राजस्थान में भीषण गर्मी की दस्तक के साथ ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश की जनता को जल संकट से बचाने के लिए ‘मिशन मोड’ में काम शुरू कर दिया है। रविवार को प्रदेशभर में एक अभूतपूर्व राज्यव्यापी विशेष अभियान चलाया गया, जिसके तहत प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने स्वयं ग्राउंड जीरो पर उतरकर खराब हैंडपंपों को दुरुस्त करवाया। यह अभियान न केवल पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए था, बल्कि प्रशासन की जवाबदेही तय करने का एक बड़ा संदेश भी था।
मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0: ₹11,200 करोड़ का मास्टरप्लान
प्रदेश के 20 हजार गांवों में स्थायी जल समाधान के लिए सरकार ने ₹11,200 करोड़ का भारी-भरकम प्रावधान किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य कम वर्षा और गिरते भू-जल स्तर की समस्या को जड़ से खत्म करना है।
- लक्ष्य: 5 लाख वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं (एनिकट, चेक डैम, तालाब और जोहड़) का निर्माण।
- रणनीति: वर्षा जल का अधिकतम संचयन और पुराने जल स्रोतों का पुनरुद्धार।
अभियान की प्रगति: चरणों में सफलता का विवरण
| चरण (Phase) | लक्ष्य एवं कार्य | बजट / खर्च | स्थिति |
| प्रथम चरण | 5,135 गांवों में 1.16 लाख कार्य | ₹2,500 करोड़ | सफलतापूर्व पूर्ण |
| द्वितीय चरण | 337 पंचायतों में 1.04 लाख कार्य | ₹2,880 करोड़ | प्रगति पर (स्वीकृत) |
| तीसरा चरण (2026-27) | 5,000 गांवों में 1.10 लाख कार्य | ₹2,500 करोड़ | बजट घोषणा (जारी) |
जयपुर जिला प्रशासन का ’48 घंटे’ का अल्टीमेटम
राजधानी जयपुर में जल संकट की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर संदेश नायक ने कड़ा रुख अपनाया है।
- सख्त निर्देश: कलेक्टर ने जिले के सभी चिन्हित खराब हैंडपंपों को आगामी 48 घंटे के भीतर ठीक करने के निर्देश दिए हैं।
- चेतावनी: “तकनीकी खराबी के कारण कोई भी जल स्रोत बंद नहीं रहना चाहिए। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सीधे तौर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
- विशेष टीमें: आमेर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष तकनीकी टीमें तैनात की गई हैं, जो गांव-गांव जाकर मौके पर ही मरम्मत कार्य करेंगी।
जनता के लिए सहायता: यहाँ करें शिकायत
यदि आपके क्षेत्र में भी हैंडपंप खराब है या पेयजल की किल्लत है, तो सरकार ने त्वरित समाधान के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:
- राजस्थान संपर्क पोर्टल: 181
- PHED हेल्पलाइन: 1800-180-6088 (टोल फ्री)
द पब्लिक हब विश्लेषण: क्या टलेगा जल संकट?
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक अधिकारियों का स्वयं मौके पर जाकर हैंडपंप ठीक करवाना यह दर्शाता है कि इस बार सरकार पेयजल आपूर्ति को लेकर बेहद गंभीर है। ₹11,200 करोड़ का दीर्घकालिक निवेश और हैंडपंपों की त्वरित मरम्मत का यह ‘टू-वे’ अप्रोच राजस्थान को आने वाले महीनों में राहत दिला सकता है। हालांकि, सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ‘SNA-SPARSH’ और अन्य मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए यह काम कितनी गुणवत्ता के साथ पूरा होता है।