प्रतापगढ़ तहसील में ₹1 लाख की रिश्वत का आरोप! तहसीलदार और कर्मचारी के खिलाफ ACB की FIR

प्रतापगढ़ तहसील में ₹1 लाख की रिश्वत का आरोप! तहसीलदार और कर्मचारी के खिलाफ ACB की FIR

प्रतापगढ़ तहसील में ₹1 लाख की रिश्वत का आरोप! तहसीलदार और कर्मचारी के खिलाफ ACB की FIR

Source: FIR No. 0079/2026
Police Station: C.P.S. Jaipur, ACB District
FIR Date: 24 March 2026
एक मकान को आबादी भूमि में परिवर्तित करवाने की प्रक्रिया… एक लाख रुपये की कथित रिश्वत की मांग… बीस हजार रुपये नकद दिए जाने का आरोप… और इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी ACB की जांच और रिकॉर्ड की गई बातचीत।

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले से जुड़ा यह मामला अब एक FIR के रूप में दर्ज है। इस FIR में तत्कालीन तहसीलदार उज्ज्वल जैन और तहसील कार्यालय में कार्यरत विष्णुदत्त सालवी के नाम आरोपी के रूप में दर्ज किए गए हैं।

लेकिन इस पूरे मामले की शुरुआत आखिर हुई कहां से? शिकायतकर्ता कौन था? रिश्वत की कथित मांग कैसे सामने आई? ACB ने बातचीत का सत्यापन किस तरह किया? और इस मामले में FIR दर्ज होने तक क्या-क्या हुआ?

आइए, FIR में दर्ज घटनाक्रम को क्रमवार समझते हैं।

FIR के अनुसार, शिकायतकर्ता मुकेश मीणा पुत्र रामलाल मीणा, निवासी छोटी बम्बोरी, जिला प्रतापगढ़ ने अपने गांव में स्थित एक मकान को आबादी में रूपांतरित करवाने के संबंध में तहसील कार्यालय प्रतापगढ़ में संपर्क किया था।

FIR में दर्ज शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ता का आरोप था कि इस कार्य को करवाने के लिए तहसील कार्यालय के बाबू विष्णुदत्त सालवी ने तत्कालीन तहसीलदार उज्ज्वल जैन को देने के नाम पर एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।

शिकायतकर्ता ने ACB को बताया था:

“मैं ग्राम छोटी बम्बोरी जिला प्रतापगढ़ का रहने वाला हूं। हमारे गांव में बिलानाम भूमि में मेरा मकान बना हुआ है, जिसको आबादी में रूपान्तरण करवाने हेतु तहसील प्रतापगढ़ के बाबू श्री विष्णु जी से मिला तो उन्होंने उक्त कार्य करने के लिए तहसीलदार जी श्री उज्ज्वल जैन को देने हेतु 01 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की है।”

शिकायतकर्ता ने आगे कहा था:

“मैं श्री विष्णु जी व तहसीलदार श्री उज्ज्वल जैन को रिश्वत नहीं देना चाहता हूं बल्कि उनको रिश्वत लेते हुए पकड़वाना चाहता हूं। मेरी उनसे कोई आपसी रंजिश नहीं है व न ही उधार का लेन-देन बकाया है।”

यही शिकायत इस पूरे मामले में ACB की कार्रवाई का शुरुआती आधार बनी।

9 जुलाई 2025: ACB तक पहुंची शिकायत

FIR में दर्ज विवरण के अनुसार, दिनांक 09 जुलाई 2025 को दोपहर लगभग 12:30 बजे शिकायतकर्ता मुकेश मीणा ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो चित्तौड़गढ़ के तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह को फोन किया।

शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने ACB मुख्यालय जयपुर के टोल फ्री नंबर 1064 पर शिकायत दर्ज करवाई थी और वहां से उसे संबंधित अधिकारी का नंबर देकर बातचीत करने के लिए कहा गया था।

इसके बाद तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह ने शिकायतकर्ता से पूरे मामले की जानकारी ली।

शिकायत को ट्रैप कार्रवाई से संबंधित मानते हुए शिकायतकर्ता को रिश्वत की मांग का सत्यापन करवाने और संबंधित प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने के लिए ब्यूरो चौकी पर उपस्थित होने को कहा गया।

