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जयपुर

राजस्थान हाईकोर्ट की दो टूक: सुरक्षित नहीं तो 1 जुलाई से बंद होंगे स्कूल; प्री-प्राइमरी बच्चों के लिए बदला नियम

By The Public Hub
Last updated: March 6, 2026
4 Min Read

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों और उनकी मरम्मत में हो रही भारी देरी पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने सरकार को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि बच्चों की सुरक्षा के मामले में पैसे की कमी या बजट का कोई भी बहाना नहीं चलेगा। अदालत ने मुख्य सचिव को स्कूल भवनों की मरम्मत और नए निर्माण को लेकर तैयार की गई विस्तृत कार्ययोजना पर शपथ पत्र (Affidavit) पेश करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

न्यायाधीश महेन्द्र कुमार गोयल और न्यायाधीश अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने झालावाड़ स्कूल हादसे पर स्वप्रेरणा से दर्ज याचिका और अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह तल्ख टिप्पणियां कीं। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा एक बेहद गंभीर विषय है। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए सरकार से पूछा कि जिन सरकारी और निजी स्कूलों के भवन सुरक्षित नहीं हैं, उन्हें 1 जुलाई (नए सत्र) से क्यों न पूरी तरह बंद कर दिया जाए। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्री-प्राइमरी (छोटे बच्चों) की कक्षाएं केवल भूतल (Ground Floor) पर ही संचालित होनी चाहिए। इन बच्चों को न तो बेसमेंट में और न ही ऊपरी मंजिलों पर बैठाया जाए।

सुनवाई के दौरान सरकारी कार्यप्रणाली की धीमी गति भी पूरी तरह उजागर हुई। कोर्ट को बताया गया कि 3700 स्कूलों के लिए नए भवन बनने प्रस्तावित थे, जिनमें से सिर्फ 114 को ही स्वीकृति मिल पाई है। हैरानी की बात यह है कि इनमें से भी अब तक केवल पांच भवनों का काम प्लिन्थ लेवल (कुर्सी स्तर) तक पहुंच पाया है, जबकि शेष का काम सिर्फ कागजों में ही दौड़ रहा है। इस पर कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि मार्च में बजट लैप्स होने की स्थिति आ गई है और विभाग अभी तक टेंडर की ही प्रक्रिया में उलझा है। पिछले साल जुलाई से स्कूल भवनों के गिरने के लगातार आ रहे मामलों को देखते हुए कोर्ट ने सुझाव दिया कि क्यों न चार्टर्ड इंजीनियर नियुक्त कर दिए जाएं। 1 जुलाई से केवल उन्हीं स्कूलों को संचालन की अनुमति मिले, जिन्हें ये इंजीनियर सुरक्षित होने का सर्टिफिकेट दें।

बजट की कमी का मुद्दा उठने पर हाईकोर्ट ने दो टूक कहा कि यह सरकार की निजी समस्या है, लेकिन अदालती आदेशों की पालना हर हाल में सुनिश्चित होनी चाहिए। इसी बीच, केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने स्कूल भवनों के लिए बजट की मांग तो की है, लेकिन राज्य के अधिकारियों ने अभी तक पूरी जानकारी केंद्र को नहीं भेजी है। इसके अलावा, सुनवाई में यह तथ्य भी सामने आया कि सरकार ने स्कूल भवनों की मरम्मत और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रवासियों (NRIs) से भी आर्थिक सहयोग मांगा था, जिसके तहत अब तक केवल 11 करोड़ रुपये की ही सहायता राशि प्राप्त हो सकी है।

TAGGED:Jhalawar School Accident CaseJustice Mahendra Kumar GoyalPre-Primary Class Ground Floor RuleRajasthan High Court School Safety NewsSchool Building Repair Rajasthan
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