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जोधपुर

जोधपुर मना रहा अपना ‘बर्थडे’, क्या जानते हैं इस शहर के 10 सबसे चौंकाने वाले राज?

By The Public Hub
Last updated: May 12, 2026
5 Min Read
night view of jodhpur and mehrangarh fort in jodhpur, rajasthan, india

राजस्थान की धोरों वाली धरती पर बसा एक ऐसा शहर, जिसकी सुबह की पहली किरण मेहरानगढ़ की प्राचीर को चूमती है और जिसकी शाम ढलते ही नीली गलियां किसी परीलोक जैसी लगने लगती हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं ‘मारवाड़ के ताज’ यानी जोधपुर की। आज जोधपुर अपना स्थापना दिवस मना रहा है। 12 मई 1459 को राव जोधा ने जिस नींव को रखा था, आज वह एक विश्वप्रसिद्ध ‘हेरिटेज हब’ बन चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस नीले शहर की सुंदरता के पीछे कितने रहस्य और दिलचस्प किस्से छिपे हैं?

Contents
1. क्यों है यह ‘ब्लू सिटी’?2. मेहरानगढ़ किला, जिसे ‘फरिश्तों’ ने बनाया!3. राजा राम मेघवाल का बलिदान4. दुनिया का सबसे बड़ा निजी निवास: उम्मेद भवन पैलेस5. ‘सन सिटी’ का खिताब6. बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेम7. मिर्ची वड़ा और मावा कचोरी का चस्का8. ओसियां: राजस्थान का खजुराहो9. साफा और जोधपुरी सूट: ग्लोबल फैशन10. मारवाड़ी घोड़ों का ‘स्वैग’

1. क्यों है यह ‘ब्लू सिटी’?

जोधपुर को दुनिया ‘ब्लू सिटी’ के नाम से जानती है, लेकिन इसके पीछे की वजह बड़ी रोचक है। पुराने समय में यहां के ब्राह्मण अपने घरों को कीड़ों (Termites) से बचाने और भीषण गर्मी में ठंडक रखने के लिए चूने के साथ ‘कॉपर सल्फेट’ मिलाते थे, जिससे नीला रंग उभरता था। आज यही नीला रंग इस शहर की ग्लोबल पहचान बन गया है।

2. मेहरानगढ़ किला, जिसे ‘फरिश्तों’ ने बनाया!

प्रसिद्ध लेखक रुडयार्ड किपलिंग ने मेहरानगढ़ किले को देखकर कहा था- “यह इंसानों ने नहीं, बल्कि परियों और फरिश्तों ने बनाया है।” जमीन से 410 फीट ऊँची पहाड़ी पर खड़ा यह किला आज भी अजेय है। इसकी दीवारों पर आज भी युद्ध के गोलों के निशान देखे जा सकते हैं।

3. राजा राम मेघवाल का बलिदान

इतिहास कहता है कि मेहरानगढ़ की नींव को मजबूत करने और राज्य की खुशहाली के लिए राजा राम मेघवाल ने स्वेच्छा से किले की नींव में जीवित दफन होना स्वीकार किया था। आज भी किले में उनकी याद में एक स्मारक बना हुआ है, जो मारवाड़ के लोगों के बलिदान की गाथा सुनाता है।

4. दुनिया का सबसे बड़ा निजी निवास: उम्मेद भवन पैलेस

जोधपुर में स्थित उम्मेद भवन पैलेस दुनिया के सबसे बड़े प्राइवेट घरों में से एक है। इसके एक हिस्से में आज भी जोधपुर का पूर्व राजपरिवार रहता है, एक हिस्सा होटल है और एक म्यूजियम। इसे बनाने में किसी सीमेंट का नहीं, बल्कि ‘इंटरलॉकिंग’ पत्थरों का इस्तेमाल हुआ है।

5. ‘सन सिटी’ का खिताब

जोधपुर को ‘सूर्य नगरी’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां साल के लगभग हर दिन धूप खिली रहती है। सर्दियों में भी यहां की गुनगुनी धूप सैलानियों को अपनी ओर खींचती है।

6. बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेम

जोधपुर के पास स्थित खेजड़ली गांव उस बलिदान का गवाह है, जहां 363 लोगों ने पेड़ों को बचाने के लिए अपनी जान दे दी थी। जोधपुर की पहचान यहां के काले हिरण और चिंकारा से भी है, जिन्हें बिश्नोई समाज अपनी संतान की तरह पालता है।

7. मिर्ची वड़ा और मावा कचोरी का चस्का

अगर आप जोधपुर आए और यहां का ‘मिर्ची वड़ा’ नहीं खाया, तो आपकी यात्रा अधूरी है। यहां की ‘जोधपुरी मावा कचोरी’ इतनी मशहूर है कि लोग इसे मीठे के शौकीनों के लिए सबसे बड़ा तोहफा मानते हैं। यहां का स्वाद सात समंदर पार तक मशहूर है।

8. ओसियां: राजस्थान का खजुराहो

जोधपुर जिले में स्थित ओसियां के मंदिर अपनी बारीक नक्काशी के लिए जाने जाते हैं। इन्हें ‘राजस्थान का खजुराहो’ कहा जाता है। यह प्राचीन सिल्क रूट का एक प्रमुख केंद्र हुआ करता था।

9. साफा और जोधपुरी सूट: ग्लोबल फैशन

जोधपुर ने दुनिया को ‘जोधपुरी कोट’ और ‘ब्रीचेस’ (Breeches) दिया है। यहां का रंग-बिरंगा ‘साफा’ (पगड़ी) सम्मान का प्रतीक है। आज भी हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक जोधपुरी पहनावे का क्रेज सिर चढ़कर बोलता है।

10. मारवाड़ी घोड़ों का ‘स्वैग’

दुनियाभर में मशहूर ‘मारवाड़ी नस्ल’ के घोड़े जोधपुर की शान हैं। अपने मुड़े हुए कानों और अद्भुत वफादारी के लिए मशहूर ये घोड़े आज भी राजसी ठाठ-बाट का हिस्सा हैं।

TAGGED:Bishnoi Community.Blue City SecretsJodhpur Foundation DayJodhpuri FoodMehrangarh FortRajasthan TourismRao JodhaUmaid Bhawan Palace
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