हालांकि, शिकायतकर्ता ने बताया कि वह तत्काल कार्यालय नहीं आ सकता। उसने अनुरोध किया कि विभाग का कोई कर्मचारी प्रतापगढ़ भेज दिया जाए, ताकि रिश्वत की मांग का सत्यापन करवाया जा सके।

इसके बाद तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने हेड कांस्टेबल जितेंद्र सिंह को शिकायतकर्ता से संपर्क करने और नियमानुसार सत्यापन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

11 जुलाई और 14 जुलाई 2025: सत्यापन की तैयारी

FIR के अनुसार, 11 जुलाई 2025 को लगभग 12:30 बजे हेड कांस्टेबल जितेंद्र सिंह ने तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को बताया कि उन्होंने शिकायतकर्ता से फोन पर बातचीत की है।

शिकायतकर्ता ने बताया था कि संदिग्ध आरोपी ने उसे सोमवार को बुलाया है और पुलिसकर्मी से अनुरोध किया था कि प्रतापगढ़ रवाना होने से पहले उसे फोन कर दिया जाए।

इसके बाद 14 जुलाई 2025 को सुबह लगभग 10:55 बजे जितेंद्र सिंह ने दोबारा शिकायतकर्ता से व्हाट्सऐप कॉल पर बातचीत की।

उस समय शिकायतकर्ता ने बताया कि अभी संदिग्ध आरोपी से उसका संपर्क नहीं हुआ है और उसने 16 जुलाई को आने के लिए कहा।

ACB अधिकारी द्वारा आवश्यक निर्देश दिए गए और रिश्वत की मांग का सत्यापन करवाने की प्रक्रिया जारी रखी गई।

16 जुलाई 2025: रिकॉर्डिंग में सामने आई बातचीत

FIR में दर्ज घटनाक्रम के अनुसार, 16 जुलाई 2025 को शिकायतकर्ता के बुलाने पर हेड कांस्टेबल जितेंद्र सिंह लगभग 11:05 बजे चित्तौड़गढ़ स्थित ब्यूरो कार्यालय से DVR और खाली मेमोरी कार्ड लेकर प्रतापगढ़ के लिए रवाना हुए।

इसके बाद शिकायतकर्ता और तहसील कार्यालय के कर्मचारी विष्णुदत्त सालवी के बीच तहसीलदार कार्यालय के बाहर बातचीत हुई।

इस बातचीत को रिकॉर्ड किया गया।

FIR में इस बातचीत के जो मुख्य अंश दर्ज हैं, उनमें आरोपी विष्णुदत्त सालवी के नाम से यह कथन दर्ज है:

“देखो मेरी बात सुनो आप येन केन प्रकारेण कुछ भी कर लो ठीक है, एक से कम किसी भी सूरत में नहीं होगा। देख लो आपके हो रहा है तो भी ठीक है।”

इसके बाद बातचीत में शिकायतकर्ता की ओर से एक लाख रुपये का जिक्र किया गया।

रिकॉर्डिंग के ट्रांसक्रिप्ट में शिकायतकर्ता के कथन के रूप में दर्ज है:

“एक लाख …अस्पष्ट आवाज… ये बीस हजार इकट्ठे करने के लिए भी 15 दिन हो गए।”

बातचीत में एक अन्य आवाज की ओर से यह कथन भी दर्ज किया गया:

“जिस दिन कहोगे पैसे के जिम्मेदार हम तीनों ही हैं और तो कोई दिक्कत नहीं है।”

इसके बाद आरोपी की ओर से यह कथन दर्ज है:

“इसमें ये ही है सर, ये एक से कम तो नहीं होगा।”

FIR में इस रिकॉर्डिंग के संबंध में बताया गया है कि शिकायतकर्ता ने 17 सितंबर 2025 को गवाहों की उपस्थिति में एक आवाज अपनी और दूसरी आवाज विष्णुदत्त सालवी की बताई थी। अन्य आवाजों को उसने अपने दो परिचितों की आवाज बताया था।

FIR में इस बातचीत के आधार पर विष्णुदत्त सालवी द्वारा एक लाख रुपये की रिश्वत की स्पष्ट मांग करना प्रमाणित बताया गया है।

22 जुलाई 2025: बीस हजार रुपये दिए जाने की जानकारी

FIR में आगे 22 जुलाई 2025 की कार्रवाई का विवरण दर्ज है।

इस दिन शिकायतकर्ता मुकेश मीणा और ACB अधिकारी के बीच सत्यापन की प्रक्रिया के तहत आगे की बातचीत हुई।

