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Reading: पार्ट टाइम कोचों के सहारे ‘मैदान मारने’ की तैयारी; द्रोणाचार्य अवॉर्डी बोले- बिना स्थाई कोच के नहीं तैयार होंगे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
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पार्ट टाइम कोचों के सहारे ‘मैदान मारने’ की तैयारी; द्रोणाचार्य अवॉर्डी बोले- बिना स्थाई कोच के नहीं तैयार होंगे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी

By The Public Hub
Last updated: March 26, 2026
3 Min Read

राजस्थान में खेल प्रतिभाओं को तराशने वाली सबसे बड़ी संस्था, ‘राज्य क्रीड़ा परिषद’ खुद सिस्टम की लापरवाही का शिकार होकर संकट में है। एक तरफ सरकार खिलाड़ियों को पदक जीतने पर करोड़ों के इनाम और सरकारी नौकरी देने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाएं तैयार करने के लिए आवश्यक कोचों और अधिकारियों की भारी कमी ने पूरे तंत्र की पोल खोल दी है।

Contents
पूरे प्रदेश में मात्र 2 खेल अधिकारी, जयपुर मुख्यालय खालीआंकड़ों में राजस्थान स्पोर्ट्स काउंसिल का संकटपार्ट-टाइम कोचों के भरोसे भविष्य, गुणवत्ता पर सवालएक्सपर्ट व्यू: “स्थाई कोच ही ग्रास रूट से तैयार करते हैं खिलाड़ी”

पूरे प्रदेश में मात्र 2 खेल अधिकारी, जयपुर मुख्यालय खाली

हैरानी की बात यह है कि पूरे राजस्थान में मात्र 2 खेल अधिकारी तैनात हैं। इनमें से अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज लिम्बाराम लंबे समय से बीमार होने के कारण कार्यालय नहीं आ पा रहे हैं, जबकि दूसरे अधिकारी धनेश्वर मईडा बांसवाड़ा में कार्यरत हैं। राजस्थान के हृदय और खेल गतिविधियों के केंद्र जयपुर मुख्यालय में एक भी खेल अधिकारी नहीं है। कई जिलों में परिषद का कार्यालय एक ही व्यक्ति के भरोसे चल रहा है, तो कहीं शिक्षा विभाग के पीटीआई को चार्ज दिया गया है।

आंकड़ों में राजस्थान स्पोर्ट्स काउंसिल का संकट

क्रीड़ा परिषद के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति बेहद चिंताजनक है:

  • कुल खेल अकादमियां: 22
  • खेल अधिकारी: मात्र 02 (एक लंबे समय से बीमार)
  • स्थाई कोच: मात्र 61 (41 जिलों के लिए)
  • अल्पकालीन (Part-time) कोच: 500
  • खेलो इंडिया केंद्र: 50
  • खेलो इंडिया केंद्रों पर अल्पकालीन कोच: 50

पार्ट-टाइम कोचों के भरोसे भविष्य, गुणवत्ता पर सवाल

राज्य के 41 जिलों में परिषद के कार्यालय तो हैं, लेकिन स्थाई कोचों की संख्या केवल 61 है। इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने करीब 500 पार्ट-टाइम कोच नियुक्त किए हैं। हालांकि इनमें नेशनल मेडलिस्ट और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी शामिल हैं, लेकिन बेहद कम वेतन और सीमित समय के कारण उनकी कोचिंग की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

एक्सपर्ट व्यू: “स्थाई कोच ही ग्रास रूट से तैयार करते हैं खिलाड़ी”

द्रोणाचार्य अवॉर्डी कोच महावीर सैनी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी तैयार करने के लिए उसे ग्रास रूट (जमीनी स्तर) से ट्रेनिंग देनी पड़ती है। स्थाई कोच ही खिलाड़ी की क्षमता, उसकी मेहनत और उसे इंजरी (चोट) से बचाने के वैज्ञानिक तरीकों को बेहतर समझता है। खिलाड़ी की ज़रा सी गलती उसका करियर खराब कर सकती है, इसलिए स्थाई कोच की निरंतर निगरानी अनिवार्य है।

TAGGED:Part Time CoachesRajasthan NewsRajasthan Sports CouncilSports Infrastructure Rajasthan
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