जयपुर। राजस्थान में सोलर और विंड एनर्जी (सौर एवं पवन ऊर्जा) के रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन के बीच ग्रिड की स्थिरता और भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC) ने प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक थर्मल पावर खरीद (Long-term Thermal Power Procurement) को मंजूरी दे दी है।
आयोग द्वारा 15 मई 2026 को जारी इस ऐतिहासिक आदेश के बाद अब राजस्थान को केवल नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) पर निर्भर नहीं रहना होगा। चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य अब कोयला आधारित ‘बेसलोड पावर’ का भी सहारा लेगा, जिससे उद्योगों और कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत मिलेगी।
सोलर और विंड प्रोजेक्ट की व्यावहारिक चुनौतियां
भौगोलिक दृष्टिकोण से राजस्थान देश में सौर ऊर्जा का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है, लेकिन हरित ऊर्जा के साथ कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी जुड़ी हैं। रात के समय सोलर प्लांट से बिजली का उत्पादन पूरी तरह ठप हो जाता है। इसी तरह, मौसम में बदलाव या हवा की गति धीमी होने पर विंड एनर्जी का उत्पादन भी अचानक गिर जाता है।
ऐसे में बिजली के केंद्रीय ग्रिड (Grid) को ट्रिप होने से बचाने और बिना किसी कट के लगातार सप्लाई देने के लिए ‘बेसलोड पावर’ (ऐसी बिजली जो बिना रुके लगातार मिलती रहे) की आवश्यकता होती है। थर्मल पावर प्लांट (कोयला आधारित स्टेशन) इस बेसलोड को बनाए रखने में सबसे भरोसेमंद माने जाते हैं।
वर्ष 2035-36 तक 4440 मेगावाट बिजली की दरकार
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के देशव्यापी आकलन के अनुसार, राजस्थान में जिस तेजी से औद्योगिक विस्तार, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (EV) और शहरीकरण बढ़ रहा है, उसे देखते हुए वर्ष 2035-36 तक राज्य को 4440 मेगावाट अतिरिक्त कोयला आधारित बिजली क्षमता की सख्त आवश्यकता होगी। इसी रिपोर्ट को आधार बनाते हुए आरईआरसी (RERC) ने प्रदेश की सरकारी बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) को दीर्घकालिक अनुबंध करने की हरी झंडी दी है।
बिजली खरीद के लिए आयोग ने दिए ये 3 विकल्प
| खरीद का माध्यम | काम करने का तरीका | मुख्य लाभ |
| 1. समझौता ज्ञापन (MoU) | राज्य सरकार सीधे अन्य उत्पादक राज्यों या सार्वजनिक उपक्रमों के साथ अनुबंध करेगी। | त्वरित और सुरक्षित बिजली आवंटन। |
| 2. संयुक्त उद्यम (Joint Venture) | रीको, डिस्कॉम या अन्य सरकारी कंपनियां निजी क्षेत्र के साथ मिलकर नए प्लांट लगाएंगी। | निवेश में सहभागिता और मालिकाना हक। |
| 3. प्रतिस्पर्धी बोली (TBCB Model) | ‘टैरिफ बेस्ड कम्पेटिटिव बिडिंग’ के जरिए कंपनियों से टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। | न्यूनतम दरें और प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता। |
TBCB मॉडल से उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा?
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, ‘टैरिफ बेस्ड कम्पेटिटिव बिडिंग’ (TBCB) मॉडल इस पूरी प्रक्रिया का सबसे पारदर्शी और किफायती हिस्सा है। इसमें देश भर की बड़ी बिजली उत्पादक कंपनियां राजस्थान को बिजली बेचने के लिए अपनी दरें (Tariff) पेश करेंगी। जो कंपनी सबसे कम कीमत और बेहतर शर्तों पर बिजली देने का प्रस्ताव रखेगी, उसे ही टेंडर दिया जाएगा। इससे डिस्कॉम्स की बिजली खरीद लागत कम रहेगी, जिसका सीधा फायदा भविष्य में आम उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली या स्थिर टैरिफ के रूप में मिलेगा।
यह आदेश सिर्फ एक मंजूरी नहीं है, बल्कि अगले एक दशक के लिए राजस्थान की ‘दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा रणनीति’ का सबसे मजबूत हिस्सा है, जो राज्य को हाइब्रिड पावर मॉडल (सस्ती सौर ऊर्जा + स्थायी थर्मल ऊर्जा) की दिशा में अग्रणी बनाएगा।