FIR के अनुसार, शिकायतकर्ता ने बताया कि उसकी विष्णुदत्त सालवी से रिश्वत के संबंध में बातचीत हुई है।

शिकायतकर्ता ने बताया कि संदिग्ध आरोपी ने तहसीलदार उज्ज्वल जैन के लिए एक लाख रुपये की मांग की थी।

इसके साथ ही उसने बताया कि मौके पर विष्णुदत्त सालवी ने उससे 20 हजार रुपये नकद प्राप्त कर लिए हैं और शेष 80 हजार रुपये की रिश्वत राशि देना बाकी है।

FIR के अनुसार, हेड कांस्टेबल जितेंद्र सिंह ने शिकायतकर्ता का प्रार्थना पत्र और रिकॉर्डिंग वाला DVR तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह को प्रस्तुत किया।

DVR को चलाकर सुना गया और रिश्वत की मांग का सत्यापन होना पाया गया।

इसके बाद DVR और प्रार्थना पत्र को कार्यालय में सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए।

साथ ही, अधिकारी ने निर्देश दिया कि शिकायतकर्ता की तहसीलदार उज्ज्वल जैन से भी रिश्वत की मांग के संबंध में बातचीत का सत्यापन करवाया जाए।

22 जुलाई और 28 जुलाई: तहसीलदार से बातचीत का सत्यापन

FIR में आगे दर्ज है कि शिकायतकर्ता और तत्कालीन तहसीलदार उज्ज्वल जैन के बीच भी बातचीत का सत्यापन करवाया गया।

28 जुलाई 2025 को शिकायतकर्ता और उज्ज्वल जैन के बीच तहसीलदार कार्यालय में हुई बातचीत के मुख्य अंश FIR में दर्ज हैं।

शिकायतकर्ता ने कहा:

“आप जो बताओगे मतलब वो, उन्होंने मुझे एक लाख रुपये की कहा था।”

इस पर तहसीलदार उज्ज्वल जैन की ओर से जवाब दर्ज है:

“अच्छा।”

इसके बाद शिकायतकर्ता ने कहा:

“तो बीस हजार मैंने…”

इस पर फिर से जवाब दर्ज है:

“अच्छा।”

शिकायतकर्ता ने आगे कहा:

“वो क्या आपको कहा नहीं कहा मुझे पता नहीं है।”

इस पर तहसीलदार की ओर से दर्ज कथन है:

“मुझे तो फाइल की चर्चा ही नहीं करी।”

इसके बाद शिकायतकर्ता ने कहा:

“आप देख लो, आप आपके हिसाब से आप जो बताओगे वो मैं कर दूंगा।”

तहसीलदार की ओर से जवाब दर्ज है:

“एक बार फाइल को देख लूं।”

FIR में इन बातचीतों को भी सत्यापन की कार्रवाई का हिस्सा बताया गया है।

17 सितंबर 2025: रिकॉर्डिंग और गवाहों के सामने आवाजों की पहचान

FIR में 17 सितंबर 2025 को की गई कार्रवाई का भी उल्लेख है।

इस दिन शिकायतकर्ता मुकेश मीणा ACB कार्यालय में उपस्थित हुआ।

दो स्वतंत्र गवाहों को बुलाने के लिए लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता को पत्र जारी किया गया।

शिकायतकर्ता ने रिकॉर्डिंग में मौजूद आवाजों की पहचान के संबंध में जानकारी दी।

FIR में दर्ज विवरण के अनुसार, शिकायतकर्ता ने रिकॉर्डिंग में एक आवाज अपनी और दूसरी आवाज विष्णुदत्त सालवी की बताई।

इसके बाद ACB अधिकारियों ने रिकॉर्डिंग और उसके ट्रांसक्रिप्ट का परीक्षण किया।

FIR में दर्ज निष्कर्ष के अनुसार, 16 जुलाई 2025 की बातचीत में विष्णुदत्त सालवी द्वारा एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग और 20 हजार रुपये नकद प्राप्त करने की पुष्टि का उल्लेख किया गया है।

इसके बाद क्या हुआ?

