है, जिनसे मानव स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों का भी संरक्षण हो सके। इसमें संतुलित भोजन, पौष्टिक खाद्य विकल्पों का चयन, खाद्य पदार्थों का उचित उपयोग और भोजन की बर्बादी रोकना शामिल है।
आज के समय में खाद्य पदार्थों की बर्बादी एक गंभीर सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जिम्मेदार खानपान के लिए प्रेरित करना महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
राजस्थान पुलिस अकादमी में आयोजित यह पहल भी इसी दिशा में एक प्रयास है। प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार के प्रति जागरूक करना इस तरह के अभियानों का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
छोटी आदतों से आ सकता है बड़ा बदलाव
राजस्थान पुलिस अकादमी में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली की शुरुआत हमारे रोजमर्रा के व्यवहार से होती है। भोजन उतना ही लेना जितना खाया जा सके, पौष्टिक आहार अपनाना और खाद्य पदार्थों का सही उपयोग करना ऐसी आदतें हैं, जिन्हें हर व्यक्ति अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकता है।
ब्रिक्स सस्टेनेबल लाइफस्टाइल वीक के तहत आयोजित इस अभियान के माध्यम से प्रशिक्षुओं और हॉस्टल प्रभारियों को टिकाऊ खानपान के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही यह संदेश भी दिया गया कि भोजन का सम्मान करना और उसकी बर्बादी रोकना केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय दायित्व भी है।






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