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Home - अर्थव्यवस्था - डिजिटल पेमेंट के दौर में भी कैश की भारी डिमांड, मोदी सरकार जल्द ला सकती है ‘प्लास्टिक के नोट’

अर्थव्यवस्थादिल्लीभारत

डिजिटल पेमेंट के दौर में भी कैश की भारी डिमांड, मोदी सरकार जल्द ला सकती है ‘प्लास्टिक के नोट’

By The Public Hub
Last updated: May 29, 2026
4 Min Read

नई दिल्ली। भारत में डिजिटल पेमेंट का दायरा भले ही रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया हो, लेकिन कैश (नकदी) की डिमांड कम होने का नाम नहीं ले रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए और नोट छापने की बढ़ती लागत को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब देश में पॉलीमर यानी प्लास्टिक के बैंक नोटों को चलन में लाने के आइडिया पर गंभीरता से काम कर रहा है।

Contents
लगातार बढ़ रहा है नोट छापने का खर्चगंदे और फटे नोटों से मिलेगी निजातडिजिटल इंडिया में भी कैश की भारी डिमांड2012 में मनमोहन सरकार ने भी की थी कोशिशइन देशों में पहले से चल रहे हैं प्लास्टिक के नोट

बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, RBI की हालिया बोर्ड बैठकों में पॉलीमर नोटों के मुद्दे पर चर्चा हुई है। अगर योजना के मुताबिक सब कुछ ठीक रहा, तो जल्द ही आम लोगों के हाथों में कागज की जगह प्लास्टिक के नोट नजर आ सकते हैं। इसके लिए जल्द ही एक पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किया जा सकता है।

लगातार बढ़ रहा है नोट छापने का खर्च

आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, नोटों की छपाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है:

  • वित्त वर्ष 2024-25: कागजी नोटों की छपाई पर 6,372.8 करोड़ रुपये खर्च हुए।
  • वित्त वर्ष 2023-24: यह खर्च 5,101.4 करोड़ रुपये था। महज एक साल में लागत में आए इस बड़े उछाल के कारण केंद्रीय बैंक अब एक ऐसा विकल्प तलाश रहा है, जो लंबे समय तक चले और जिससे खर्च कम किया जा सके।

गंदे और फटे नोटों से मिलेगी निजात

हर साल बड़ी संख्या में पुराने और खराब नोटों को नष्ट करना पड़ता है। वित्त वर्ष 2024-25 में ही करीब 23.8 अरब खराब नोटों को चलन से बाहर किया गया, जो पिछले साल के मुकाबले 12.3% ज्यादा है। इनमें 500 और 100 रुपये के नोट सबसे ज्यादा थे। एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्लास्टिक के नोट कागज के मुकाबले ज्यादा मजबूत और टिकाऊ होते हैं। ये पानी से खराब नहीं होते और इनके फटने की गुंजाइश भी कम होती है।

डिजिटल इंडिया में भी कैश की भारी डिमांड

यूपीआई (UPI) के इस दौर में भी लोगों के बीच नकदी की मांग तेजी से बढ़ रही है।

  • 15 मई तक देश में चलन में मौजूद कुल नकदी 42.86 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
  • बाजार में छोटे नोटों (10 और 20 रुपये) की मांग भी बनी हुई है, लेकिन कुल चलन में इनकी हिस्सेदारी 1% से भी कम है।

2012 में मनमोहन सरकार ने भी की थी कोशिश

प्लास्टिक नोटों का यह आइडिया नया नहीं है। साल 2012 में तत्कालीन मनमोहन सरकार ने भी 5 शहरों में 10 रुपये के पॉलीमर नोटों का परीक्षण करने की योजना बनाई थी। हालांकि, उस समय एटीएम मशीनों से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों के कारण यह प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका। लेकिन अब तकनीक काफी एडवांस हो चुकी है, जिससे इस प्रोजेक्ट के सफल होने की उम्मीद बढ़ गई है।

इन देशों में पहले से चल रहे हैं प्लास्टिक के नोट

दुनिया के करीब 60 देशों में पहले से ही पॉलीमर बैंक नोट इस्तेमाल किए जा रहे हैं। साल 1988 में ऑस्ट्रेलिया ने सबसे पहले प्लास्टिक नोट जारी किए थे। इसके बाद सिंगापुर, कनाडा, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया और रोमानिया जैसे देशों ने भी इस तकनीक को अपनाया है।

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