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राजस्थान

राजस्थान हाईकोर्ट की फटकार: ‘बोर्ड लगा दो कि बच्चे अपनी रिस्क पर आ रहे’, जर्जर स्कूलों पर सरकार को घेरा

By The Public Hub
Last updated: February 17, 2026
3 Min Read

जयपुर: राजस्थान के सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत और उनकी मरम्मत के लिए ऊंट के मुंह में जीरे के समान बजट आवंटन पर राजस्थान हाईकोर्ट ने सोमवार को बेहद सख्त रुख अपनाया है। न्यायाधीश महेन्द्र कुमार गोयल और न्यायाधीश अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद स्वप्रेरणा से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मौखिक टिप्पणी की कि सरकार स्कूलों के बाहर यह बोर्ड लगवा दे कि बच्चे यहाँ अपनी रिस्क पर आ रहे हैं और उन्हें शिक्षा का अधिकार नहीं है।

Contents
20 हजार करोड़ की जरूरत, बजट मिला नाममात्रदानदाताओं के विश्वास और टॉयलेट की कमी पर उठाए सवाल5 मार्च तक आखिरी मौका

20 हजार करोड़ की जरूरत, बजट मिला नाममात्र

कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि प्रदेश के स्कूलों की मरम्मत के लिए करीब 20 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता है। इसके विपरीत, राज्य सरकार ने जर्जर भवनों और कमरों के लिए केवल 550 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार कागजों के अलावा कुछ नहीं कर रही है और फाइल 1540 पेजों की हो चुकी है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि क्या अस्पताल जैसे कार्यों को छोड़कर अन्य सभी टेंडर रोक दिए जाएं?

दानदाताओं के विश्वास और टॉयलेट की कमी पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार को सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और भामाशाहों से सहयोग लेने का सुझाव दिया। कोर्ट ने कहा कि सांवरिया सेठ मंदिर में हर साल 600 करोड़ का चढ़ावा आता है, लेकिन सरकार को दानदाताओं का सहयोग नहीं मिल रहा, इसका मतलब जनता को विश्वास नहीं है। इसके अलावा, कोर्ट ने महिला सुरक्षा और सुविधा पर भी गंभीर टिप्पणी की:

  • आधे सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में शिक्षिकाओं और बालिकाओं के लिए टॉयलेट तक नहीं हैं।
  • कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी संस्थानों का चार्टर्ड इंजीनियर से निरीक्षण करवाया जाए, जिसकी शुरुआत जयपुर से होगी।
  • कोर्ट ने तंज कसते हुए कहा कि आज विज्ञापन देना पड़ रहा है कि ‘म्हारै छोरे क्या छोरियों से कम हैं’, लेकिन हम बेटियों को बुनियादी टॉयलेट तक मुहैया नहीं करा पा रहे।

5 मार्च तक आखिरी मौका

कोर्ट ने इस मामले में सहयोग के लिए अधिवक्ता आलोक गर्ग और सुनील समदड़िया को न्यायमित्र (Amicus Curiae) नियुक्त किया है। सरकार को चेतावनी देते हुए सुनवाई 5 मार्च तक टाल दी गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आखिरी मौका है और इसके बाद कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


TAGGED:Budget for School RepairDilapidated SchoolsJustice Mahendra Kumar GoyalRajasthan Education DepartmentRajasthan High Court
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