FIR में आगे दर्ज विवरण के अनुसार, शिकायतकर्ता ने बताया कि तहसीलदार उज्ज्वल जैन का प्रतापगढ़ से स्थानांतरण हो चुका है।

उसने यह भी बताया कि बाबू विष्णुदत्त सालवी द्वारा रिश्वत के संबंध में उससे आगे कोई बातचीत नहीं की जा रही थी।

शिकायतकर्ता ने अपने हस्तलिखित प्रार्थना पत्र में लिखा:

“पूर्व शिकायत के क्रम में मेरे द्वारा यह रिपोर्ट प्रस्तुत कर यह निवेदन है कि तहसील कार्यालय के बाबू विष्णु जी द्वारा मुझसे इन दिनों में रिश्वत के सम्बन्ध में बातचीत नहीं की जा रही है। तहसीलदार जी का प्रतापगढ़ से स्थानान्तरण हो चुका है, बाबू जी द्वारा यदि मुझसे रिश्वत के लिए सम्पर्क करते हैं तो मैं आपको सूचित कर दूंगा।”

FIR में दर्ज विवरण के अनुसार, इस दौरान लगभग साढ़े तीन महीने से अधिक समय गुजर चुका था और आरोपी विष्णुदत्त सालवी द्वारा शिकायतकर्ता से रिश्वत लेने के संबंध में आगे कोई संपर्क नहीं किया गया था।

इस आधार पर FIR में उल्लेख किया गया कि आरोपी द्वारा रिश्वत राशि ग्रहण करने की संभावना नगण्य थी।

ACB की अंतिम रिपोर्ट और FIR में दर्ज निष्कर्ष

FIR में उपलब्ध दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्यों तथा अब तक की गई कार्रवाई के आधार पर दोनों आरोपियों के संबंध में निष्कर्ष दर्ज किया गया।

FIR के अनुसार, शिकायतकर्ता के मकान की बिलानाम भूमि को आबादी में परिवर्तित करवाने के लिए विष्णुदत्त सालवी द्वारा तत्कालीन तहसीलदार उज्ज्वल जैन के नाम पर एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की गई।

इसमें 20 हजार रुपये नकद प्राप्त करने और शेष 80 हजार रुपये बाद में लेने के लिए सहमत होने का आरोप दर्ज है।

FIR में उज्ज्वल जैन की सहमति और पूरे मामले की जानकारी होने का भी उल्लेख किया गया है।

इसके आधार पर दोनों आरोपियों के विरुद्ध प्रथम दृष्टया अपराध प्रमाणित पाया जाना दर्ज किया गया।

24 मार्च 2026: FIR दर्ज

इस पूरे घटनाक्रम के बाद 24 मार्च 2026 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो जिला ACB के अंतर्गत C.P.S. जयपुर पुलिस स्टेशन में FIR संख्या 0079/2026 दर्ज की गई।

FIR में निम्नलिखित धाराएं दर्ज हैं:

  1. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 के संशोधन सहित) की धारा 7।
  2. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61(2)।

FIR में आरोपी के रूप में दर्ज नाम हैं:

पहला नाम — उज्ज्वल जैन, पुत्र नगीन लाल जैन, तत्कालीन तहसीलदार, तहसील प्रतापगढ़, वर्तमान में तहसीलदार, भू-अभिलेख, जिला डूंगरपुर।

दूसरा नाम — विष्णुदत्त सालवी, पुत्र स्वर्गीय माधवलाल सालवी, तत्कालीन तहसील कार्यालय प्रतापगढ़ में कार्यरत कर्मचारी।

इस FIR में जांच के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजीव जोशी का नाम भी दर्ज है।

समापन

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि FIR में दर्ज घटनाक्रम जुलाई 2025 से शुरू होता है, जबकि FIR 24 मार्च 2026 को दर्ज की गई।

एक मकान को आबादी में परिवर्तित करवाने के लिए कथित तौर पर एक लाख रुपये की रिश्वत मांगने से शुरू हुआ यह मामला रिकॉर्ड की गई बातचीत, 20 हजार रुपये नकद प्राप्त करने के आरोप और ACB द्वारा किए गए सत्यापन के बाद FIR तक पहुंचा।

हालांकि, FIR में दर्ज आरोपों और पुलिस द्वारा दर्ज किए गए प्रथम दृष्टया निष्कर्ष को अंतिम न्यायिक फैसला नहीं माना जा सकता। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होना है।

यह रिपोर्ट FIR में उपलब्ध तथ्यों, दर्ज बयानों, बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट और आधिकारिक निष्कर्षों पर आधारित है।

आप देख रहे थे इस मामले की पूरी पड़ताल।

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